वीरगंज: जलसंकट से लेकर धमकी प्रकरण तक : मंत्री प्रदीप यादव का अनुभव
बीरगंज, ४ सेप्टेंबर ०२५ । वीरगंज केवल मेरा जन्मस्थल ही नहीं है, यह राजनीतिक संघर्ष और स्वीकृति की भूमि भी है। हाल के दिनों में यहां सबसे पहले पीने के पानी का गंभीर संकट देखा गया। संघीय खानेपानी मन्त्री के रूप में मैंने इस समस्या के तत्कालिक और दीर्घकालिक समाधान के लिए वीरगंज महानगरपालिका के साथ सामंजस्य स्थापित कर युद्धस्तर पर सक्रियता दिखाई।
मधेश प्रदेश में पानी की समस्या व्यापक रूप से देखी गई। इसलिए प्रदेश सरकार के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों से परामर्श और सहयोग लेकर समाधान की दिशा में प्रयास जारी रखे।
हैजा और डायरिया का प्रकोप
पीने के पानी की समस्या का समाधान आगे बढ़ ही रहा था कि वीरगंज में हैजा और डायरिया के मरीज सामने आने लगे। ऐसे समय में मैंने खुद जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनीं, असंतोष को समझा और नागरिकों की कठिनाइयों के समाधान के लिए दिन-रात काम किया। इसके लिए प्रधानमंत्री को जमीनी स्तर की सूचनाएं दीं, संघीय स्वास्थ्य मंत्री और मंत्रालय से समन्वय किया तथा स्थानीय सरोकारवालों के साथ लगातार बैठकें कीं।
जनता के बीच संघर्ष से निकला व्यक्ति होने के नाते मैं उनकी पीड़ा समझना और गुनासों का समाधान करना अपना कर्तव्य मानता हूं। मेरा राजनीतिक उद्देश्य हमेशा यही रहा है कि जनता को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार मिले।
धमकी भरा फोन कॉल
मेरे पास आने वाले फोन कॉल्स को मैं यथासंभव खुद उठाता हूं। यहां तक कि सेव न किए गए नंबर भी रिसीव करता हूं और अगर कभी तकनीकी या आधिकारिक कारण से फोन न उठा पाऊं तो बाद में कॉल बैक करता हूं।
गत सप्ताह मेरे मोबाइल पर एक अज्ञात महिला का फोन आया। वह बेहद आक्रोशित थीं। पहले तो मुझे लगा कि शायद उनके किसी परिजन की तबीयत खराब है, इसी पीड़ा के कारण वह ऐसा बोल रही हैं। लेकिन स्थिति उलट थी – उन्होंने मदद मांगने के बजाय मुझे जान से मारने की धमकी दी।
यह जानकारी और फोन नंबर मैंने तत्काल पर्सा पुलिस को उपलब्ध कराए। साथ ही वीरगंज नगर प्रमुख राजेशमान सिंह और पर्सा जनस्वास्थ्य कार्यालय के प्रमुख को भी सूचित किया। मैंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वास्तव में उनके परिवार का कोई सदस्य बीमार है तो सरकार की ओर से हर संभव सहयोग किया जाएगा।
झूठा प्रचार और ऑडियो प्रकरण
बाद में अस्पताल में जांच करने पर पता चला कि वीरगंज के किसी भी अस्पताल में उस महिला का कोई परिजन भर्ती नहीं था। इस बीच, उस महिला ने मुझे धमकाते हुए बनाए गए ऑडियो को एडिट कर सार्वजनिक कर दिया। लेकिन संयोगवश मूल ऑडियो भी बाहर आ गया, जिससे पूरा सत्य स्पष्ट हो गया।
पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और महिला को हिरासत में लिया। व्यक्तिगत रूप से मेरा उनके प्रति कोई पूर्वाग्रह नहीं है।
लोकतांत्रिक अधिकार बनाम अराजकता
एक जनप्रतिनिधि पर जनता का आक्रोश जताना सामान्य है, लेकिन अफवाह फैलाना और जान से मारने की धमकी देना चिंता का विषय है। स्वाभाविक रूप से मेरे हितैषी इसके प्रति चिंतित और सतर्क रहे।
इस प्रकरण में यह भी आवश्यक है कि उस महिला को उकसाने वाले या उसे दिशा देने वाले लोगों की मंशा का पता लगाया जाए, जिसके लिए पुलिस पहले से जांच कर रही है।
मेरी दृष्टि में किसी को गलत रास्ते पर जाने से रोकना भी हमारी जिम्मेदारी है। मैंने स्वयं पुलिस से आग्रह किया है कि महिला को सुधारने और लोकतांत्रिक अधिकारों के सही प्रयोग में मदद की जाए। सचिवालय के माध्यम से पुलिस को संदेश भी भेजा कि उनके साथ नरमी बरती जाए।
लोकतंत्र में सवाल करने का अधिकार
मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि समस्या उठाना या सवाल करना लोकतंत्र का हिस्सा है। लेकिन हिंसा की भावना व्यक्त करना और अराजकता फैलाना स्वीकार्य नहीं है।
कानून से ऊपर कोई नहीं है। हमें न्याय व्यवस्था और अदालत की निष्पक्षता पर भरोसा रखना होगा। पुलिस की जांच पूरी हो चुकी है और अब सबको न्यायपूर्ण फैसले की प्रतीक्षा है।
निष्कर्ष
मेरे विचार में लोकतंत्र में जनता को शिकायत दर्ज करने और सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। लेकिन किसी भी बहाने अराजकता फैलाने और जान से मारने की धमकी देना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।
मैं पुनः दोहराता हूं – जनता का सवाल करना लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन हिंसा का रास्ता कभी स्वीकार्य नहीं हो सकता।
मंत्री प्रदीप यादव का स्टेटस से

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