जेन-ज़ी प्रतिनिधि नाराज़, वार्ता से बाहर निकले
काठमांडू, बुधवार २५ भाद्र २०८२ । ‘जेन-ज़ी’ आंदोलन के प्रतिनिधियों और राज्य पक्ष के बीच बुधवार को हुई बातचीत अचानक विवाद में बदल गई। नेपाली सेना के मुख्यालय में आयोजित इस बैठक से कई जेन-ज़ी प्रतिनिधि असंतुष्ट होकर बाहर निकल गए।
दरअसल, बातचीत में विवादास्पद व्यापारी दुर्गा प्रसाई और राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) को भी शामिल करने की कोशिश की गई। इस प्रस्ताव के विरोध में जेन-ज़ी प्रतिनिधि रक्षा बम सहित कुछ सदस्य बैठक से उठकर बाहर चले गए।
रक्षा बम ने सोशल मीडिया पर लिखा—
“राष्ट्रपतिसे मिलने से पहले दुर्गा प्रसाई और रास्वपा समूह से भी बातचीत करनी होगी, यह सुझाव स्वयं प्रधान सेनापति ने दिया। लेकिन ऐसा करने से जेन-ज़ी आंदोलन के बलिदान और इसके ऐतिहासिक परिवर्तनकारी सफ़र को कमजोर किया जाएगा। इसलिए हमने इसे अस्वीकार कर दिया और बाहर आ गए।”
‘हम वार्ता करने नहीं, साझा दस्तावेज़ तैयार करने गए थे’
रक्षा बम ने स्पष्ट किया कि वे कोई मांग लेकर वार्ता करने नहीं गए थे। उनका कहना है कि जेन-ज़ी के विभिन्न समूहों के बीच साझा धारणा बनाने और देशभर के ७७ जिलों के प्रदर्शनकारियों की मांगों को एकीकृत कर संयुक्त दस्तावेज़ तैयार करने के लिए समय चाहिए।
उन्होंने कहा—
“हम न कल वार्ता में थे, न आज हैं। हम केवल इतना बताने गए थे कि सभी प्रतिनिधि मिलकर एक साझा दस्तावेज़ तैयार करेंगे और कुछ दिनों में राष्ट्रपति व सेना प्रमुख के सामने वह प्रस्तुत करेंगे।”
आंदोलन की मौलिकता से समझौता नहीं
बम ने आरोप लगाया कि बुधवार का यह संवाद आंदोलन की आधारभूत मान्यताओं के विपरीत था। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के साथ आंदोलन को जोड़कर इसकी मौलिकता और उद्देश्य को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जेन-ज़ी आंदोलन का कोई एक नेता नहीं है, बल्कि विभिन्न समूह इसके नेतृत्व में शामिल हैं। अन्य प्रतिनिधियों की धारणा के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है।
इस प्रकार, सेना मुख्यालय में हुई बातचीत बिना नतीजे के समाप्त हो गई और जेन-ज़ी प्रतिनिधि अब सीधे अपने प्रदर्शनकारी समूहों से आगे की रणनीति तय करेंगे।


