सुरक्षा चुनौती अभी भी बरकरार : जंगी अड्डे की बैठक का निष्कर्ष फिलहाल स्थिति सामान्य
काठमांडू, 11 असोज (शनिवार)। भद्रकालीस्थित नेपाली सेना मुख्यालय जंगी अड्डा में सम्पन्न पृतनापति समन्वय बैठक–2082 में हाल के राजनीतिक घटनाक्रम, जेनजी आन्दोलन के दौरान की स्थिति तथा आगामी सुरक्षा चुनौतियों पर गम्भीर समीक्षा हुई।
बैठक में पूर्वी, मध्य, उपत्यका, पश्चिम, मध्यपश्चिम, उत्तर पश्चिम तथा सुदूरपश्चिम पृतनापति वर्चुअल माध्यम से जुड़े जबकि सेना के विभिन्न विभाग और महानिर्देशनालय प्रमुख भौतिक उपस्थिति में रहे।
जेनजी आन्दोलन और सेना की भूमिका
23 भदौ को हुए जेनजी आन्दोलन में गोलीबारी से काठमांडू और सुनसरी जिलों में 21 लोगों की मौत हुई थी। उसी दिन तत्कालीन गृहमंत्री रमेश लेखक ने इस्तीफा दिया और रात में सुरक्षा निकायों के शीर्ष अधिकारी तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से परामर्श के लिए बालुवाटार पहुँचे।
24 भदौ को स्थिति अत्यंत संवेदनशील होने पर सेना मैदान में उतरी। हालाँकि महत्त्वपूर्ण संरचनाओं की रक्षा न कर पाने को लेकर आलोचना भी हुई। बैठक में इस प्रश्न पर भी बहस हुई कि “कितनी मानवीय क्षति सहकर भौतिक संरचना को बचाया जाए?”
सैनिक स्रोतों के अनुसार, सेना ने परिस्थिति को नियंत्रित करने में “उच्च कौशल” का प्रदर्शन किया, लेकिन मानवीय क्षति को लेकर गम्भीर प्रश्न बने रहे।
पूर्व सेनापतियों से परामर्श
बैठक से पहले वर्तमान प्रधानसेनापति अशोकराज सिग्देल ने पाँच पूर्व प्रधानसेनापतियों—प्रज्वल शमशेर राणा, प्यारजंग थापा, गौरव शमशेर राणा, पूर्णचन्द्र थापा और प्रभूराम शर्मा—से जंगी अड्डे में परामर्श लिया।
इन पूर्व सेनापतियों ने बदलते राजनीतिक परिदृश्य, सेना की भूमिका और आगामी सुरक्षा चुनौतियों पर सुझाव दिए।
स्रोतों के अनुसार, प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे से लेकर संविधान बचाते हुए अन्तरिम सरकार गठन तक सेना की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
आगामी चुनाव सबसे बड़ी चुनौती
बैठक में 21 फागुन को प्रस्तावित प्रतिनिधि सभा चुनाव पर भी बहस हुई।
- यदि चुनाव समय पर होते हैं तो सुरक्षा प्रबन्ध को और कड़ा करने की आवश्यकता होगी।
- यदि चुनाव स्थगित होते हैं तो उससे उत्पन्न राजनीतिक अशान्ति भी सेना के लिए चुनौती बनेगी।
फिलहाल कांग्रेस और माओवादी केन्द्र के युवा नेताओं ने चुनाव में जाने का समर्थन किया है, जबकि एमाले और कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व की आधिकारिक धारणा अभी स्पष्ट नहीं है।
निष्कर्ष
बैठक का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि—
- देश की स्थिति धीरे–धीरे सामान्य हो रही है, परन्तु सुरक्षा चुनौतियाँ अभी भी उच्च स्तर पर कायम हैं।
- सेना ने 24 भदौ के बाद से सुरक्षा कमान अपने हाथ में लेकर स्थिति स्थिर की।
- आगामी त्योहारों और चुनाव से पहले सुरक्षा को लेकर सतर्कता और रणनीतिक तैयारी अनिवार्य है।
सेना मुख्यालय का कहना है कि इस विषय में आधिकारिक वक्तव्य जल्द जारी किया जाएगा।


