क्या जितेंद्र सोनल बन पाएंगे मधेस प्रदेश के मुख्यमंत्री ?
पाँच दलों की नई राजनीतिक समीकरण से सत्ता परिवर्तन की सुगंध
जनकपुर, 15 अक्टूबर । मधेस प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। नेपाली कांग्रेस और एमाले (CPN-UML) को सत्ता समीकरण से बाहर रखकर लोसपा (लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी) के नेता जितेंद्र सोनल ने मुख्यमन्त्री पद पर दावा ठोक दिया है। सोनल ने बुधवार को 54 सांसदों के समर्थन के साथ प्रदेश प्रमुख सुमित्रा सुवेदी भण्डारी के समक्ष सरकार गठन का दावा पेश किया है।
पाँच दलों का गठजोड़, कांग्रेस–एमाले बाहर
नया समीकरण लोसपा, जसपा, जनमत, माओवादी (केन्द्र) और नेकपा (एकीकृत समाजवादी) के बीच बना है।
- लोसपा – 8 सांसद
- जसपा – 19 सांसद
- जनमत पार्टी – 13 सांसद
- माओवादी (केन्द्र) – 8 सांसद
- नेकपा (एस) – 6 सांसद
कुल मिलाकर 54 सांसदों के साथ यह गठबंधन बहुमत के आंकड़े को पार कर चुका है।
इस गठजोड़ के साथ कांग्रेस–एमाले–जनमत के बीच चल रही सत्ता साझेदारी की बातचीत अब लगभग टूट चुकी है।
ठाकुर–उपेन्द्र की ‘जनकपुर कूटनीति’
सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन दिनों से लोसपा अध्यक्ष महन्थ ठाकुर और जसपा अध्यक्ष उपेन्द्र यादव जनकपुर में डेरा डालकर राजनीतिक कसरत कर रहे थे। दोनों नेताओं ने कांग्रेस–एमाले गठबंधन के समीकरण को तोड़ते हुए सोनल के नेतृत्व में नई सरकार खडा करने की रणनीति तैयार की।
कांग्रेस और एमाले के माथे पर शिकन
कांग्रेस, जो खुद के नेतृत्व में सरकार गठन को लेकर लगभग आश्वस्त थी, अब नए समीकरण के बाद बैकफुट पर है। कांग्रेस नेता माधवकुमार नेपाल (नेकपा एस) से लगातार संवाद में हैं, लेकिन 6 सांसदों के साथ नेपाल का दल कांग्रेस–एमाले गठबंधन को बहुमत तक नहीं पहुँचा पा रहा।
एमाले की तरफ से भी यह संकेत आया है कि लोसपा नेतृत्व में बनने वाली सरकार में नेकपा (एस) शामिल होगी। इसका मतलब साफ है — एमाले और कांग्रेस इस बार विपक्ष में बैठने के लिए तैयार रहें।
मंत्रालय बँटवारे पर भी लगभग सहमति
नई गठबंधन सरकार के भीतर मंत्रालय बँटवारे को लेकर भी लगभग सहमति बन चुकी है।
- जसपा को अर्थ मंत्रालय समेत 4 मंत्रालय
- जनमत पार्टी को भौतिक पूर्वाधार तथा विकास मंत्रालय समेत 4 मंत्रालय
- लोसपा, माओवादी (केन्द्र) और नेकपा (एस) को 2–2 मंत्रालय
इसके अलावा राप्रपा, संघीय समाजवादी पार्टी और नागरिक उन्मुक्ति पार्टी — जिनके एक–एक सांसद हैं — को भी सरकार में शामिल करने की कोशिश चल रही है।
अब फैसला प्रदेश प्रमुख के हाथ में
प्रदेश प्रमुख सुमित्रा सुवेदी भण्डारी ने बुधवार अपराह्न 4 बजे तक सरकार गठन का दावा प्रस्तुत करने का समय दिया है। सोनल के नेतृत्व में गठबंधन यदि समयसीमा के भीतर औपचारिक समर्थन पत्र प्रस्तुत कर देता है, तो मधेस प्रदेश में सत्ता परिवर्तन तय माना जाएगा।
राजनीतिक समीकरण में नया अध्याय
मधेस की राजनीति में यह गठबंधन थाकुर–उपेन्द्र–सोनल तिकड़ी के लिए बड़ी वापसी साबित हो सकता है।
यदि सोनल मुख्यमंत्री बन जाते हैं, तो यह मधेस प्रदेश में कांग्रेस–एमाले गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका होगा।
लेकिन राजनीति के इस खेल में समीकरण कभी भी बदल सकते हैं — और सबकी नजरें अब प्रदेश प्रमुख के अगले कदम पर टिकी है ।

