नेपाली कांग्रेस की केंद्रीय समिति की बैठक में महाधिवेशन पर कोई फैसला नहीं हो सका
काठमांडू, ६ मंसिर। नेपाली कांग्रेस की पांच सप्ताह से अधिक समय से चल रही केंद्रीय समिति की बैठक में पार्टी के महाधिवेशन के बारे में कोई निर्णय नहीं हो सका। प्रतिनिधि सभा चुनाव से पहले महाधिवेशन करने, चुनाव के बाद करने और विशेष महाधिवेशन के पक्ष में रहे नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण बैठक अनिर्णीत रही।
बैठक को बार-बार स्थगित करके शीर्ष स्तर पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही थी। पिछले बृहस्पतिवार की बैठक को शनिवार तक के लिए स्थगित कर नेताओं ने अनौपचारिक चर्चा की थी।
विवाद के मुख्य बिंदु:
· विशेष महाधिवेशन की मांग: पार्टी के करीब 54% प्रतिनिधियों ने कार्यवाहक सभापति पूर्णबहादुर खड्का को विशेष महाधिवेशन की लिखित मांग सौंपी थी। पार्टी विधान के मुताबिक, मांग मिलने के तीन महीने के भीतर महाधिवेशन बुलाना जरूरी है। इसकी अंतिम तारीख 28 पुष है।
· संस्थापन पक्ष की शर्त: संस्थापन पक्ष (विशेष महाधिवेशन के पक्षधर) ने 15वें महाधिवेशन की कार्यसूची लाने के लिए शर्त रखी कि पार्टी में दर्ज विशेष महाधिवेशन के लिए हस्ताक्षर वापस लिए जाएं। इस शर्त को विशेष महाधिवेशन के अन्य पक्षधर नेता स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
· नियमित महाधिवेशन के पक्षधर: महामंत्री गगन कुमार थापा और विश्व प्रकाश शर्मा का कहना है कि यदि पुष 16 से 19 के बीच नियमित महाधिवेशन नहीं हो पाता है, तो विशेष महाधिवेशन करना चाहिए। वहीं, डॉ. शेखर कोइराला का मानना है कि आगामी पुष मसान्त तक नियमित महाधिवेशन नहीं होने पर विशेष महाधिवेशन किया जाना चाहिए, लेकिन वह हस्ताक्षर के बजाय केंद्रीय कार्यसमिति से इसका निर्णय लेने के पक्ष में हैं।
नेताओं के बयान:
· महामंत्री गगन कुमार थापा ने कहा कि आगामी कुछ दिनों में और चर्चा करके महाधिवेशन के विषय पर फैसला किया जाएगा। उन्होंने कहा, “अगली बैठक में बाकी रहे विषयों को निपटाने के लिए पार्टी के कार्यक्रम और कई अन्य विषय उसी दिन हम पेश करेंगे।” बैठक के बाद उन्होंने कहा कि अब विशेष महाधिवेशन ही एकमात्र विकल्प बचा है।
· कार्यवाहक सभापति पूर्णबहादुर खड्का ने कहा कि अनौपचारिक चर्चा से सहमति करीब पहुंच गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि सर्वसम्मति से निर्णय पर पहुंचा जा सकेगा।
आगे की राह:
पार्टी के सामने अब मुख्य रूप से तीन विकल्प हैं:
1. प्रतिनिधि सभा चुनाव से पहले नियमित महाधिवेशन करना।
2. चुनाव के बाद महाधिवेशन करना।
3. विशेष महाधिवेशन का रास्ता अपनाना।
महामंत्री थापा के मुताबिक, अब विशेष महाधिवेशन एकमात्र व्यवहारिक विकल्प नजर आ रहा है, क्योंकि नियमित महाधिवेशन के लिए पुष मसान्त तक का समय कम है और चुनाव की तैयारियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। पार्टी की अगली बैठक में इस मुद्दे पर अंतिम फैसला होने की उम्मीद है।


