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प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने किया बड़ा एक्शन: सचिवालय से 14 लोग बर्ख़ास्त, सिर्फ 6 ही रहेंगे—नातावाद विवाद के बाद सख्त कदम!

 
साभार ऑनलाइन खबर

काठमांडू, मंसिर १० । प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने अपने सचिवालय में फैली नियुक्ति–विवाद और नातावाद के आरोपों के बाद बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने बुधवार को अपने सचिवालय की संरचना में बदलाव करते हुए 14 सदस्यों को बर्ख़ास्त कर दिया है। अब प्रधानमंत्री के सचिवालय में सिर्फ 6 लोग ही रहेंगे।

यह फैसला तब आया जब प्रमुख स्वकीय सचिव आदर्शकुमार श्रेष्ठ पर अपनी पत्नी और अन्य रिश्तेदारों को सचिवालय में नियुक्त कराने के आरोप सामने आए। इस विवाद ने प्रधानमंत्री के सुशासन और पारदर्शिता के दावों पर सवाल खड़े कर दिए थे।

अब सचिवालय में ये 6 लोग रहेंगे:

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1. अजयभद्र खनाल – मुख्य सलाहकार

2. गोविन्द नारायण तिमिल्सिना – जनसम्पर्क सलाहकार

3. आदर्शकुमार श्रेष्ठ – प्रमुख स्वकीय सचिव

4. रामबहादुर रावल – प्रेस संयोजक

5. केशव थापा – स्वकीय शाखा अधिकृत (फोटोग्राफर)

6. डा. मनबहादुर केसी – जनस्वास्थ्य विज्ञ (अवैतनिक)

 

प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि जहाँ पूर्व प्रधानमंत्रियों ने सचिवालय को 66 सदस्यों तक बढ़ाया था, वहीँ कार्की सरकार ने इसे पहले ही 20 तक सीमित कर दिया था। अब इसे घटाकर सिर्फ 6 कर दिया गया है।

ये 14 लोग हटाए गए:

1) प्रमु स्वकीय सचिव आदर्श श्रेष्ठ द्वारा लाए गए रिश्तेदार

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संगीता श्रेष्ठ (पत्नी) – स्वकीय सहसचिव

कमला श्रेष्ठ (रिश्तेदार) – स्वकीय सहसचिव

2) विशेषज्ञ और अधिकारी

अरुण कटुवाल – सूचना एवं संचार विज्ञ

प्रदिप ज्ञवाली – युवा एवं सामाजिक विकास विज्ञ

रमेशराज दाहाल – स्वकीय शाखा अधिकृत

अर्जित खड्का – स्वकीय शाखा अधिकृत

आकृति घिमिरे – स्वकीय शाखा अधिकृत

3) प्रशासन सहायक

सृष्टी डंगोल

पुनम श्रेष्ठ

जुनु कार्की

एन्जलिना कायस्थ

रविना श्रेष्ठ

4) सवारी चालक

हरिबाबु श्रेष्ठ

मिरा अधिकारी

क्यों लिया गया ये फैसला?

अनलाइनखबर में छपे एक समाचार में खुलासा हुआ कि आदर्श श्रेष्ठ ने परिवार के लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया था।
इसके बाद सरकार की पारदर्शिता और सुशासन को लेकर भारी आलोचना शुरू हो गई।

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इस दबाव के बाद प्रधानमंत्री कार्की ने सचिवालय का संपूर्ण पुनर्गठन किया और विवादित 14 नियुक्तियाँ रद्द कर दीं।

निष्कर्ष:

प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने यह निर्णय लेकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि सरकार नातावाद बर्दाश्त नहीं करेगी और सुशासन के प्रति वह प्रतिबद्ध हैं।
हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि प्रमुख स्वकीय सचिव आदर्श श्रेष्ठ को हटाए बिना यह कदम अधूरा है।

ये विवाद आगे किस दिशा में जाता है, यह देखने वाली बात होगी।

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