Sat. Apr 18th, 2026
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जीवन जीने का फलसफा : डा.केवलकृष्ण पाठक

 

यथार्थ जीवन को जो समझते हैं
पहचान सत्य की वो ही करते हैं
सब जीवों में देखते हैं ईश्वर को
सत्य निष्ठां से देश-सेवा करते हैं।
जिंदगी को जीने का बस यही फलसफा है
जागे हुऐ जी के मर जाना लगता भला है
ज़िन्दगी के लक्ष्य को जानकर जो जिया
संयमित जीवन बिता
सुख-शांति से जिया
राम नाम ही है जीवन को शुद्ध बनाता
अंतर मन को भी है सत्मार्ग दिखाता
जो भी मानव प्यार में है भटक जाता
जीवन को है नष्ट करता और पछताता
मीठी वाणी बोल कर,हरषा सबका मन
बाँटो हर इक में खुशी,हो जाओ प्रसन्न
बुरे करम का फल बुरा,जो ले मानव जान
सदा बुराई से बचे, रखे हरदम ध्यान
मीठी वाणी बोल कर ,हर्षा सबका मन
बाँटो हर इक में खुशी,हो जाओ प्रसन्न
समय को रख ले ध्यान में, मन की क्रीड़ा जान
कभी ना होता मन दुखी, जो सत्य को ले पहचा

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