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वैकल्पिक शक्तियों में एकता के लिए जोरदार वार्ता, कुलमान, रवि और बालेन समूह के बीच संवाद तेज

 

काठमांडू, १९ मंसिर २०८२। चुनावों में अलग-अलग जाने से पुराने राजनीतिक दलों के फिर से प्रभावी होने के खतरे को देखते हुए, रवि लामिछाने की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा), कुलमान घिसिङ समर्थित ‘उज्यालो नेपाल पार्टी’ और काठमांडू के मेयर बालेन शाह के समूह के बीच सहयोग को लेकर गहन वार्ताएं तेज हो गई हैं। ‘जेनजी’ समूह भी इन ताकतों को एकजुट करने के लिए सक्रिय दिख रहा है।

मुख्य बिंदु:

1. जेनजी का प्रयास: ‘द काउंसिल ऑफ जेनजी’ के प्रमुख सुदन गुरुङ ने गुरुवार को जेल में रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने से मुलाकात की और सभी वैकल्पिक ताकतों को मिलकर पुराने दलों को हराने का प्रस्ताव रखा। गुरुङ ने दावा किया कि उन्होंने कुलमान घिसिङ और बालेन शाह से भी मिलवाया है।
2. कुलमान-बालेन निकटता: गत शनिवार को हुई एक बैठक के बाद, कुलमान घिसिङ ने मेयर बालेन शाह के साथ अपनी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “देश बनाने के अभियान में हम साथ हैं।” उज्यालो नेपाल के एक नेता के मुताबिक, बालेन ने पार्टी को समर्थन देने और वैकल्पिक ताकतों के एकजुट होने का संदेश दिया।
3. रास्वपा-उज्यालो वार्ता: दोनों पार्टियों के बीच चल रही वार्ता सकारात्मक बताई जा रही है। रास्वपा प्रवक्ता मनिष झा के अनुसार, गठबंधन में चुनाव लड़ने पर सहमति बन चुकी है, अब नाम और चुनाव चिह्न जैसे मुद्दों पर चर्चा चल रही है।
4. प्रमुख प्रस्ताव: वार्ता में सबसे मजबूत प्रस्ताव यह है कि कुलमान घिसिङ को भावी प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाए और रवि लामिछाने को पार्टी अध्यक्ष बनाए रखा जाए। इससे पहले उज्यालो नेपाल इस मुद्दे पर सहमत नहीं था, लेकिन अब लचीलापन दिखा रहा है।
5. पार्टी नाम और चिह्न: तत्काल रास्वपा के नाम और चिह्न से चुनाव लड़ने और बाद में महाधिवेशन के जरिए एकता को औपचारिकता देने का भी विकल्प चर्चा में है। एक नारा “उज्यालो नेपाल के लिए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में वोट डालें” पर भी विचार हो रहा है।
6. बालेन की भूमिका: उज्यालो नेपाल का दावा है कि उनके आगामी कार्यक्रमों में बालेन शाह की ‘सरप्राइज एंट्री’ होगी। पार्टी की केंद्रीय समिति का विस्तार करते समय बालेन समूह के कुछ लोगों को शामिल करने पर भी सहमति बन चुकी है।
7. अंदरूनी चुनौतियाँ: उज्यालो नेपाल के एक वरिष्ठ नेता ने इशारा किया कि रास्वपा में रवि लामिछाने के कुछ करीबी सहयोगियों को डर है कि कुलमान के प्रवेश से उनकी हैसियत कमजोर हो सकती है, जिससे एकता में देरी हो रही है।

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निष्कर्ष: नेपाल की नई और वैकल्पिक राजनीतिक ताकतें इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर वे अलग-अलग रहीं तो पारंपरिक दल फिर से मजबूत हो जाएंगे। इसी डर ने रवि लामिछाने, कुलमान घिसिङ और बालेन शाह के समूहों के बीच एकजुट होने की वार्ता को नई गति दी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ये ताकतें जल्द ही एक साझा मंच पर आने में सफल हो पाती हैं। वार्ताकारों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में कुछ ठोस नतीजे आ सकते हैं।

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