मधेश की सत्ता-खेल में बड़ा उलटफेर: UML ने खोए तीन पद, कांग्रेस के कृष्णप्रसाद यादव बने नए मुख्यमंत्री
जनकपुरधाम, मधेश प्रदेश |
मधेश की राजनीति में पिछले दो महीनों से चल रहे सत्ता-खेल, रणनीति और गठबंधन की रस्साकशी ने आखिरकार बड़ा मोड़ ले लिया है। राजनीतिक गणित इस तरह बदला कि एक महीने के भीतर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (UML) ने प्रदेश प्रमुख, सभामुख और मुख्यमंत्री—तीन प्रमुख पद गंवा दिए, जबकि नेपाली कांग्रेस के कृष्णप्रसाद यादव नए मुख्यमंत्री के रूप में उभरे हैं।
कृष्णप्रसाद बनाम सोनल: 57 बनाम 56 का शक्ति-संतुलन
29 असोज की शाम प्रदेश प्रमुख कार्यालय तनाव में था।
कांग्रेस और UML के नेता कृष्णप्रसाद यादव को नियुक्ति की माँग कर रहे थे।
उस समय:
- कृष्णप्रसाद यादव — 57 सांसदों का समर्थन
- जितेन्द्र सोनल (लोसपा) — 56 सांसदों का ताजा समर्थन
फिर भी प्रदेश प्रमुख सावित्रा सुवेदी भण्डारी ने सोनल को मुख्यमंत्री नियुक्त किया, जिससे कांग्रेस और UML दोनों नाराज हुए।
दो महीनों बाद परिदृश्य बदला—कांग्रेस के पक्ष में समीकरण खड़ा
करीब दो महीने बाद हालात पलटे।
छह दलीय गठबंधन, जिसने पहले सोनल को समर्थन दिया था,
अब कांग्रेस के कृष्णप्रसाद यादव के पीछे एकजुट दिखाई दिया।
उन्हें समर्थन देने वालों में शामिल थे:
- कांग्रेस
- जसपा (18)
- जनमत (13)
- माओवादी (9)
- लोसपा (8)
- समाजवादी (7)
- नागरिक उन्मुक्ति से सैद्धांतिक समर्थन
कुल मिलाकर—सात दलीय गठबंधन का पूरा बल यादव के पक्ष में चला गया।
UML की लगातार हार और कांग्रेस की रणनीति सफल
विश्वास मत, सभामुख विवाद और गठबंधन के अंदरूनी असंतोष ने UML की स्थिति कमजोर बना दी।
सोनल के पक्ष में पहले खड़े दल अंततः टूटने लगे।
इसी बीच UML नेता सरोजकुमार यादव ने यह घोषणा कर दी कि जो भी सरकार बनेगी, वे विश्वास मत देंगे।
यह बयान गठबंधन में भ्रम और भय दोनों का कारण बना—
यही कांग्रेस के लिए मौका साबित हुआ।
गठबंधन टूटने के डर से दल कृष्णप्रसाद के पक्ष में झुके
सात दलीय गठबंधन टूटने का जोखिम बढ़ रहा था।
कांग्रेस बाहर निकलती, तो एक नया समीकरण बनना तय था।
इसलिए गठबंधन के सभी दल अंततः मान गए कि—
मुख्यमंत्री कांग्रेस के कृष्णप्रसाद यादव ही होंगे।
वह सोमवार को शपथ ग्रहण करेंगे।
कृष्णप्रसाद यादव का विज़न: ‘समन्वय, सुशासन और आर्थिक गतिविधि बढ़ाएँगे’
मुख्यमंत्री नियुक्ति के बाद यादव ने कहा—
“हम सात दलों के बीच समन्वय बनाए रखेंगे, भ्रष्टाचार रोकेंगे और सुशासन स्थापित करेंगे।
मधेश गरीब है—कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार हमारी प्राथमिकता होगी।”
कौन हैं कृष्णप्रसाद यादव?
- कांग्रेस मधेश प्रदेश सभापति
- २०७९ में रौतहट–1(ख) से निर्वाचित
- पहले भौतिक पूर्वाधार विकास मंत्री
- दो बार रौतहट जिला अध्यक्ष
- २०६४ में संविधानसभा सदस्य
- कांग्रेस नेता महेन्द्र यादव के सम्धी
- राजनीतिक विरासत—उनके पिता रामचन्द्र यादव भी कांग्रेस के सक्रिय नेता थे
मधेश की राजनीति में यह बदलाव सिर्फ सरकार बदलने भर की घटना नहीं है।
यह गठबंधन राजनीति, दलों की अंदरूनी खींचतान और UML की रणनीतिक गलतियों का नतीजा है।
फिलहाल, सत्ता का केंद्र अब कांग्रेस के हाथ में है और
कृष्णप्रसाद यादव मधेश की नई राजनीतिक धुरी बनकर उभरे हैं


