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चुनावी अनिश्चितता और … राजनीति ! ….कमजोर होते जेनजी समूह : लिलानाथ गौतम

 

लीलानाथ गौतम, हिमालिनी अंक नवंबर । सरकार द्वारा घोषित फागुन २१ तारीख को प्रतिनिधि सभा का चुनाव होगा ही, इसकी कोई गारंटी अब तक नहीं है । निवर्तमान संसद के पहले और दूसरे बड़े दल नेपाली कांग्रेस और नेकपा एमाले द्वारा इस बारे में स्पष्ट निर्णय नहीं ले पाने के कारण यह अनिश्चितता बनी हुई है । दूसरे बड़े दल एमाले के भीतर पार्टी अध्यक्ष केपी शर्मा ओली और उनके पक्षधर अधिकांश नेता चुनाव नहीं, बल्कि विघटित संसद की पुनस्र्थापना होनी चाहिए, इस मुद्दे पर दिख रहे हैं । संसद पुनस्र्थापना का नारा लेकर एमाले देशव्यापी प्रदर्शन के लिए उतर आया है । पहले बड़े दल नेपाली कांग्रेस के भीतर भी पार्टी सभापति शेरबहादुर देउवा के पक्षधर अधिकांश नेता संसद पुनस्र्थापना के ही पक्ष में हैं । लेकिन पार्टी के दो महामंत्री गगन कुमार थापा और विश्व प्रकाश शर्मा संसद पुनस्र्थापना नहीं, बल्कि चुनाव में जाने के पक्ष में हैं । थापा और शर्मा के पक्षधर नेताओं के रुख के कारण देउवा पक्ष के नेता संसद पुनस्र्थापना के पक्ष में खुलकर बोल नहीं पा रहे हैं ।

कांग्रेस–एमाले के अलावा बाकी बची राजनीतिक शक्तियां चुनाव के ही पक्ष में दिख रही हैं । लेकिन निवर्तमान संसद की महत्वपूर्ण शक्ति रहे कांग्रेस या एमाले में से कोई भी एक दल अगर चुनाव में भाग नहीं लेता है, तो चुनाव होने की संभावना नहीं रह जाती । इसी परिस्थिति के कारण घोषित तारीख फागुन २१ को चुनाव होगा या नहीं, यह अनिश्चितता बनी हुई है । वहीं चुनाव कराने की जिम्मेदारी पाए निर्वाचन आयोग ने चुनावी गतिविधियों को घोषित कार्यक्रम के अनुसार ही आगे बढ़ा रहा है । उसने मतदाता सूची अद्यावधिक करने का काम लगभग पूरा कर लिया है, जबकि नए चुनाव के लिए लक्षित कर राजनीतिक दल पंजीकरण की प्रक्रिया को भी अंतिम चरण में पहुंचा दिया है । नए चुनाव को ही लक्षित कर राजनीतिक दल खोलने वालों की भीड़ देखी जा रही है ।

पुरानी राजनीतिक शक्ति और नेताओं के प्रति आक्रोश में विकल्प की तलाश करते हुए भदौ २३ और २४ को हुए विध्वंसात्मक जेनजी आंदोलन के बाद राजनीति में युवा पीढ़ी की दखल की उम्मीद की गई थी । लेकिन राजनीतिक दल पंजीकरण की प्रक्रिया तक आ पहुंचने पर पुरानी पार्टियां और नेता ही हावी होते दिख रहे हैं । जेनजी पीढ़ी के नाम पर हुए आंदोलन का नेतृत्व करने का दावा करने वाले कई समूह दिखे हैं । शुरू में २२–२५ समूहों में दिखे जेनजी युवाओं के समूह ने आपसी विवाद में ही लंबा समय बिता दिया है । उनके बीच विचार और नेतृत्व को लेकर मतभेद होने के कारण अब तक जेनजी के नाम पर कोई राजनीतिक दल पंजीकृत नहीं हो सका है । राजनीतिक दल पंजीकरण के अंतिम चरण में पहुंच जाने के बावजूद जेनजी में ५–६ समूह दिख रहे हैं । इतना आगे आ जाने के बाद मिराज ढुंगाना के समूह की ओर से जेनजी आंदोलन को वैधानिकता नहीं मिलने तक चुनाव संभव नहीं होगा, ऐसा विचार सार्वजनिक किया गया है ।

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  नेता !

लेकिन पुराने नेता, प्रशासक और उद्योग–व्यवसायी जेनजी युवाओं से आगे नजर आ रहे हैं । राजनीतिक, सामाजिक, प्रशासनिक और व्यावसायिक क्षेत्र के कुछ चर्चित व्यक्तियों ने आगामी चुनाव को ही लक्षित कर निर्वाचन आयोग में दल पंजीकृत कराए हैं । लेकिन ऐसे राजनीतिक दल उन व्यक्तियों के नाम पर नहीं हैं । पार्टी अध्यक्ष किसी और को ही बनाया गया है । यानी कि वे चर्चित व्यक्ति छद्मभेसी नेताओं के रूप में दिख रहे हैं । पार्टी का नेतृत्व और पदाधिकारी में अपना नाम न होने के बावजूद पार्टी का नियंत्रण अपने पास ही रखकर पार्टी पंजीकृत कराने वाले व्यक्तियों में कुलमान घिसिंग से लेकर दुर्गा प्रसाईं तक शामिल हैं । ये दोनों ही पात्र पिछले कुछ समय से चर्चा में रहे हैं । इसी तरह रेशम चौधरी, जनार्दन शर्मा, वीरेन्द्र बहादुर बस्नेत जैसे चिरपरिचित व्यक्तियों ने भी राजनीतिक दल पंजीकृत कराए हैं । लेकिन इनमें से कोई भी पार्टी पदाधिकारी नहीं है । अपने निकट के व्यक्ति को पार्टी प्रमुख बनाकर उन्होंने दल पंजीकृत कराए हैं ।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, दल पंजीकरण के अंतिम दिन तक आयोग में १२२ दल पंजीकृत होकर प्रमाणपत्र पा चुके हैं, जबकि कुछ पंजीकरण की प्रक्रिया में हैं । आवेदन दिए कुछ दलों के पंजीकरण का काम अभी जारी है । प्रमाणपत्र पा चुके १२२ राजनीतिक दलों में जेनजी समूह का कोई भी दल शामिल नहीं है । जेनजी आंदोलन के बाद पंजीकृत हुए चार नए राजनीतिक दल जेनजी समूह का प्रतिनिधित्व नहीं करते । जेनजी आंदोलन से पहले ही पंजीकृत होकर प्रमाणपत्र पाने वालों में एक दल है– उज्यालो नेपाल पार्टी । ५१ सदस्यीय केन्द्रीय समिति बनाकर अद्यावधिक कराई गई इस पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष अनुप उपाध्याय हैं । पूर्व प्रशासक (पूर्व ऊर्जा सचिव) रहे उपाध्याय पार्टी अध्यक्ष के रूप में दिखते हैं, लेकिन यह पार्टी पूर्व प्रशासक भी रहे वर्तमान मंत्री कुलमान घिसिंग की है, यह सभी जानते हैं । घिसिंग के मंत्री पद पर रहने के कारण पार्टी की जिम्मेदारी में नहीं रहने की बात कही जाती है । मंत्री पद छोड़ने के बाद उज्यालो नेपाल का अध्यक्ष पद लेने के इरादे से पार्टी पंजीकृत कराई गई है, ऐसा अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है । इस पार्टी का चुनाव चिह्न ‘जलती हुई बिजली की बत्ती’ प्रस्तावित है । ज्ञान बहादुर तामांग ने इस पार्टी के पंजीकरण के लिए आयोग में आवेदन दिया था । अब ज्ञान बहादुर की जगह उपाध्याय का नाम रखकर पदाधिकारियों के नाम अद्यावधिक किए गए हैं ।

जेनजी आंदोलन के बाद पंजीकृत एक पार्टी है– नागरिक बचाओ दल नेपाल । इस पार्टी के सभापति माधव खतिवडा हैं । लेकिन खतिवडा खास चर्चित पात्र नहीं हैं । इस पार्टी के पीछे मेडिकल व्यवसायी दुर्गा प्रसाईं हैं । यानी कि प्रसाईं ने अपने निकट खतिवडा को आगे करके ‘नागरिक बचाओ दल’ पंजीकृत कराया है । प्रसाईं के समूह ने मंसिर ७ तारीख से देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है । ‘नागरिक बचाओ महा अभियान’ के नाम से विभिन्न गतिविधियां करते आ रहे प्रसाईं के समूह ने हाल ही में सरकार के सामने २७ सूत्रीय मांग पेश की है । इसी अभियान को प्रसाईं ने राजनीतिक पार्टी का रूप दिया है । पार्टी के उपसभापति ईश्वरी प्रसाद भट्टराई और देवी प्रसाद संग्रौला हैं । पार्टी के महामंत्री प्रेम कुमार थाम्सुहांग, सह महामंत्री विष्णु बोहरा क्षेत्री, कोषाध्यक्ष सुष्मा रेग्मी रिजाल और प्रवक्ता प्रेम थापा मगर हैं । लेकिन प्रसाईं का नाम कहीं नहीं है ।
बीते कुछ वर्षों से राजनीति में चर्चा में रहने वाले पात्र हैं – रेशम चौधरी । पिछले चुनाव में चौधरी ने ‘नागरिक उन्मुक्ति पार्टी’ बनाई थी । इसी पार्टी के नाम पर उन्होंने भूमिगत रहकर चुनाव भी जीता था । पिछले चुनाव में संघीय संसद में नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के चार सांसद थे । टीकापुर हत्याकांड से जुड़े आरोप में दोषी करार दिए जाने के बाद चौधरी कानूनन सांसद और पार्टी अध्यक्ष नहीं बन सकने के कारण उन्होंने अपनी पत्नी रंजीता श्रेष्ठ (चौधरी) के नाम पर पार्टी चलाई थी । पत्नी से ही विवाद के कारण वे उस पार्टी में नहीं रह सके । उन्हीं चौधरी ने आगामी चुनाव को लक्षित कर ‘नागरिक उन्मुक्ति पार्टी नेपाल’ नाम से नई पार्टी पंजीकृत कराई है । पार्टी अध्यक्ष कविर सोपा को बनाया गया है । पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पहले जनमत पार्टी के उपाध्यक्ष रहे अब्दुल खान हैं ।
पूर्व मंत्री रहे जनार्दन शर्मा नेकपा माओवादी केंद्र के चर्चित नेता हैं । वि.सं. २०५२ में तत्कालीन माओवादियों द्वारा शुरू किए गए सशस्त्र संघर्ष में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है । नेकपा माओवादी केंद्र के पार्टी अध्यक्ष पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’ ने नेकपा एकीकृत समाजवादी सहित १२ वाम घटकों को मिलाकर ‘नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी’ का गठन करने के बाद शर्मा नवगठित पार्टी में नहीं रह सके । शर्मा ने प्रगतिशील राष्ट्रीय अभियान का गठन किया । पूर्व माओवादी के केंद्रीय सदस्यों, छात्र नेताओं से लेकर पूर्व जनमुक्ति सेना, आईसीएल, पत्रकार आदि को शामिल कर ३१ सदस्यीय संयोजन समिति बनाई । संयोजन समिति में सुदन किराती, मदन भट्टराई, मदन लिम्बू, समझना राई, पुजन सिंह, अरविंद्र यादव, लक्ष्मी गुरुंग, प्रकाश चंद्र पांडे, राजू ओलमगर, संतोष विष्ट, प्रेम बहादुर तामांग, यज्ञबर्मा शर्मा, भीम बहादुर मल्ल, गोरख बहादुर केसी, जटिल कार्की, देवीराम देवकोटा, जन्मेदव जैसी, टेकेंद्र भट्ट, डॉ. अच्युत भट्ट, विमल सिंह, निर्मला गौतम, रामहरि पुडासैनी, धर्मराज खतिवडा जैसे व्यक्ति शामिल थे । ये सभी पूर्व माओवादी केंद्र से संबंधित नेता और कार्यकर्ता हैं । इतनी बड़ी संख्या में माओवादी नेता–कार्यकर्ता लेकर अलग हुए शर्मा ने अपने नेतृत्व में पार्टी पंजीकृत नहीं कराई । ‘प्रगतिशील नागरिक पार्टी’ के नाम से शर्मा का दल निर्वाचन आयोग में पंजीकृत हुआ है । पार्टी अध्यक्ष सबिन सिग्देल हैं ।
इसी तरह व्यवसायिक जगत में चर्चित नाम हैं– वीरेंद्र बहादुर बस्नेत । बस्नेत बुद्ध एयर के मालिक के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन उनका निवेश अन्य कई क्षेत्रों में भी है । उन्हीं व्यवसायी बस्नेत ने भी सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया है । बस्नेत की ही योजना और सक्रियता से खोली गई ‘गतिशील लोकतांत्रिक पार्टी’ के अध्यक्ष पद पर दिनेश प्रसाईं हैं । उक्त पार्टी के महासचिव पियुष प्रसाद कायस्थ हैं ।

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कमजोर होते जेनजी समूह

भदौ २३ और २४ को हुए जेनजी आंदोलन के बाद राजनीतिक वृत्तों में चर्चा में आए नाम हैं– बालेन साह, सुदन गुरुंग, सागर ढकाल, मिराज ढुंगाना, पुरुषोत्तम यादव, रक्षा बम, भावना राउत आदि । अनुमान था कि जेनजी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे इनमें से कोई राजनीतिक दल पंजीकृत कराएगा । एक से अधिक दल पंजीकृत होने का अनुमान भी था । लेकिन अब तक इनमें से किसी ने भी निर्वाचन आयोग में दल पंजीकृत कर प्रमाणपत्र लेने में सफलता नहीं पाई है । निर्वाचन आयोग सूत्रों के अनुसार अभी करीब २०–२२ दल पंजीकरण की प्रक्रिया में हैं । इनमें जेनजी का नाम लेकर एक दल ने पंजीकरण के लिए आवेदन दिया है । लेकिन इस तरह दल पंजीकरण का आवेदन देने वाला व्यक्ति जेनजी प्रदर्शन के नाम पर चर्चा में आए पात्र नहीं हैं ।

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हालांकि जेनजी समूह से दो या तीन पार्टियां पंजीकृत होने का अनुमान लगाया गया था । लेकिन जेनजी आंदोलन में सक्रिय रहे युवाओं और समूहों के साथ रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी, कुलमान घिसिंग की सक्रियता से खुली उज्यालो नेपाल पार्टी के नेता भी बातचीत में शामिल रहे हैं । जेनजी समूह को अपनी पार्टी में दाखिल कराने के लिए ये समूह इस तरह सक्रिय बने हुए हैं । जेनजी समूह में स्पष्ट विचार और नीति लेकर आगे बढ़ने वाला नेतृत्वकर्ता नहीं होने के कारण यह समूह असमंजस में दिख रहा है ।

जेनजी अभियानकर्मी भावना राउत ने सार्वजनिक रूप से कहा है– “मौजूदा दलों में जेनजी पीढ़ी की दखल बढ़ाकर जाएं या नया दल पंजीकृत कराएं ? यह सवाल और विकल्प पर चर्चा चल रही है ।” उनके इस बयान से ही स्पष्ट है कि जेनजी आंदोलनकारियों के नेतृत्व में नया दल पंजीकृत हो सकता है, लेकिन ऐसा दल सशक्त रूप से आगे आएगा, इस पर विश्वास कर पाना मुश्किल है । क्योंकि जेनजी आंदोलन का नेतृत्व करने का दावा करने वाले कई युवा अपने से परिपक्व उम्र के व्यक्ति को आगे करके चुनाव लड़ने पर केंद्रित हो गए हैं । खुद को जेनजी का एक समूह बताने वाले ‘इंडिजिनस जेन जी कलेक्टिव’ की सामना लावती ने खुलकर संचार माध्यमों में कहा है– “दल पंजीकरण ही एकमात्र महत्वपूर्ण बात नहीं है । क्योंकि कुछ ऐसी पार्टियां हैं, जो जेनजी का प्रतिनिधित्व ढूंढ रही हैं ।” उनके इस बयान से भी यही जाहिर होता है कि जेनजी समूह नई पार्टी खोलकर स्थापित कर पाने के आत्मविश्वास में नहीं है ।

लिलानाथ गौतम

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