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मधेश आधारित दल: एकीकरण हुआ तो हाशिये से सत्ता की धुरी तक ? राकेश मिश्रा के स्टेटस

 
राकेश मिश्रा
North & South Collectives

राकेश मिश्रा के स्टेटस से साभार, 6 जनवरी 026 । नेपाल की संसदीय राजनीति में मधेश आधारित दलों को अक्सर “क्षेत्रीय” और “सीमित प्रभाव” वाले दलों के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन यदि इन दलों का पूर्ण एकीकरण होता है, तो यही शक्तियाँ आने वाले चुनाव में न केवल अपनी वर्तमान स्थिति बचा सकती हैं, बल्कि राष्ट्रीय सत्ता संतुलन की निर्णायक कड़ी (किंग मेकर) भी बन सकती हैं। यह आकलन हालिया चुनावी आँकड़ों, संभावित वोट स्विंग और राजनीतिक यथार्थ के आधार पर किया गया है।

नेपाल की संसदीय संरचना और मधेशी दलों की स्थिति

नेपाल की प्रतिनिधि सभा में कुल 275 सीटें हैं—

165 सीटें प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली (FPTP) से

110 सीटें समानुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) प्रणाली से,
जहाँ 3% वोट थ्रेशहोल्ड अनिवार्य है।

2022 के आम चुनाव में मधेश आधारित दलों—जनमत पार्टी, जसपा/पिएसपी के विभिन्न गुट, लोसपा, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी और अन्य छोटे दलों—को मिलाकर लगभग 12% PR वोट मिले थे। विभाजन के बावजूद, क्षेत्रीय एकाग्रता (तराई में) के कारण उन्हें लगभग 15 FPTP और 10 PR, यानी कुल 25 सीटें हासिल हुई थीं।

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तीन संभावित परिदृश्य: वोट प्रतिशत और सीटें

इस विश्लेषण में यह एक बड़ी, लेकिन यथार्थवादी मान्यता ली गई है कि मधेश आधारित प्रमुख दलों का पूर्ण एकीकरण हो जाता है। इसके आधार पर तीन परिदृश्य सामने रखे गए हैं:

1, नकारात्मक स्विंग: वोट 5% घटकर 7%

अगर अलोकप्रियता, आंतरिक असंतोष या बाहरी दबावों के कारण वोट शेयर घटकर 7% रह जाता है, तब भी—

PR सीटें: 7–9

FPTP सीटें: 10–20
➡️ कुल: लगभग 17–29 सीटें

यानी सबसे खराब स्थिति में भी ये दल मौजूदा 25 सीटों के आसपास टिके रह सकते हैं।

2, यथास्थिति: वोट 12% बरकरार

यदि कुल वोट शेयर वही रहता है जो 2022 में था—

PR सीटें: 13–15

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FPTP सीटें: 20–35
➡️ कुल: लगभग 33–50 सीटें

इस स्थिति में मधेशी दल संसद में एक मजबूत ब्लॉक के रूप में उभरेंगे।

3, सकारात्मक स्विंग: वोट 5% बढ़कर 17%

यह सबसे कम संभावित, लेकिन रणनीतिक रूप से संभव परिदृश्य है—जिसमें
भू-राजनीतिक कारक, भावनात्मक एकजुटता और एकीकरण का मनोवैज्ञानिक असर काम करे—

PR सीटें: 18–20

FPTP सीटें: 35–55
➡️ कुल: लगभग 53–75 सीटें

इस स्थिति में मधेश आधारित दल राष्ट्रीय राजनीति की धुरी बन सकते हैं।

FPTP में एकीकरण का असमान लाभ

इस पूरे विश्लेषण का सबसे अहम निष्कर्ष यही है कि
एकीकरण का सबसे बड़ा लाभ FPTP प्रणाली में मिलता है।

तराई क्षेत्र में वोटों का भौगोलिक संकेंद्रण पहले से मौजूद है। यदि वोट विभाजन खत्म हो जाए और ये दल चुनाव से पहले नेपाली कांग्रेस (NC) या एमाले (UML) के साथ गठबंधन न करें, तो वे कई सीटों पर सीधे जीत दर्ज कर सकते हैं।

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चुनाव के बाद: किंग मेकर की भूमिका

चुनाव के बाद, मधेश आधारित एकीकृत शक्ति के पास विकल्प होंगे—

NC–UML गठबंधन को समर्थन

या वैकल्पिक ध्रुव के रूप में RSP जैसे दलों के साथ जाना

यानी सत्ता निर्माण में उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है।

निष्कर्ष

यह विश्लेषण कोई औपचारिक सांख्यिकीय मॉडल नहीं, बल्कि ट्रेंड आधारित राजनीतिक अनुमान है। फिर भी इससे एक बात स्पष्ट होती है—
मधेश आधारित दलों की असली ताकत उनके वोट प्रतिशत से ज्यादा, उनके एकीकरण में है।

यदि वे बिखरे रहे, तो सीमित रहेंगे।
यदि एक हुए, तो सत्ता के खेल में अनदेखा करना मुश्किल होगा।

(लेखक का व्यक्तिगत मत: यह आकलन केवल बौद्धिक अभ्यास के लिए है; लेखक व्यक्तिगत रूप से चुनाव बहिष्कार का पक्षधर है।)

— राकेश मिश्रा के स्टेटस से साभार

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