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चार बार सांसद रहे वरिष्ठ नेता बृजेशकुमार गुप्ता ने छोड़ी एमाले, ओली नेतृत्व पर गंभीर आरोप

 

बुटवल | 22 पुस (6 जनवरी 2026)
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) के पूर्व केंद्रीय सदस्य और कपिलवस्तु से चार बार संघीय सांसद चुने जा चुके वरिष्ठ नेता बृजेशकुमार गुप्ता ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। पूर्व संघीय मंत्री रह चुके गुप्ता ने पार्टी अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाते हुए यह कदम उठाया है।

गुप्ता ने कहा कि जेनजी आंदोलन के दौरान ओली नेतृत्व वाली सरकार ने युवाओं और छात्रों के सुशासन सहित जायज मांगों को नजरअंदाज किया और आंदोलन पर दमन किया। उनके अनुसार, दो बड़े दलों की सत्ता साझेदारी के कारण नेतृत्व में यह घमंड पैदा हो गया है कि “जो चाहें, कर सकते हैं”, और पार्टी के भीतर सुधार की कोई संभावना नहीं दिख रही।

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भ्रष्टाचार संरक्षण का आरोप

गुप्ता ने पार्टी नेतृत्व पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने ऑनलाइनखबर से कहा,

“पार्टी नेतृत्व का ध्यान, गतिविधि और राजनीतिक संस्कार भ्रष्टाचार करने और भ्रष्टाचारियों को बचाने में ही केंद्रित दिखाई दिया। सुशासन देने की कोई गंभीर इच्छा नहीं दिखी, इसलिए पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व अच्छे कामों का श्रेय लेने में आगे रहता है, लेकिन गलतियों और कमजोरियों को कभी स्वीकार नहीं करता।

भारत से दिया इस्तीफा, आगे की राजनीति पर विचार जारी

गुप्ता ने बताया कि उन्होंने पार्टी से इस्तीफा उस समय दिया जब वे भारत में थे और पार्टी महाधिवेशन में भी शामिल नहीं हुए।
उन्होंने कहा कि वे सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे, लेकिन आगे किस दल में जाएंगे, इस पर अपने क्षेत्र के मतदाताओं और शुभेच्छुओं से सलाह ले रहे हैं।

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लंबा राजनीतिक सफर

इंजीनियर की स्थायी नौकरी छोड़कर गुप्ता वर्ष 2056 बीएस (1999 ई.) में राजनीति में आए थे।
उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राप्रपा से की, बाद में तमलोपा से जुड़े और फिर एमाले में शामिल हुए।

  • 2056 और 2074 में प्रतिनिधि सभा सदस्य चुने गए
  • 2064 और 2070 में दो बार संविधान सभा सदस्य बने
  • 2079 के आम चुनाव में वे कांग्रेस नेता सुरेन्द्रराज आचार्य से बेहद कम मतों से पराजित हुए थे
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राजनीतिक हलकों में हलचल

चार बार सांसद और पूर्व मंत्री जैसे कद के नेता का पार्टी छोड़ना एमाले के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी नेतृत्व पहले से ही जनआंदोलनों और सुशासन के सवालों को लेकर आलोचना का सामना कर रहा है।

गुप्ता का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा, इस पर फिलहाल सबकी नजर टिकी हुई है।

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