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गुयाना की संसद में हिंदी भाषा की गूंज, दुनिया के कोने-कोने में फैली

जॉर्जटाउन :

गुयाना की संसद में हिंदी भाषा की गूंज दुनिया के कोने-कोने में फैल गई. ‘बजट 2026’ की बहस के दौरान जब विपक्ष ने मंत्री विकाश रामकिसून की भाषाई क्षमता पर तंज कसा तो भारतीय मूल के मंत्री दहाड़ पड़े. उन्होंने शुद्ध हिंदी विरोधियों को डिबेट का खुला चैलेंज दे डाला. विकाश ने ताल ठोकते हुए दावा किया कि वो बिना किसी तैयारी या कागज के पूरी तरह हिंदी में डिबेट के लिए तैयार है. सदन में हिंदी में उनका ओपेन चैलेंज सुनकर सभी लोग हक्का-बक्का रह गए और सोशल मीडिया पर भी आग लग गई.
सदन में ‘हिंदी की दहाड़’
दरअसल, विपक्षी सांसद विष्णु पांडे ने रामकिसून की हिंदी बोलने की क्षमता पर सवाल उठाा था लेकिन उन्हें ये नहीं पता था कि विकाश शुद्ध हिंदी में ही सारे सवालों को धोकर रख देंगे. जैसे ही उन्होंने रामकिसून की हिंदी पर सवाल उठाया, मंत्री जी ने अपनी कुर्सी से खड़े होकर कहा, ‘माननीय अध्यक्ष महोदय, आदरणीय सदस्य, माननीय विष्णु पांडे… मैं अभी इसी वक्त उनको चुनौती देता हूं कि किसी भी स्तर पर, किसी भी जगह पर जा करके, विषय वे तय करेंगे, और मैं जा करके डिबेट करूंगा बिना कागज ले करके’.
गुयाना की राजनीति में ‘देसी टच’
बिना कागज के डिबेट: रामकिसून ने न केवल हिंदी में जवाब दिया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी गंभीर विषय पर बिना नोट्स के हिंदी में बहस करने के लिए तैयार हैं.
सांस्कृतिक जड़ें: गुयाना की 40% आबादी भारतीय मूल की है, जो 1838 से 1917 के बीच उत्तर प्रदेश और बिहार से वहां गए थे. आज विकाश रामकिसून जैसे नेता उसी गौरवशाली परंपरा का चेहरा बन गए हैं.कौन हैं विकाश रामकिसून
वे गुयाना के कृषि मंत्रालय में राज्य मंत्री  हैं.
उनकी शिक्षा भारत से जुड़ी है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से मास्टर ऑफ कॉमर्स (M.Com) और फाइनेंस की पढ़ाई की है.
राजनीति में आने से पहले वे बैंकिंग सेक्टर में एक सफल मैनेजर रह चुके हैं और उनके पास कानून (LL.B.) की भी डिग्री है.

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