राष्ट्रीय सभा से चलचित्र विधेयक पारित
२८ माघ, काठमांडू।
राष्ट्रीय सभा से चलचित्र विधेयक पारित हो गया है।
बुधवार को हुई राष्ट्रीय सभा की बैठक में इस विधेयक को पारित किया जाए, ऐसा प्रस्ताव प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की ओर से महिला, बालबालिका तथा ज्येष्ठ नागरिक मंत्री श्रद्धा श्रेष्ठ ने पेश किया था। जिसे सभा ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। यह विधेयक तत्कालीन संचार तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री पृथ्वीसुब्बा गुरुङ द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
२०८२ साल वैशाख १४ गते राष्ट्रीय सभा में दर्ज किया गया यह विधेयक २०८२ साल जेठ ६ गते सभा में प्रस्तुत किया गया था। २०८२ साल असार ९ गते इस पर सामान्य चर्चा हुई। इसके बाद धारा-दर-धारा विचार के लिए २०८२ साल साउन १४ गते इसे विधायन प्रबंधन समिति को भेजा गया था।
विधायन समिति द्वारा पारित कर सभा में पेश किए जाने के बाद यह विधेयक सभा से पारित हो गया।
सरकार का विश्वास है कि यह विधेयक कानून में परिवर्तित होने के बाद चलचित्र क्षेत्र को सामाजिक, सांस्कृतिक और मनोरंजन उद्योग के रूप में विकसित करने में अधिक सहूलियत होगी।
विधेयक का उद्देश्य चलचित्र के माध्यम से देश को पर्यटन गंतव्य के रूप में आगे बढ़ाना, स्वदेशी तथा विदेशी फिल्मों के प्रदर्शन से पूर्व उनकी जाँच की व्यवस्था करना तथा स्वदेशी फिल्मों के विकास, विस्तार, प्रोत्साहन और नियमन को सुनिश्चित करना है।
यह विधेयक कानून में परिवर्तित होने के बाद विक्रम संवत् २०२६ में बने चलचित्र अधिनियम में समयानुकूल संशोधन होगा और समावेशी एवं संघीय संरचना तथा नई तकनीक के अनुरूप नई फिल्म नीति लागू की जाएगी।
हालाँकि, इसे कानून का रूप लेने के लिए अभी कुछ प्रक्रियाएँ बाकी हैं। अब यह विधेयक नई प्रतिनिधि सभा के गठन के बाद वहाँ जाएगा। प्रतिनिधि सभा से पारित होने के पश्चात यह पुनः राष्ट्रीय सभा में लौटेगा। इसके बाद राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष के माध्यम से यह राष्ट्रपति के पास जाएगा। राष्ट्रपति द्वारा प्रमाणीकरण के बाद यह विधेयक कानून के रूप में लागू हो जाएगा।


