बांग्लादेश में वोटिंग से पहले फिर हिंदू की हत्या

बांग्लादेश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा दिन है, जहां देश के 12 करोड़ लोग अपने लिए एक नई सरकार चुनने वाले हैं. इसी बीच वहां एक और हिंदू की निर्मम हत्या बता रही है कि बांग्लादेश में मतदान के दौरान जब अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं हो पा रही है, तो यहां उनका भविष्य कैसा होगा? पहले ही बांग्लादेश में पिछले एक साल में जिस तरह से हिंदुओं पर अत्याचार हुए हैं, वो डराने वाले हैं. अब चुनाव से ठीक पहले एक और हिंदू युवक रतन की हत्या कर उसका शव चाय के बागान में फेंक दिया गया.
28 साल के रतन साहूकार की हत्या बेहद निर्ममता से की गई है. जब उसका शव मिला, तो उसके हाथ-पांव रस्सी से बंधे हुए थे और शरीर पर गहरे जख्मों के निशान थे. बुधवार सुबह करीब 10 बचे चम्पारा में चाय के बागानों में रतन का शव बरामद किया गया और तब भी उसके घावों से खून बह रहा था. रतन इन्हीं चाय के बागानों में काम करता था, जहां उसका शव मिला है. उसके सहकर्मियों का कहना है कि ये आपसी रंजिश या चुनावी हिंसा का मामला है.
बांग्लादेश में लगातार हो रही हिंदुओं की हत्या
यहां बीते करीब 3 महीनों (1 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026) के दौरान बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हुई हत्या की घटनाओं की एक सूची है. रिपोर्ट के अनुसार इन मामलों में कम से कम 15 हिंदू मारे गए हैं, जिन्हें अक्सर स्थानीय हिंसा या पूर्व नियोजित हमलों में निशाना बनाया गया. दिसंबर महीने में प्रंतोष कर्मोकार, उत्पल सरकार, जोगेश चंद्र रॉय, सुबोर्णा रॉय, शांतो चंद्र दास और दीपु चंद्र दास, अमृत मंडल, बजेन्द्र बिस्वास और खोकों चंद्र दास की हत्या हुई. जनवरी में राणा प्रताप बैरागी, मिथुन सरकार, सरत मणि चक्रवर्ती, जॉय मोहापात्रा, समीर दास और प्रलय चाकी की हत्या हुई. फरवरी में भी अब तक 3 हिंदुओं की हत्या हो चुकी है. एक रिपोर्ट में ये भी माना गया कि बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या को चुनावी हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.
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