अब मधेशी दल का असली चेहरा दिखेगा

मुरली मनोहर तिवारी (सिपु) , बीरगंज, २ अगस्त| सविधान मसौदा के बिरोध में श्रावण ४ और ५ को सिर्फ मधेशी जनता को देखा गया। इसे भी स्वस्फूर्त कह सकते है। ज्यादातर विश्लेषक इसे नागरिकता के विषय में अंगीकृत प्रावधान का बिरोध मानते है। बहुत हद तक सही ही है। पुरे बिरोध और बंद में पहले, दूसरे और तीसरे तह के नेता की उपस्थिति नगण्य ही थी। हो सकता है वे छोटे बिरोध में आना अपनी तौहीन समझते हो। कुछ हो या ना हो इनलोगो का ढारस तो भारी ही रहता है।
जब आलोचना हुई तो मधेश में जनसभा किया गया। वह सभा भी वोट की राजनीती चमकाने से ज्यादा कुछ नहीं था। कई जगह मधेश से जुड़े अन्य संगठन ने साझीदारी और भागीदारी का प्रस्ताव किया। परंतु इन्हें लगा की किसी और के जुड़ने से इनकी अहमियत कम हो जाएंगी और भविष्य में इनके कई रहस्य बेनकाब भी हो जाएंगे। इसी आशंका से मधेश के कई बिशेष कार्यकर्ता को कार्यक्रम स्थल से बाहर फिकवा दिया गया।
आश्चर्य है की ये संविधान सभा में अपनी उपस्थिति कम होने का बहाना करके सभी समिती के बैठक में गैरहाजिर रहे। उसी समय इन्होंने कई पोस्टर जारी किए, जिसमे मधेशी जनता पर ही पहाड़ी पार्टी को वोट देने पर तंज कसा गया था। इनकी मानसिक स्थिति पर अब शंका उत्पन्न हो रही है। ज्यादा फायदे के लोभ में ये अलग-अलग चुनाव में गए। चुनाव से पहले मधेश बिरोधी सहमती किए।
मधेशी दाल सरकार में अकेले ही चले जाते है। जब सड़क पर आना होता है तो बेवकूफ बनाने के लिए मधेशी एकता की बात करते है। इनकी कथनी औए करनी में अंतर होने के वावजूद इन्हें मधेश ने संविधान सभा२ में संसं१से ज्यादा मत दिया है। जहा मधेश जल रहा है वही अलग देश वाले कहते है “ये संबिधान नेपाल के लिए बन रहा है हम मधेश के लिए बाद में बना लेंगे” अब इन्हें कोई बताए आँख बंद करने से रात नहीं होती। अरे ! जब ऊखीयाडी में ऊख नहीं मिले तो क्या कोइलाडी में ऊख का रस मिलेगा ?
पहले ऐसा देखा गया है की मधेशी पार्टी के भीतर नया और युवा वर्ग फर्क मत रखते आया है। संविधान सभा१ में युवा वर्ग सक्रिय और खबरदारी करते दिखे थे। गजेन्द्र बाबू कहा करते थे मधेश की मुक्ति तीसरी पिढ़ी में होगी। आज ये तीसरी पीढ़ी भी राजनितिक मंच से गायब हो गए है। गौरतलब है की ये युवा कोई नौकरी करते नहीं। कोई आय-आर्जन तो है नहीं। घर से पैसे मिलते नहीं। काठमांडू में रहना,खाना-पिना मोबाइल इंटरनेट, विदेश भ्रमण इन सब का मेनटेनेन्स “आका” के भरोसे है। ये अपने आका को नाराज नहीं कर सकते। क्या अब ये परिपक्व हो गए है ? क्या अब ये राजनीती समझ कर उसके अंग बन चुके है ? क्या इन्हें भी सत्ता और भत्ता का स्वाद लग चूका है ?
अगर युवा पिढ़ी में जंग लग जाएं तो बहुत ही दुर्भायपूर्ण होगा। इसी बिच तराई मधेश युवा अभियान और मधेशी युथ फोर्स ने संविधान सभा के बाहर मधेशी दल को बेनकाब करते हुए, मधेशी जनभावना अनुसार संविधान सभा से इस्तीफा देने का मांग किया। इस प्रदर्शन के बाद भी मधेशी दल के युवा हरकत में नहीं आएं। अब तराई मधेश युवा अभियान और युथ फ़ोर्स ने मधेशी दल को जगाने के लिए उनके कार्यालय में ज्ञापन पत्र देने का बीडा उठाया है। मधेशी दल इसे स्वीकार करते है या दम्भ दिखाते है यही उनका असली चेहरा दिखायेगा। क्या मधेश में निराशा के माहौल में इन युवाओ का भगीरथ प्रयास गंगा को आकाश से खीच कर लाएगा ?

