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झापा–5 में बदला सियासी समीकरण: ओली की बढ़ी सक्रियता, बालेन्द्र की चुनौती से मुकाबला

झापा। छह बार झापा से निर्वाचित पूर्व प्रधानमंत्री एवं एमाले अध्यक्ष पिछले चुनावों में अपने निर्वाचन क्षेत्र में सीमित समय ही देते थे। एक-दो सभाओं को संबोधित कर वे अन्य क्षेत्रों में पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में निकल जाते थे। वर्ष २०७९ (2022) के चुनाव में कनकाई नगरपालिका–3, सुरुंगा में आयोजित सभा में उन्होंने कहा था कि “मेरे क्षेत्र में कोई समस्या नहीं है, इसलिए मैं देशभर में अन्य उम्मीदवारों को जिताने जाता हूं।”

लेकिन इस बार परिस्थिति बदली हुई है। (राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी) द्वारा झापा–5 से उम्मीदवार बनने के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल गया है। ओली निकट स्रोतों के अनुसार, स्थानहद फुकुवा (प्रतिबंध हटने) के बाद बीते पाँच हफ्तों में वे 16 दिन झापा में बिता चुके हैं।

नामांकन के बाद वे पहले दमक स्थित एक होटल में रुके और फिर किराये का डेरा लेकर कार्यकर्ताओं व मतदाताओं से लगातार संवाद कर रहे हैं। हाल ही में वे स्थानीय स्तर पर आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कार्यक्रम में भी शामिल हुए। उनके सचिवालय के दीपेन्द्र दाहाल के अनुसार, अब वे बड़े भाषणों से ज्यादा घर–घर संपर्क पर ध्यान दे रहे हैं।

रणनीति में बदलाव

पार्टी के भीतर से सलाह मिली है कि इस बार कम बोलें और सीधे मतदाताओं से संवाद बढ़ाएं। विश्लेषक सागर शिवाकोटी का कहना है कि झापा–5 पर ओली का फोकस इस बात का संकेत है कि वे इस चुनौती को गंभीरता से ले रहे हैं।

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शुरुआत में एमाले पंक्ति को विश्वास नहीं था कि बालेन्द्र जैसी लोकप्रिय शख्सियत यहां से चुनाव लड़ेंगी। लेकिन नामांकन के बाद दिखी भीड़ और युवाओं में दिख रहे उत्साह ने समीकरण बदल दिए। दमक के एक युवा मतदाता रोनिश अधिकारी का कहना है कि “इस बार कई लोग अलग सोच बना रहे हैं।”

जमीनी माहौल

झापा–5 में कमल गाउँपालिका, गौरादह नगरपालिका और गौरीगंज गाउँपालिका के हिस्से आते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी एमाले का प्रभाव मजबूत माना जाता है, जबकि शहरी इलाकों में बालेन्द्र के पक्ष में लहर दिख रही है।

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कुछ मतदाता खुले तौर पर “नए विकल्प” की बात कर रहे हैं। वहीं बुजुर्ग मतदाताओं में भी बदलाव की चर्चा है। दमक क्षेत्र में 65 हजार से अधिक मतदाता हैं, जहां मुकाबला रोचक माना जा रहा है।

पुराने आंकड़े, नई चुनौती

ओली 2048, 2051, 2056, 2070, 2074 और 2079 में संसद का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। २०७४ के चुनाव में उन्होंने 57,139 मत प्राप्त किए थे, जबकि २०७९ में 52,319 मतों के साथ देशभर में सर्वाधिक मत पाने वाले उम्मीदवार बने। उस चुनाव में उन्हें का भी समर्थन मिला था।

इस बार स्थिति अलग है। ने सीधे ओली को चुनौती दी है। माओवादी पृष्ठभूमि से जुड़े नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार रञ्जित तामाङ भी मैदान में हैं। राप्रपा ने लक्ष्मी संग्रौला को उम्मीदवार बनाया है।

औद्योगिक पार्क पर बहस

दमक औद्योगिक पार्क, जिसे चीन के सहयोग से विकसित करने की योजना है, भी चुनावी मुद्दा बना हुआ है। एमाले नेताओं का कहना है कि यह उनकी दीर्घकालीन योजना है, जबकि विपक्ष इसे नए सिरे से प्रस्तुत कर रहा है।

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मुकाबला कांटे का

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार झापा–5 में मुकाबला पहले से अधिक कड़ा है। अतीत में ओली को “प्रधानमंत्री पद के दावेदार” के रूप में अतिरिक्त समर्थन मिलता था, लेकिन अब उन्हें सीधे चुनौती मिल रही है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, संगठनात्मक मजबूती अब भी एमाले की ताकत है, लेकिन युवाओं और शहरी मतदाताओं में नए चेहरे की ओर आकर्षण स्पष्ट दिख रहा है।

ऐसे में झापा–5 इस बार राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गया है, जहां नतीजा सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक संकेतों का भी निर्धारण करेगा।(कान्तिपुर से साभार)

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