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नेपाल की नई सरकार की विदेश नीति पर बढ़ी उत्सुकता, मोदी ने रवि लामिछाने और बालेन्द्र शाह को दी बधाई

 

काठमांडू। नेपाल के हालिया चुनाव में शानदार सफलता हासिल करने वाली (रास्वपा) के नेतृत्व को भारत की ओर से भी बधाई संदेश मिला है। ने सोमवार को रास्वपा सभापति और पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा संभावित प्रधानमंत्री को टेलीफोन कर चुनावी सफलता की शुभकामनाएँ दीं।

बातचीत के बाद मोदी ने सामाजिक सञ्जाल पर लिखा कि उन्होंने नई सरकार के गठन के लिए शुभकामनाएँ देते हुए भारत की ओर से नेपाल के साथ आपसी समृद्धि, प्रगति और साझा हितों के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत और के संबंध नई ऊँचाइयों तक पहुँचेंगे।

दूसरी ओर, संभावित प्रधानमंत्री के रूप में आगे बढ़ाए गए शाह ने भी मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि नेपाल और के बीच ऐतिहासिक, घनिष्ठ और बहुआयामी संबंधों को आगे और मजबूत तथा परिणाममुखी बनाने के लिए सहयोग जारी रहेगा। शाह ने भारत को लगातार दो बार क्रिकेट विश्वकप जीतने पर भी बधाई दी। इसी तरह का संदेश रास्वपा सभापति रवि लामिछाने ने भी साझा किया।

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नई सरकार की विदेश नीति पर चर्चा तेज

कुछ ही सप्ताह में शाह के प्रधानमंत्री बनने की संभावना के बीच नेपाल की भावी विदेश नीति को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। भारत के लिए नेपाल के पूर्व राजदूत का कहना है कि नई सरकार की सफलता काफी हद तक उसकी विदेश नीति पर भी निर्भर करेगी।

बराल के अनुसार, के प्रधानमंत्री रहते समय पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को लेकर कई विवाद पैदा हुए थे। उन्होंने कहा कि चीन की “विक्ट्री परेड” में ओली की भागीदारी और (जीएसआई) जैसे प्रस्तावों में शामिल होने से नेपाल की कूटनीतिक संतुलन नीति पर सवाल उठे थे। नई सरकार को ऐसी स्थितियों से बचना होगा।

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खाड़ी संकट के बीच नेपाली नागरिकों की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण विदेश नीति की चुनौतियाँ और बढ़ सकती हैं। खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक कार्यरत हैं। यदि उन्हें वापस लाने की स्थिति बनती है, तो उनके पुनर्वास और प्रबंधन की चुनौती भी सरकार के सामने होगी।

नेपाल के पूर्व राजदूत का कहना है कि ऐसे मामलों में भारत जैसे पड़ोसी देशों के साथ समन्वय आवश्यक हो सकता है। अतीत में भी संकट के समय नेपाली नागरिकों के उद्धार के लिए भारत की सहायता ली गई थी।

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संतुलित कूटनीति पर जोर

रास्वपा के चुनावी घोषणापत्र में भी यह कहा गया है कि नेपाल अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए बदलते भू-राजनीतिक माहौल को विकास के अवसर में बदलेगा। पार्टी ने “संतुलित और गतिशील कूटनीति” अपनाने की बात कही है, ताकि नेपाल को “बफर स्टेट” से “वाइब्रेंट ब्रिज” में बदलते हुए क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी और कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा सके।

रास्वपा के सांसद और पूर्व मंत्री ने भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार और देश की स्थापित विदेश नीति के अनुरूप ही काम करेगी। उन्होंने कहा कि नेपाल की विदेश नीति का मूल सिद्धांत असंलग्नता है और रास्वपा सरकार इसी सिद्धांत के तहत आगे बढ़ेगी। पत्र पत्रिकाओं पर आधारित रिपोर्ट

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