सप्तरी का ‘सितारा’ सीताराम साह के उदय और संकल्प की महागाथा
त्याग, तपस्या और विजय: जब सप्तरी की मिट्टी ने अपने ‘बेटे’ को इतिहास रचते देखा
हिमालिनी डेस्क, २२ मार्च ०३६। Sita Ram Sah a rsp MP from Saptari -04 सप्तरी की उस शाम, जब सूरज धीरे-धीरे क्षितिज में समा रहा था, तब क्षेत्र नंबर 4 की फिजाओं में एक नई उम्मीद का जन्म हो रहा था। यह सिर्फ एक चुनावी नतीजे का ऐलान नहीं था, बल्कि उन हजारों आँखों के सपनों का साकार होना था, जिन्होंने दशकों से उपेक्षा और अभाव के अंधेरे को सहा था। जब घोषणा हुई—“सिताराम साह विजयी!”—तो मानों समय ठहर गया। जीत का यह आंकड़ा 36,412 मात्र एक संख्या नहीं थी; यह उन 36 हजार से अधिक धड़कनों का भरोसा था, जिन्होंने एक ऐसे इंसान को अपना ‘भाग्यविधाता’ चुना, जो कल तक व्यवस्था की फाइलों में आम आदमी का दर्द ढूंढता था।
जिसने 2041 में एक सरकारी अधिकारी के रूप में सेवा शुरू की। एक सुरक्षित भविष्य, तय वेतन और समाज में एक रुतबा—सब कुछ उनके पास था। लेकिन, जब वे भू-संरक्षण अधिकारी के रूप में सप्तरी की धूल भरी पगडंडियों पर चलते थे, तो उन्हें फाइलों के आंकड़ों से ज्यादा लोगों की आँखों में छिपी बेबसी दिखाई देती थी।
सिताराम साह की आँखों में झिलमिलाते आँसू उनकी 40 वर्षों की तपस्या की कहानी कह रहे थे। 2038 की छात्र राजनीति की वह तपिश, 2041 में सरकारी सेवा का वह अनुशासन, और फिर 2074 में अपनी जमी-जमाई नौकरी को ठोकर मारकर जनता की सेवा में उतरने का वह साहसी फैसला—आज सब कुछ सार्थक हो गया। यह जीत किसी महल की मीनारों पर नहीं, बल्कि सप्तरी के उन कच्चे मकानों की देहरी पर लिखी गई है, जहाँ लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यह एक ‘अधिकारी’ के ‘जन-सेवक’ बनने की वह भावुक गाथा है, जिसने साबित कर दिया कि जब इरादे नेक हों और नियत साफ, तो जनता खुद अपने नायक का राजतिलक करती है।
बदलाव की एक सिसकी और जीत की गूँज: सिताराम साह, जिन्होंने उम्मीदों को हकीकत में बदल दिया
जब मौन ने गर्जना की
सप्तरी की वह शनिवार की शाम सामान्य नहीं थी। हवाओं में एक अजीब सी बेचैनी और उम्मीद का मिश्रण था। जब मतगणना केंद्र से आंकड़े बाहर आने शुरू हुए, तो ऐसा लगा मानो बरसों से दबी हुई आकांक्षाएं अचानक फूट पड़ी हों। सिताराम साह Sita Ram Sah a rsp MP from Saptari -04 —एक ऐसा नाम जो कल तक फाइलों और सरकारी सेवा की ईमानदारी की चहारदीवारी तक सीमित था—आज एक इतिहास पुरुष बनकर उभरा।
यह जीत केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं है; यह एक ‘सेवक’ का ‘नायक’ बनने का सफर है। यह उन हजारों मजलूमों, किसानों और युवाओं की जीत है जिन्होंने वर्षों से बदलाव की राह देखी थी।
निर्वाचन परिणाम: एक ऐतिहासिक जनादेश
सप्तरी–4 के चुनाव परिणाम ने बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों के गणित को फेल कर दिया। जहाँ एक तरफ दशकों का अनुभव और सत्ता का रसूख था, वहीं दूसरी ओर सिताराम साह का बेदाग चरित्र और जनता से जुड़ाव था।
जीत का अंतर: 23,309 मतों का विशाल अंतर यह बताता है कि यह लहर नहीं, बल्कि ‘सुनामी’ थी।
संघर्ष की नींव: 2038 से 2080 तक का सफर
सिताराम साह की कहानी रातों-रात मिली सफलता की कहानी नहीं है। यह चार दशकों की तपस्या है।
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छात्र राजनीति की तपिश (2038): उनकी यात्रा नेविसंघ (Nepal Student Union) से शुरू हुई। एक युवा छात्र के रूप में उन्होंने सीखा कि राजनीति केवल पद नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने का माध्यम है।
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प्रशासनिक निष्ठा (2041): जब वे सरकारी सेवा में आए, तो उन्होंने ‘निजामती कर्मचारी’ के रूप में खुद को जनता के प्रति समर्पित कर दिया। भू-संरक्षण अधिकारी के तौर पर उन्होंने जमीन की समस्याओं को करीब से देखा।
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त्याग और संकल्प (2074): सेवा में रहते हुए भी उनका मन समाज के लिए कुछ बड़ा करने को व्याकुल था। उन्होंने अपने सुरक्षित पद से इस्तीफा दिया और सीधे चुनावी मैदान में उतरे। हालांकि 2074 में उन्हें प्रादेशिक सभा में 11,395 मत मिले, लेकिन वह हार उनके लिए अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत थी।
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पार्टी का बदलाव और विचारधारा: उन्होंने महसूस किया कि पुरानी पार्टियां शायद अब जनता की बदलती उम्मीदों के साथ कदम नहीं मिला पा रही हैं। इसलिए उन्होंने ‘घंटी’ (RSP) का हाथ थामा और सप्तरी की सोई हुई चेतना को जगाया।
आँखों में आँसू और दिल में जनता
जब जीत की आधिकारिक घोषणा हुई, तो सिताराम साह भावुक हो उठे। उन्होंने अपने समर्थकों की ओर देखते हुए कहा, “यह माला जो मेरे गले में है, यह फूलों की नहीं, बल्कि उन 36 हजार से अधिक लोगों की उम्मीदों का हार है।” सप्तरी-4 की गलियों में बूढ़ी महिलाओं ने उन्हें तिलक लगाया और युवाओं ने उन्हें कंधों पर उठा लिया। यह दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं था। लोग कह रहे थे, “हमने नेता नहीं, अपना बेटा चुना है।” वह क्षण अत्यंत मार्मिक था जब उन्होंने अपने पुराने प्रतिद्वंद्वियों का भी सम्मान किया और कहा कि अब राजनीति खत्म, विकास शुरू।
विजन और लक्ष्य: सप्तरी का पुनरुद्धार
सिताराम साह के पास केवल भाषण नहीं, बल्कि एक ठोस ‘विजन डॉक्यूमेंट’ है। उनकी प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं:
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सड़क और कनेक्टिविटी: उनका मानना है कि जब तक सप्तरी के सुदूर गांवों को पक्की सड़कों से नहीं जोड़ा जाता, तब तक किसानों की समृद्धि संभव नहीं है।
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शिक्षा और स्वास्थ्य: एक पूर्व कर्मचारी होने के नाते, वे जानते हैं कि सरकारी संस्थानों में सुधार कैसे लाया जाता है। उनका लक्ष्य है कि सप्तरी के बच्चों को पढ़ाई के लिए काठमांडू या भारत न जाना पड़े।
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सामाजिक न्याय: वे उन समुदायों की आवाज बनेंगे जिन्हें अब तक केवल वोट बैंक समझा गया। वे पिछड़ों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) Sita Ram Sah a rsp MP from Saptari -04
प्रश्न 1: सिताराम साह ने कितनी मतों के अंतर से जीत हासिल की ?
उत्तर: उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी तेजु लाल चौधरी को 23,309 मतों के ऐतिहासिक अंतर से हराया।
प्रश्न 2: सिताराम साह ने राजनीति में कब प्रवेश किया?
उत्तर: वे वर्ष 2038 से छात्र राजनीति (नेविसंघ) में सक्रिय थे, लेकिन सक्रिय चुनावी राजनीति के लिए उन्होंने 2074 में सरकारी सेवा से इस्तीफा दिया।
प्रश्न 3: उनकी पिछली राजनीतिक संबद्धता क्या थी ?
उत्तर: वे लंबे समय तक नेपाली कांग्रेस से जुड़े रहे और सप्तरी क्षेत्र नंबर 4 के क्षेत्रीय सभापति भी रहे। वर्तमान में वे राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के सदस्य हैं।
प्रश्न 4: उनका मुख्य चुनावी एजेंडा क्या था ?
उत्तर: उनका मुख्य एजेंडा भ्रष्टाचार का अंत, सुदूर गांवों में बुनियादी ढांचा (सड़कें), और सामाजिक न्याय था।
निष्कर्ष: एक नए सवेरे की दस्तक
सिताराम साह की यह जीत लोकतंत्र की खूबसूरती है। यह साबित करता है कि जनता अब जागरूक हो चुकी है। उन्हें अब खोखले वादे नहीं, बल्कि सिताराम साह जैसा समर्पित नेतृत्व चाहिए।
सप्तरी-4 की मिट्टी से निकला यह ‘सितारा’ अब देश की संसद में चमकेगा। यह जीत उस हर इंसान की है जो मानता है कि ईमानदारी अभी भी राजनीति में जीवित है।
हार्दिक शुभकामनाएं

