प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह को भारत आने का न्योता, परिणाममुखी यात्रा की तैयारी
काठमांडू/मॉरिशस 12 अप्रैल। भारत के प्रधानमंत्री ने नेपाल के प्रधानमंत्री को भारत भ्रमण का औपचारिक निमंत्रण दिया है। नेपाल के विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री शाह ने इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है और दोनों देशों के बीच इस उच्चस्तरीय यात्रा को परिणाममुखी बनाने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है।
मॉरिशस में आयोजित सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे विदेश मंत्री खनाल ने भारतीय मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रधानमंत्री शाह ने भारत के प्रधानमंत्री मोदी का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर आवश्यक तैयारी पूरी होने के बाद ही इस यात्रा की तिथि तय की जाएगी, ताकि यह केवल औपचारिक न होकर ठोस परिणाम देने वाली यात्रा साबित हो।
खनाल ने कहा, “प्रधानमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। दोनों देशों के बीच प्राविधिक और राजनीतिक स्तर पर तैयारी पूरी होने के बाद यात्रा की तारीख तय की जाएगी, जिससे यह यात्रा ठोस उपलब्धि देने वाली हो।”
परियोजनाओं और सहयोग के एजेंडे पर जोर
नेपाल और भारत के बीच इस संभावित उच्चस्तरीय यात्रा को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित न रखने की स्पष्ट योजना बनाई जा रही है। काठमांडू और नई दिल्ली दोनों पक्ष द्विपक्षीय सहयोग के ठोस परिणाम सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
विदेश मंत्री खनाल के अनुसार, दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद द्विपक्षीय तंत्रों को सक्रिय बनाते हुए प्राथमिकताओं के आधार पर परियोजनाओं और कार्यक्रमों को तय किया जाएगा। इसके बाद ही प्रधानमंत्री की भारत यात्रा को अंतिम रूप दिया जाएगा।
मॉरिशस में आयोजित नौवें हिंद महासागर सम्मेलन () के दौरान खनाल और भारत के विदेश मंत्री के बीच हुई मुलाकात में भी इसी विषय पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि नेपाल की प्राथमिकताओं के अनुरूप परियोजनाओं और सहयोग के क्षेत्रों को तय करने के बाद ही प्रधानमंत्री की यात्रा निर्धारित की जाए।
खनाल ने बताया कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग के सभी तंत्रों को सक्रिय करने और नए सहयोग क्षेत्रों की तलाश करने पर सहमति व्यक्त की है।
भारतीय विदेश सचिव की संभावित नेपाल यात्रा
बताया गया है कि नेपाल अपनी आंतरिक तैयारी पूरी करने के बाद भारत से औपचारिक रूप से विदेश सचिव स्तर की वार्ता के लिए अनुरोध करेगा। इसके बाद भारतीय विदेश सचिव के नेपाल आने की संभावना है, जहां दोनों पक्ष आगे की रणनीति और परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
नेपाल और भारत के बीच सुरक्षा, जलस्रोत, सिंचाई, सीमा प्रबंधन, व्यापार, वाणिज्य और कृषि सहित कई क्षेत्रों में जिला स्तर से लेकर विदेश मंत्री स्तर तक लगभग तीन दर्जन द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं। इनमें से कुछ नियमित रूप से सक्रिय हैं, जबकि कुछ लंबे समय से निष्क्रिय पड़े हैं।
भारत की आर्थिक और तकनीकी सहायता से नेपाल में कई परियोजनाएं विभिन्न चरणों में लागू की जा रही हैं। कुछ परियोजनाओं ने अच्छी प्रगति की है, जबकि कुछ अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी हैं। वर्तमान सरकार इन सभी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने की योजना बना रही है।
राजनीतिक बदलाव के बाद सकारात्मक संकेत
विदेश मंत्री खनाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का निमंत्रण नेपाल में हाल ही में हुए राजनीतिक बदलाव के बाद सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
नेपाल में चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद 25 फागुन को प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष और बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत की थी। इसके बाद 13 चैत को प्रधानमंत्री शाह के पदभार ग्रहण करने पर मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा था कि उनकी नियुक्ति नेपाली जनता के नेतृत्व के प्रति विश्वास को दर्शाती है।
मोदी ने अपने संदेश में कहा था कि वह नेपाल-भारत मित्रता और सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रधानमंत्री शाह के साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हैं।
विदेश नीति में निरंतरता, लेकिन राष्ट्रीय हित प्राथमिक
विदेश मंत्री खनाल ने स्पष्ट किया कि नेपाल की विदेश नीति में निरंतरता बनी रहेगी, लेकिन उसे राष्ट्रीय हितों से मजबूती से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि नई सरकार का मतलब पुरानी नीतियों को समाप्त करना नहीं है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप और प्रभावी बनाना है।
हिंद महासागर सम्मेलन में जलवायु और वैश्विक सहयोग पर जोर
मॉरिशस में आयोजित को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री खनाल ने हिंद महासागर क्षेत्र में सुशासन, जलवायु संकट और वैश्विक शांति जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि नेपाल भले ही भूपरिवेष्टित देश है, लेकिन हिमालय और हिंद महासागर के बीच गहरा पर्यावरणीय संबंध है। हिमालय क्षेत्र की हिमनदियों और हिमतालों से निकलने वाला जल अंततः हिंद महासागर तक पहुंचता है, इसलिए इन दोनों क्षेत्रों के बीच अविभाज्य संबंध है।
खनाल ने चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और ग्लेशियल झीलों के फटने का खतरा बढ़ रहा है। वहीं हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री तापमान और समुद्र का स्तर बढ़ने से कई द्वीपीय और तटीय देशों के सामने गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जलवायु संकट से निपटने के लिए साझा जिम्मेदारी और बहुपक्षीय सहयोग बेहद जरूरी है।
समुद्र केवल तटीय देशों का विषय नहीं
विदेश मंत्री खनाल ने अपने संबोधन में कहा कि समुद्र केवल तटीय देशों का विषय नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की साझा संपत्ति है। इसलिए समुद्री संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय कानून और सहयोग पर आधारित व्यवस्था जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धताओं के अनुसार भूपरिवेष्टित देशों को समुद्र तक पहुंच और समुद्री अर्थव्यवस्था में भागीदारी का अधिकार है। नेपाल समुद्री कानून से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों के प्रति प्रतिबद्ध है।
खनाल ने समुद्री आतंकवाद, समुद्री डकैती, मादक पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों पर भी चिंता जताई और इनसे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता बताई।
सम्मेलन में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान, ओमान और सेशेल्स सहित कई देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने भाग लेकर हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, जलवायु और आर्थिक सहयोग पर विचार-विमर्श किया।


