देशहित में बेहद जरूरी है ग्रेट निकोबार परियोजना : डॉ करुणाशंकर उपाध्याय
डॉ करुणाशंकर उपाध्याय, मुंबई । यदि आप चाहते हैं कि निकट भविष्य में भारत हिंद – प्रशांत क्षेत्र की एक बड़ी सैन्य और आर्थिक शक्ति बने तो आप एक देशभक्त नागरिक के रूप में द ग्रेट निकोबार परियोजना का समर्थन करें। यदि आप चाहते हैं कि भारत के पास हांगकांग और सिंगापुर का विकल्प हो, चीन के मोतियों की माला का जवाब हीरों के हार के रूप में हो, युद्ध के समय भारतीय सेनाएँ चीन को मुख्य भूमि से 2000 किलोमीटर दूर ही रोक दें और भारतीय नौसेना दक्षिण चीन सागर स्थित चीनी सैन्य अड्डे और अमेरिका के दिएगोगार्शिया पर लगातार नजर रख सके तो यह आपका नैतिक दायित्व है कि आप उक्त परियोजना का समर्थन करें।यदि आप चाहते हैं कि भारत के पास भी होर्मुज जलसंधि की भांति मलक्का जलसंधि का तुरुप का पत्ता हो तो इसका समर्थन अवश्य करें।
ध्यातव्य है कि भारत सरकार दक्षिण निकोबार में रणनीतिक बंदरगाह और विमान तल का निर्माण कर रही है। ऐसा माना जा रहा है कि यह सिंगापुर और हांगकांग का विकल्प बन सकता है।इसे द ग्रेट निकोबार प्रकल्प नाम दिया गया है।केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित यह प्रकल्प 81,000 करोड़ रुपए का है। यह निकोबार द्वीप पर सबसे दक्षिणी और बड़े हिस्से अर्थात इंदिरा बिंदु के निकट बनाया जा रहा है। ग्रेट निकोबार द्वीप भारत की मुख्य भूमि से करीब 1,800 किलोमीटर दूर दक्षिण – पूर्व में स्थित है। यह बंगाल की खाड़ी में 910 वर्ग किमी के हिस्से में बन रहा है।इस द्वीप पर इंदिरा पॉइंट भी है, जो इंडोनेशिया के सबसे बड़े द्वीप सुमात्रा से महज 170 किमी दूर है।
इस प्रकल्प का आरंभ नरेंद्र मोदी सरकार ने 2021 में किया था। उसी समय नीति आयोग द्वारा इसे अनुमति प्रदान की गई थी। इस मेगा प्रोजेक्ट को अंडमान-निकोबार द्वीप समूहों के आखिरी छोर तक बनाया जाना है। इसमें मालवाहक जहाजों के लिए बंदरगाह, एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट, स्मार्ट सिटी और 450 मेगावॉट की गैस और सौर बिजली परियोजना की स्थापना होनी है।
भारत के लिए इस प्रकल्प का रणनीतिक महत्व बहुत अधिक है।भारत इस क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बलों की तैनाती के साथ-साथ युद्धपोतों के बेड़े,पनडुब्बियों, युद्धक विमानों और मिसाइलों की तैनाती कर सकता है जिससे हिन्द – प्रशांत क्षेत्र में भारत की स्थाई उपस्थिति रहेगी। भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए इस पूरे इलाके से हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र पर नजर रख सकेगा।इसके विकास से संपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र पर भारत का वर्चस्व स्थापित होगा।
इस प्रकल्प में चार इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल बनेंगे। साथ ही, गलाथिया खाड़ी में एक विशाल बंदरगाह का बनेगा जहाँ विश्व के बड़े मालवाहक जहाज रुक सकेंगे। वे ईंधन भरने के साथ – साथ अपनी मरम्मत भी करवा सकेंगे। इसके अलावा यहां एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाया जाएगा, जो नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए होगा। इससे यह सिंगापुर और हांगकांग का विकल्प बन सकेगा ।यह अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा। साथ ही गैस और सौर आधारित पावर प्लांट का निर्माण भी होगा जो द्वीप की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए 450 मेगावाट की बिजली बनाएगा। दक्षिण निकोबार की भौगोलिक स्थिति इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के निकट लाती है। सबसे बड़ी बात यह भी है कि यह मलक्का जलडमरूमध्य के करीब है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद इस जगह का महत्व और बढ़ गया है।यहां से विश्व के करीब 40% और चीन के 72%व्यापारिक जहाज गुजरते हैं।फिलहाल भारतीय कार्गो का एक बड़ा हिस्सा कोलंबो या सिंगापुर में ट्रांसशिप होता है। उसे बड़े जहाज से छोटे जहाज या अत्याधुनिक नावों में लादा जाता है।
इस बंदरगाह के बनने से भारत को सालाना करोड़ों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।यह वैश्विक शिपिंग का हब बन सकेगा।हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए ग्रेट निकोबार में एक मजबूत सैन्य और बुनियादी ढांचा होना भी अब भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी है।फलस्वरूप इस क्षेत्र में निर्मित हवाई पट्टियां भारत की समुद्री सीमाओं की निगरानी के लिए एक कभी न डुबोए जा सकने वाले विमानवाहक पोत की भांति कार्य करेंगी ।
यह बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रशांत महासागर से हिंद महासागर को जोड़ने वाले चारों जलसंधियों मलक्का, सुंदा लाॅम्बाक और आम्बई वेटर पर भारत आस्ट्रेलिया की नौसेनाएं संयुक्त रूप से निगरानी करती हैं जिससे हिन्द महासागर क्षेत्र में आने वाले चीन के किसी भी युद्धपोत और पनडुब्बी की तुरंत सूचना मिल जाती है।प्राय: देखा गया है कि चीनी नौसेना दक्षिण चीन सागर को पार करके सुंदा जलसंधि से होकर ही हिन्द महासागर में प्रवेश करती है और आस्ट्रेलिया के साथ समझौते के अंतर्गत भारतीय नौसेना उसके कोकोस द्वीप पर तैनात हो सकती है। फलस्वरूप दक्षिण निकोबार के विकास के बाद चीन के साथ युद्ध की स्थिति में भारतीय नौसेना वहाँ पर इतनी सशक्त होगी कि वह हिंद महासागर के प्रवेश द्वार पर ही चीनी नौसेना को जलसमाधि दे सके। भारत अभी भी दक्षिण निकोबार से मलक्का जलसंधि पर पूरी निगरानी और नियंत्रण रखता है। लेकिन हिंद – प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ रही दादागिरी को रोकने के लिए यह आवश्यक है कि यहाँ भारतीय सेनाओं का एक बड़
सैन्य अड्डा हो।प्रस्तुत परियोजना इसी उद्देश्य को लेकर संकल्पित है। अभी दो वर्ष पूर्व भारतीय वायुसेना ने अपने सबसे बड़े युद्धक विमान को दक्षिण निकोबार अर्थात इंदिरा प्वाइंट के निकट निर्मित हवाई पट्टी आई.एन.एस.बाज पर उतार कर इतिहास रच दिया है।इस स्थान का सबसे अधिक रणनीतिक महत्व है। यहां से प्रतिवर्ष कई लाख जहाज गुजरते हैं और चीन का 72 फीसदी व्यापार इसी रास्ते से सम्पन्न होता है।यह भारत को भौगोलिक बढ़त देता है कि हम युद्ध के समय इस मार्ग को बाधित करके चीन के 72% व्यापार को रोककर उसे घुटनों पर ला सकते हैं।भारत की इसी रणनीतिक स्थिति को देखकर चीन अनेक कुचक्रों के बावजूद युद्ध करने का साहस नहीं जुटा पाता।इस परियोजना की सफलता से भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक बड़ी शक्ति बनकर उभरेगा। इसका विरोध करने वाले कहीं न कहीं चीन के पक्षधर माने जाएंगे, क्योंकि इस परियोजना के सम्पन्न होने से सर्वाधिक प्रभाव चीन पर पड़ेगा।
सारांश यह है कि दो ग्रेट निकोबार परियोजना विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए है। यह भारत की समुद्री सोच, हमारी विकासमान आर्थिक महत्त्वाकांक्षा और पर्यावरणीय दायित्वबोध की परिचायक है। अभी हाल ही में भारत को अंडमान सागर में तेल और प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार मिला है। उसके समुचित दोहन, विकास और प्रबंधन के लिए भी यहां पर एक विशाल सैन्य और आर्थिक ढांचा अपेक्षित है।ऐसी स्थिति में यह स्पष्ट है कि जिन्हें भारत के हितों से चीन – अमेरिका के हितों की चिंता अधिक है, वही इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। हमें यह स्मरण रखना होगा कि चीन ने भारत को घेरने के लिए म्यांमार के कोको, बांग्लादेश के चटगांव, श्रीलंका के हबनटोटा और पाकिस्तान के ग्वादर पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली है।अत: उसके उत्तर के लिए भारत के पास दक्षिण निकोबार परियोजना एक ब्रह्मास्त्र सिद्ध होगी।

भवदीय,
डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय
वरिष्ठ प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग,
मुंबई विश्वविद्यालय, विद्यानगरी,
सान्ताक्रुज़- पूर्व, मुंबई 4000 98.
मो. 9167921043 / 9869511876.

