Wed. Sep 9th, 2026
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शब्द और मौसम

 

वसंत इन दिनों बहुत खूबसूरत एक शब्द है
कुछ फूल पत्तों का बना हुआ
भयानक धूल और गर्त के बीच
सरकारी इमारतों के उद्यानों के गमलों में कैद
और कुछ तो लटक ही जाता है मौसम
लोगों के घर की चहरदीवारियों से
ज़्यादातर आम और लीची की शक्ल में
शहर अब ईंट की एक भट्ठी है
जहाँ शायद राजनीतिक भाषणो के लिए बचे हैं
एक आध मैदान, जिनकी रौंदी हुई
भूरी होती घास में
कोई सम्भावना नहीं
लहलहाने की
वसंत तो अधूरा ही रहेगा
बिना घास के खुले मैदानों के
हाँ, घास में भी खिलते हैं फूल
और इतनी हैं विविधताएँ
घास की
कि अपरिचित रह जाती हैं
तमाम ज़िंदगियाँ
अखबारी बहसों में आता और जाता है वसंत
और वसंत के साथ
घास के मैदानों की संधि से
चकित रह जाते हैं लोग
भूकम्प के एक नवीन झटके के बाद भी

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