एफसीसी में शेख हसीना ने लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई, दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटने का किया ऐलान

प्रो. एस.एस. डोगरा, नई दिल्ली, 8 अगस्त। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब (एफसीसी) ऑफ साउथ एशिया में आयोजित एक खचाखच भरी प्रेस वार्ता को ऑडियो संदेश के माध्यम से संबोधित करते हुए लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटने के अपने संकल्प की भी घोषणा की।
वरिष्ठ पत्रकारों, संपादकों, मीडिया पेशेवरों तथा राजनयिक समुदाय के सदस्यों की उपस्थिति में आयोजित यह संवाद वर्ष 2024 में पद छोड़ने के बाद शेख हसीना का पहला सार्वजनिक मीडिया संबोधन था। उनके वक्तव्य को भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में व्यापक महत्व दिया गया।
अपने संबोधन में शेख हसीना ने अपने विरुद्ध चल रही कानूनी कार्यवाहियों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया तथा बांग्लादेश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की पुनर्स्थापना का आह्वान किया। उन्होंने अवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने और राजनीतिक बंदियों की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों, संवैधानिक शासन व्यवस्था और कानून के राज की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रेस वार्ता के उपरांत आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में पत्रकारों ने बांग्लादेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, लोकतंत्र की बहाली की संभावनाओं तथा क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। इस संवाद ने बांग्लादेश के बदलते राजनीतिक परिदृश्य और उसके दक्षिण एशिया पर पड़ने वाले प्रभावों के प्रति अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निरंतर रुचि को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम के दौरान इस संवाददाता की डॉ. प्रदीप आर. कर, अध्यक्ष, जेनोसाइड ’71 फाउंडेशन, अमेरिका, से भी संक्षिप्त मुलाकात हुई। मूल रूप से बांग्लादेश से संबंध रखने वाले और वर्तमान में अमेरिका के स्थायी निवासी डॉ. कर ने 1971 के बांग्लादेश नरसंहार के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने तथा उसके ऐतिहासिक दस्तावेजों और विरासत के संरक्षण के लिए फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
दोनों के बीच लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवाधिकारों तथा संवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से लोगों के बीच आपसी विश्वास और संबंधों को मजबूत करने जैसे विषयों पर भी सार्थक चर्चा हुई। यह मुलाकात दक्षिण एशिया में शांति, ऐतिहासिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने के साझा संकल्प का प्रतीक रही।
बाद में भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह मीडिया कार्यक्रम एक निजी संस्था द्वारा आयोजित किया गया था और इसका भारत सरकार से कोई आधिकारिक संबंध नहीं था।
यह आयोजन एक बार फिर इस तथ्य को रेखांकित करता है कि फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब (एफसीसी) ऑफ साउथ एशिया क्षेत्रीय एवं वैश्विक महत्व के विषयों पर संवाद का एक प्रतिष्ठित मंच है, जहाँ पत्रकार, राजनयिक, शिक्षाविद् और सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्व समसामयिक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करते हैं।

