बिहार और यूपी में बाढ़ का बड़ा खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा
बाढ़ का पानी सबसे पहले तिब्बत से निकलने वाली भोटे कोशी नदी में आया. भोटे कोशी आगे चलकर त्रिशूली नदी में मिल जाती है. त्रिशूली नदी मध्य नेपाल की एक प्रमुख नदी है, जिसने इस बाढ़ के सबसे बड़े वेग का सामना किया. इसके बाद नारायणी नदी में ये पानी पहुंचा और फिर गंडक.
गंडक नदी में नेपाल से पानी रात करीब 8 बजे पहुंचना शुरू हुआ था. इसके बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा. देर रात वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर पानी का डिस्चार्ज करीब 1.50 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया था. हालांकि अब राहत की खबर है. गंडक नदी का जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है. फिलहाल वाल्मीकिनगर गंडक बराज से करीब 81 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है.
बताया जा रहा है कि नेपाल की त्रिशूली नदी में बढ़ा पानी नारायणी नदी के रास्ते आगे निकल गया. पानी का बड़ा हिस्सा नारायणी में फैल गया. इससे गंडक में उम्मीद से कम पानी पहुंचा. इसी वजह से बिहार और यूपी में बाढ़ का बड़ा खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा है. निचले इलाकों में भी राहत की स्थिति है. नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार और यूपी में अलर्ट जारी किया गया था. प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया था.
नेपाल में फ्लैश फ्लड की वजह क्या थी?
नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह अचानक आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई. पानी के साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी और चट्टानें नीचे की ओर आईं. वैज्ञानिक अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर इतनी तेजी से बाढ़ कैसे आई.
बाढ़ की शुरुआत कहां से हुई?
बाढ़ नेपाल-चीन (तिब्बत) सीमा के ऊंचे पहाड़ी इलाके से शुरू हुई. इसका असर रसुवा जिले के टिमुरे और स्याप्रुबेसी इलाके में दिखा.
ल्हेंडे नदी और भोटे कोसी नदी के ऊपरी हिस्से में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा आया.
सुबह करीब 8:30 से 9 बजे के बीच पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ा.
बाढ़ की सबसे बड़ी वजह क्या मानी जा रही है?
वैज्ञानिकों को आशंका है कि ऊंचे पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा खिसका. इसे आइस एवलॉन्च कहा जाता है. बर्फ और चट्टानों का मलबा ल्हेंडे खोला में गिरा. इससे नदी का रास्ता कुछ समय के लिए रुक गया.
नदी में पानी जमा होने लगा और प्राकृतिक बांध जैसी स्थिति बन गई. इसके बाद जमा पानी अचानक टूटकर नीचे की ओर बह निकला. पानी के साथ भारी मात्रा में मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थर भी बहने लगे.
क्या ग्लेशियल झील फटने की भी आशंका है?
वैज्ञानिक इस संभावना की भी जांच कर रहे हैं. आशंका है कि किसी ऊंचाई वाले इलाके में मौजूद ग्लेशियल झील का पानी अचानक बाहर आया हो. इसे GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड कहा जाता है.
हालांकि, अभी यह पक्के तौर पर नहीं कहा गया है कि बाढ़ की वजह GLOF ही थी.
क्या भूकंप भी इसकी वजह हो सकता है?
इलाके में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज होने की जानकारी सामने आई है. इससे पहाड़ और बर्फ खिसकने की संभावना जताई जा रही है.
वैज्ञानिकों को भूकंपीय रिकॉर्ड में कुछ असामान्य संकेत भी मिले हैं. लेकिन अभी भूकंप और बाढ़ के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक बाढ़ की गति और उसका स्तर असाधारण था. त्रिशूली नदी में कुछ जगहों पर केवल 30 मिनट में पानी करीब 9 मीटर तक बढ़ गया. मालखू में जलस्तर करीब 7 मीटर बढ़ा. पानी के साथ मलबा और बड़े पत्थर भी तेजी से नीचे आए.


