बन्द के ५८ वेंं दिन मानव सागर सड़कों पर उतरा
अमित अग्रवाल, वीरगंज, २४ असोज
‘लाठी–फाठा ले के होख हो तैयार नेपाल अभी बन्दे बा,’ गीत के साथ मधेशी मोर्चा के अनिश्चितकालीन मधेशबन्द के ५८ वें दिन और नाकाबन्दी के १८ वें दिन वीरगंज की सड़कों पर पर्सा और बारा जिलों से मानव–सागर उमड़ा ।

संघीय समावेशी मधेशी मोर्चा और संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोचा के आह्वान पर हुए मधेश बन्द के लगभग दो महीने पहुँचने को हैं । इस आन्दोलन के समर्थन में गाँव–गाँव से लोगों का आना निरन्तर बढ़ता जा रहा है और सबका लक्ष्य भारत–नेपाल सीमा का नोमेन्सलैंड होता है जहाँ आन्दोलन को आम मधेशी जनता ने उत्सव का रूप दे दिया है । संकीर्ण पुल और इस आन्दोलन को गति दे रहे नेताओं के लिए इस भीड़ का स्वागत और संयमन करने में काफी कठिनाई हो रही है ।
इस आन्दोलन में लोगों की व्यापक और आश्चर्यजनक सहभागिता देखते हुए वीरगंज, आर्दशनगर निवासी संजय कांसरिया का कहना है कि आन्दोलन लम्बा होने पर लोगों का आत्मविश्वास टूटता है मगर इस आन्दोलन में तो दिनानुदिन लोगों की ऊर्जा बढ़ती ही जा रही है । लोग सरकार के प्रति असन्तुष्ट हैं, वात्र्ता और समस्या के प्रति सरकार के कदमों को वे अपर्याप्त मान रहे हैं । शहर से गाँव तक हर चौराहे तथा चौपालों पर यह लोगों की चर्चा का प्रमुख विषय हैं ।
गाँव–गाँव से ट्रैक्टर, ताँगा, साइकिल, मोटर साइकल, टेम्पू से आए लोग बाजे–गाजे और नाच तमाशे के साथ नारों और जुलूस से इस आन्दोलन को जन–उत्सव का रूप दे दिया है और मितेरी पुल और उसके आसपास की अवस्था इस क्षेत्र के विश्व प्रसिद्ध गढ़ीमाई मेला से कम नहीं । आन्दोलन में आए लोग शेष आन्दोलनकारियों के लिए चावल, दाल, आलू तरकारी आदि लेकर इस भाव से समर्पित कर रहे हैं मानो वे यज्ञ में हवि प्रदान कर रहे हैं । हर आदमी इस धर्म–कार्य में अपना–अपना योगदान देना चाहता है ।
सीमावर्ती शहर रक्सौल में आन्दोलनकारियों के लिए अखण्ड भण्डारा चल रहा है रक्सौल के प्रमुख उद्योगपति महेश
अग्रवाल इसका नेतृत्व कर रहे हैं और पूरा रक्सौलवासी इस कार्य में अपना सहयोग दे रहे हैं । उनका मानना है कि नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र से उनका रोटी–बेटी का सम्बन्ध है और आन्दोलनकारियों के प्रति उनकी भावना अतिथि–सेवा के भाव से भरा हुआ है । ‘ नभूतो नभविष्यति की तर्ज पर चलता हुआ यह आन्दोलन कब समाप्त होगा, यह सबके सरोकार का विषय है मगर इसे असफल करने का कोई भी प्रयास चाहे सरकार के पक्ष से हो या मधेश के नेताओं के पक्ष से, अगर निराशा जनता में व्याप्त हुई तो देश का वर्तमान और भविष्य भी प्रभावित हो सकता है । 

