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मधेश आन्दोलन विश्व के सभी विभेद का प्रतीक ः ओमप्रकाश सर्राफ

 

गोरखपुर, उत्तरप्रदेश बैशाख २० गते

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सदभावना पार्टी के युवा नेता का मानना है कि मधेश आन्दोलन विश्व में हो रहे विभेद के प्रतीक के रुप में सामने आया है । भारत के गोरखपुरकुशीनारा उच्च अध्ययन संस्थान द्वारा आयोजित नेपाल भारत सम्बन्ध एवं मधेशी संकट परिप्रेक्ष्य अन्तरक्रिया में नेता सर्राफ ने उक्त धारणा व्यक्त की है । नेता सर्राफ ने कहा कि इस रिश्ते को सिर्फ काठमान्डौ और दिल्ली के नजरिए से नही. देखा जाय यह जन जन का रिश्ता है जिसे नेपाल सरकार सुनियोजित तरीके से कमजोर बना रही है इसके लिए जनता को सजग होना चाहिए । मधेश आन्दोलन में मानव अधिकार का घोर उल्लंघन हुआ है । मधेश की भावनाओं और अधिकार विहीन इस संविधान का विरोध किया जाता रहआ है और तक तक किया जाएगा जक्ब तक मधेशियों का अधिकार संविधान में सुरक्षित ना हो जाय । उन्होंने जानकारी दी कि जेष्ठ १ गते से काठमान्डौ केन्द्रीत आन्दोलन शुरु होगा और सिंह दरबार घेरा जाएगा । भूकम्प के एक वर्ष गुजर जाने के बाद भी सरकार भूकम्प पीडितों के लिए कुछ नहीं कर पाई है । कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पूर्व सभासद आत्माराम साह ने कहा कि प्रमुख दलों की नीयत में ही खोट है सत्ता के निरंकुश प्रवृत्ति की वजह से राजनीतिक संकट उत्पन्न हुआ है । नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार एवं सवश्लेषक चन्द्रकिशोर झा ने कहा कि सीमांचल को शांत होने के लिए मधेश में शान्ति होना आवश्यक है । दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर केप्राफेसर डा.आनन्द पाण्डेय के सभापतित्व में सम्पन्न उक्त कार्यक्रम में नागरिक समाज के शिवानन्द सहाय, पत्रकार मोज सिंह, जेपी आन्दोलन के अगुवा प्रियदर्शी आदि अतिथियों ने अपने अपने मंतव्य रखे ।

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