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मोदी से हाथ मिला सकते हैं नीतीश,बिहार में सियासी समीकरण बदलने के आसार

 

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*पटना.मधुरेश*२२, नवम्बर | लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली आरजेडी के साथ मिलकर सीएम नीतीश कुमार बिहार की सत्ता पर काबिज हैं। रोचक बात यह है कि आरजेडी नोटबंदी का जबर्दस्त विरोध कर रही है।जबकि नोटबंदी के मसले पर सीएम नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ खड़े हैं। आरजेडी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने हाल के दिनों में नोटबंदी के खिलाफ कई बयान दिए हैं। यहां तक कि उनके बेटे और राज्य के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी नोटबंदी की आलोचना की है।

दरअसल इन्हीं बयानों के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बिहार में आरजेडी और जेडीयू में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी के हाथों करारी हार के बाद नीतीश ने भले ही लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर बिहार की सत्ता हासिल कर ली हो, लेकिन शासन चलाने में लालू यादव के हस्तक्षेप से नीतीश अंदर ही अंदर काफी नाराज बताए जा रहे हैं।
8 नवंबर को पीएम मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा के बाद से ही नीतीश कुमार बिहार में अपनी निश्चय यात्रा के दौरान पीएम के कदम की जमकर तारीफ कर रहे हैं। बकौल नीतीश मोदी के फैसले के पीछे भावना सही है और इसका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी शेर की सवारी कर रहे हैं, जिससे उनका गठबंधन भी बिखर सकता है। लेकिन पीएम के कदम की तारीफ होनी चाहिए। बिहार के सीएम ने कहा कि नोटबंदी में कुछ खामियां जरूर हैं और इस मुद्दे को भी उठाया जाएगा। नीतीश के इन बयानों ने बिहार के सियासी गलियारों में उथल-पुथल जरूर मचा दिया है। दरअसल नीतीश और बीजेपी में तालमेल की खबरें काफी समय से चर्चा में है। बिहार में बीजेपी और जेडीयू 8 साल तक गठबंधन में रहे हैं और सियासी पंडित दोनों दलों में फिर से गठबंधन को नकारने की स्थिति में भी नहीं हैं।
सूत्रों के अनुसार बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन को जमानत मिलने के बाद से ही आरजेडी और जेडीयू के बीच अंदरूनी खींचतान शुरू हो गई थी। इसके अलावा भी कई ऐसे मुद्दे हैं जिसके कारण दोनों दलों में तनाव बढ़ा है। आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह का लगातार नीतीश के खिलाफ बयान को भी दोनों दलों के बीच बढ़ते तनाव के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि बीजेपी ने दीनदयाल जन्म शताब्दी वर्ष संबंधी समिति में नीतीश कुमार को इकलौते मुख्यमंत्री के रूप में जगह दी थी और तभी से दोनों दलों के बीच तालमेल की खबरें हवा में तैर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जेडीयू के एक बड़े नेता ने भाजपा के कुछ नेताओं से गठबंधन को लेकर दिल्ली मे मुलाकात भी की है।
बहरहाल सियासत के गलिययारे मे अभी यह चर्चा जोरों पर नहीं है कि महागठबंधन रहेगा या नहीं। आने वाले दिनों में बिहार में सियासी तानाबाना बदलता दिख सकता है। लेकिन इसकी सम्भावना बहुत ही कम दिखती है। साथ ही यूपी मे होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन बनाने की पहल भी शुरू कर दी गई है। फिलहाल सब कुछ ठीक-ठाक ही कहा जा सकता है। लेकिन राजनीति तो आखिर राजनीति ठहरी, इसमें कब क्या हो जाए कहा नहीं जा सकता।

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