जनकपुर में मधेशी महिलाओं द्वारा घूंघट जुलुस
कैलास दास जनकपुर । मधेशी महिलाओं ने प्रधानन्यायधीश सुशीला कार्की के विरोध में जनकपुर में घूंघट में जुलुस निकाली है । जनक चौक पर करीब दो सय की संख्या में सहभागी मधेशी महिलाओं ने घुघट तानकर कार्की के विरोध में विभिन्न प्रकार का नारा जुलुस लगाते हुए नगर में प्रदर्शन किया है । विरोध जुलुस में महिला संजाल, मैथिल महिला संजाल, सद्भावना पार्टी की महिला मञ्च लगायत दर्जनौं संघ संस्था में सहभागी महिलाओं की उपस्थिति थी । हाथ में प्ले कार्ड लेकर सुशिला कार्की सावधान, महिला प्रति भेदभाव बन्द कर, हमारी घोघ हमारी संस्कार सहित दर्जनौं नारे लिखे हुए थे ।
महिलाओं की समूह की जनक चौक से निकली जुलुस जनकपुर के नगर परिक्रममा करते हुए जिला प्रशासन कार्यालय में जाकर नारा जुलुस और ज्ञापन पत्र भी बुझाई है । सहभागी महिलाओं का मानना था कि मधेशी महिला का संस्कार है घुघट, हम लोग संस्कारी है इसलिए सभी को सम्मान करने के लिए घुघट को अपनी संस्कृति बनाकर रखी है । जब तक बात है शिक्षा रोजगारी और की तो हजारौं महिला डाक्टर इन्जिनियर, कार्यालय प्रमुख और शिक्षिक में कार्यरत है । किन्तु प्रमुख न्यायाधिश को यह नही दिखा और घुघटवाली महिला कर विरोध किया है । सहभागी महिलाओं ने यह भी कहा कि जब तक प्रधानन्यायाधीश कार्की मधेशी महिलाओं से माफी नही माँगेगी तब तक मधेशी महिला आन्दोलन करेगी ।
सद्भावना की नेतृ विभा ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी, प्रधानन्यायाधीश में महिला सुशिला कार्की नियुक्त हुआ तो हम लोग बहुत प्रफुलित हुए थे । किन्तु उन्होने जो मधेशी महिला प्रति विभेद की दृष्टि देखाई ही वह सरासर गलत है । महिला महिला में विभेद की नीति लाकर मधेशी महिला को बदनाम करने की उनका नियत है । स्मरण होनी चाहिए की प्रधानन्यायाधीश सुशीला कार्की ने सप्तरी के छिन्नमस्ता शक्तिपीठ में पूजापाठ करने आई थी । उसी समय पत्रकार भेट घाट मे उन्होन कहा कि जहाँ पाया वही समानुपातिक समावेशी लगू करने से बहुत बडी समस्या उत्पन्न हो सकती है । मधेशी महिला लडकी और पतहु को नही पढाते है, उन्हे घुम्ट में रखते है और समानुपातिक में अपना अधिकार माँगती है । घुघट में रहने वाली महिला योग्य व्यक्ति नही हो सकती है ।



