बेहाल और परेशान हैं नेपाली बच्चे : सन्दर्भ– बाल दिवस
विनोदकुमार विश्वकर्मा “विमल”, काठमांडू ,२३ नवम्बर | आज जब हम बाल दिवस के अवसर पर देश के नौनिहालों की मुश्किलों को दूर कर उनके लिए एक बेहत्तर भविष्य की कोशिश का संकल्प ले रहे हैं, तब हमें अपनी मौजूदा असफलताओं और चुनौतियों की पड़ताल करनी चाहिए । बच्चों के अच्छे हालत के लिहाज से नेपाल एक पिछडेÞ देशों में से एक है । यदि इस स्थिति में सकारात्मक बदलाव न हुआ, तो न सिर्फ बच्चों का आनेवाला कल त्रासद होगा , बल्कि देश भी अपनी आशाओं और आकांक्षाओं को फलीभूत नहीं कर सकेगा ।
मौजूदा नेपाल में बच्चों के विकास की जो परिस्थिति है, वह अधिक सकारात्मक नहीं है, एक तरफ तो हम विकसित हो रहे हैं, बच्चों को पढ़ाने की नयी–नयी तकनीक आ गयी है, लेकिन जब यह बात आती है कि क्या हम हर बच्चे को वही शिक्षा, वही स्वास्थ्य दे पा रहे हैं, तो इस मामले में हम बहुत पीछे हैं । शिक्षा, स्वास्थ्य लगायत अन्य क्षेत्रों में बदलाव हुआ है, लेकिन वह बदलाव हर बच्चे तक नहीं पहुंच पा रहा है, मौजूदा नेपाल के बचपन को लेकर यह चिंता का विषय है । आज भी गांवों में एक बच्चे के जन्म के बाद उसके पंजीकरण के लिए कोसों दूर जाना पड़ता है । आज भी हम शिशु मृत्यु दर को कम करने में उतने कामयाव नहीं हुए हैं, जितना कि होना चाहिए । आज भी छठवीं–सातवीं के बच्चे विषेशकर दलित, सीमान्तकृत, सही–सही किताबें पढ़ने में अक्षम पाये जाते हैं । ऐसे में जहां हम सकारात्मक रुप से यह भी देखते हैं कि हमने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जो निवेश किया है, वह बहुत ही न्यूनतम राशि है । ऐसे में हर बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए हमें एक लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा ।
स्वस्थ व शिक्षित बचपन के बिना किसी भी देश का विकास संभव नहीं है, क्याेंकि बच्चे ही आगे चलकर विकसित देश की तसवीर बनाते हैं । अगर इनकी बुनियाद ही कमजोर होगी, तो फिर आगे के भविष्य के बारे में बहुत सकारात्मक तो नहीं सोचा जा सकता । शिक्षा, स्वास्थ्य के अतिरिक्त चाइल्ड ट्रैफिकिंग, बाल मजदूरी, बाल विवाह और बाल शोषण के तमाम ऐसे अनैतिक और क्रूर कृत्य भी देखने को मिल रहे हैं । इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन के मुताबिक, चाइल्ड ट्रैफिकिंग एक प्रकार से बच्चे को उसके सुरक्षात्मक माहौल से निकाल कर अपने किसी अन्य मकसद के लिए उसकी क्षमताओं का दोहन और उसका उत्पीड़न करना होता है । दुनियाभर में चाइल्ड ट्रैफिकिंग यानी बच्चों के अवैध व्यापार का मामला बढ़ता जा रहा है । नेपाल भी इस समस्या से अछूता नहीं है ।
एक रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में निम्न कारणों से बच्चों के अवैध व्यापार होता है– गरीबी, भोजन का अभाव, विकास की गतिविधियों के कारण होनेवाला विस्थापन, बेहत्तर कानून व्यवस्था की कमी, सरकार की असंवेदनशील नीतियां, राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव आदि । बच्चों का आर्थिक, मनोवैज्ञानिक और यौन–शोषण तब होता है जब वे मजदूरी करने को अभिशप्त होते हैं । इसी प्रकार बाल–विवाह जैसी कुप्रथा के कारण बच्चे वयस्क होने पर भी बहुत सारी सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी और राजनैतिक उपलब्धियों से वंचित हो जाते हैं, विशेषकर लड़कियां कम और कच्ची उम्र में गर्भधारण करती हैं, जिससे प्रायः गर्भपात होता है अथवा कमजोर बच्चे पैदा होते हैं, अथवा जच्चा–बच्चा की मृत्यु हो जाती है, अथवा कई बच्चे हर वर्ष पैदा होते हैं जिससे मां–बच्चे के स्वास्थ्य, देखभाल, शिक्षा, कमाई आदि पर कुप्रभाव पड़ता है । इस प्रकार स्पष्ट है कि आज के आधुनिक युग में भी बाल–विवाह जैसी कुप्रथा नेपाल में जड़ जमाए है । और बच्चों के मानवाधिकार का उल्लंघन है, क्योंकि वे परिपक्व होने पर स्वेच्छा से विवाह करने की स्वतंत्रता से वंचित हो जाते हैं ।
संयक्त राष्ट्र संघ ने बच्चों के जीने ९च्ष्नजत तय ीष्खभ०, विकास ९च्ष्नजत तय म्भखभयिऊभलत०, सुरक्षा ९च्ष्नजत तय एचयतभअतष्यल० एवं सहभागिता ९च्ष्नजत तय एबचतष्अष्उबतष्यल० संबंधी विभिन्न अधिकारों को बाल अधिकार समझौते में शामिल किया है, जिससे एक ओर बच्चों को आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सुअवसर मिले और दूसरी ओर उन्हें क्रूरता, अपमान, भय, दंड, अपराध, यातना, जोखिम, वंचना, सशस्त्र संघर्ष, भेदभाव, उत्पीड़न आदि का शिकार न होना पड़े । ये अधिकार जीवन जीने को विवश हो जाएंगे । ये अधिकार मूलतः“बच्चे पहले”९ऋजष्मिचभल ँष्चकत० के सिद्धान्त पर आधारित है जो उनके वर्तमान तथा भविष्य दोनों का बखूबी ख्याल रखते हैं । नेपाल ने १४ सितंबर १९९० को इसका अनुमोदन कर दिया । इसी अनुसार नेपाल के नये संविधान में भी बच्चों के मानवाधिकार संबंधित प्रावधान रखा गया है । फिर भी बच्चे उपर्युक्त समस्याओं से पीड़ित हैं । उनकी अवस्था दुर्दशाग्रस्त है । और इन समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए व्याकुल हैं । इसलिए जरुरी है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, संबंधित निकाय और सरकार बच्चों के मानवाधिकारों की रक्षा करें अन्यथा उनका भविष्य अंधकारमय होगा और वे जागरुक भावी कर्णधार नहीं बन सकेंगे ।


