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क्या है जिन्दगी ?

 

मुकेश झा36046158-life-pictures

आशा और निराशा के बीच
आशा और निराशा के संग
आशा और निराशा को छोड़कर
जो बढ़ती चली जाती है
अविरल अनवरत
वही तो है जिन्दगी।

सुख और दुःख के बीच
सुख और दुःख के संग
सुख और दुःख को छोड़कर
जो बढ़ती चली जाती है
अविरल अनवरत
वही तो है जिन्दगी।

पल और अनन्त के बीच
पल और अनन्त के संग
पल और अनन्त को छोड़कर
जो बढ़ती चली जाती है
अविरल अनवरत
वही तो है जिन्दगी।

यह भी पढें   रक्सौल की सूखती साहित्यिक सरिता :- चंदेश्वर प्र. वर्मा से शुरू हुई, साहित्यिक चेतना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की चुनौती।

अपने और परायों के बीच
अपने और परायों संग
अपने और परायों को छोड़कर
जो बढ़ती चली जाती है
अविरल अनवरत
वही तो है जिन्दगी।

सफलताओं अफलताओं के बीच
सफलताओं असफलताओं के संग
सफलताओं असफलताओं को छोड़कर
जो बढ़ती चली जाती है
अविरल अनवरत
वही तो है जिन्दगी।

द्वन्द निर्द्वन्द के बीच
द्वन्द निर्द्वन्द के संग
द्वन्द निर्द्वन्द को छोड़कर
जो बढ़ती चली जाती है
अविरल अनवरत
वही तो है जिन्दगी।

यह भी पढें   भारतीय राजदूतावास, काठमांडू द्वारा 'हिंदी दिवस समारोह 2026' का आयोजन: 'हिंदी पखवाड़ा' का हुआ शुभारंभ

तुम और मैं के बीच
तुम और मैं के संग
तुम और मैं को छोड़कर
जो बढ़ती चली जाती है
अविरल अनवरत
वही तो है जिंदगी।

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