रंजीत जी ने एक कुशल कूटनीतिज्ञ की भूमिका निभाई : राजेन्द्र महतो
काठमांडू, २२ फरवरी | भारतीय राजदूत रंजीत राय जी से मेरी पहली मुलाकाल सन् २००४ में भारत के विदेश मंत्रालय में हुई थी । उस समय वे नेपाल डेस्क के प्रमुख में सेवारत थे । तभी से उनसे मेरी नियमित भेंट होती रही है । नेपाल–डेस्क में काम करने की वजह से उन्हें यहां के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषा आदि क्षेत्रों की ज्यादा जानकारी है । पहली बार जब हमारी भेंट हुई उस समय नेपाल में लोकतांत्रिक आंदोलन जारी था । इस आंदोलन में हमें भारत का पूर्ण समर्थन मिला था । खासकर इस कार्य हेतु संयोजन की भूमिका नेपाल डेस्क–प्रमुख की ही हुआ करती थी । इस वजह से भी उन्होंने कुशलतापूर्वक संयोजन करने की भूमिका निभाई । इसी तरह भारत के राजनीतिज्ञों, बुद्धिजीवियों एवं समाजसेवियों से भी भेंट करवाने में रंजीत जी से ज्यादा सहयोग मिलता था । सन् २००४ में जब मैं दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पटना गया था, उस समय वहां के राजनीतिज्ञों, समाजसेवियों के साथ–साथ मुख्यमंत्रियों से भी मुलाकात करवाने हेतु उन्होंने मुझे काफी सहयोग किया था ।
नेपाल डेस्क–प्रमुख के रुप में नेपाल–भारत के महत्वपूर्ण बैठकों में वे काठमांडू आते–जाते रहते थे । इसलिए उन्हें नेपाल के बारे में पूर जानकारी थी । इस प्रकार हम देखते हैं कि पहले का सम्पर्क, सम्बन्ध और नेपाल की वस्तुस्थिति पर पूरी जानकारी होने की वजह से सुविधाजनक काम करने में उन्हें काफी मदद मिली । और एक कुशल कुटनीतिज्ञ के रुप में अपनी भूमिका भी निभाई ।
भारत द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास निर्माण या आधारभूत चीजें आदि से संबंधित छोटी–बड़ी परियोजनाएँ नेपाल में संचालित हैं । इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन के दौरान उन्होंने प्रत्यक्षतः यहां की जनता से जनसम्पर्क बढाया और अनुभव भी हासिल किया । यहां तक कि हिमाल, पहाड व मधेश भ्रमण के दौरान स्थानीय लोगों की समस्याओं को नजदीक से अवलोकन करने का भी उन्हें सुअवसर मिला ।
राजनीतिक पारिस्थितिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो बहुत ही जटील परिस्थिति में नेपाल में उनका कार्यकाल रहा । खासकर दूसरी संविधान सभा के चुनाव से लेकर संविधान निर्माण तक का कार्य रंजीत जी के ही कार्यकाल में सम्पन्न हुआ । संविधान निर्माण के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी नेपाल आए थे । उस समय तत्कालीन सरकार और राजनीतिक दलों के नेताओं को सुझाव देत हुए कहा था कि नेपाली जन का, जन के लिए सर्वस्वीकार्य संविधान बने । यही सुझाव प्रधानमंत्री मोदी जी ने संसद को संबोधित करते वक्त भी दुहराये थे । उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति हेतु रंजीत जी तत्कालीन सरकार तथा शीर्ष नेताओं को सलाह, सुझाव सहित ध्यान आकृष्ट करते रहे ।
संविधान निर्माण के दौरान सदियों से उत्पीडन व शोषण में पडे मधेशी, जनजाति, थारु, दलित, अल्पसंख्यक, पिछडावर्ग लगायत हिमाल व पहाड की जनता के साथ विभेद किया जाने लगा, विगत में किए गए समझौते के बरखिलाफ संविधान बनाया जाने लगा, अंतरिम संविधान में उल्लिखित अधिकारों के हरण किए जाने लगे । वैसी स्थिति में यहां की जनता सडक में उतर आई । उस समय में भी रंजीत जी भारतीय जनता की आवाज तथा मोदी जी की आकांक्षाओं की पूर्ति हेतु यहां के शीर्ष नेताओं को ध्यान आकृष्ट करते रहे । इस प्रकार हम देखते हैं कि द्वितीय संविधान सभा के चुनाव से लेकर संविधान निर्माण प्रक्रिया तक नेपाल और नेपाली जनता की उन्नति हेतु रंजीत जी ने एक कुशल कूटनीतिज्ञ की भूमिका निभाई । यहां के राजनीतिज्ञों के साथ उनका मित्रवत् व्यवहार रहा ।
समग्रतः कहा जा सकता है कि रंजीत जी का कार्यकाल पूर्णतः संतोषजनक रहा । वे अपने कार्यकाल पूर्ण कर भारत लौट रहे हैं । मैं उनकी प्रगति की कामना करुंगा । शेष जीवन सुखदायी हो, उन्नति की राह पर आगे बढे । यही शुभकामना देना चाहता हूं ।
(राजेन्द्र महतो सद्भावना पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं ।)


