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भारत में शब्दकोष से विधवा शब्द हटाने की माँग

 

आगरा (जेएनएन)।

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‘नारी शक्‍ति पुरस्‍कार अवार्ड’ की विजेता वृंदावन की डॉ. लक्ष्‍मी गौतम ने विधवाओं के लिए समान अधिकार की मांग करते हुए सोशल मीडिया कैंपेन शुरू किया है- ‘हम एक समान हैं- हमारे लिए विधवा शब्‍द का उपयोग क्‍यों?’

डॉ. गौतम ने कहा शब्‍द ‘विधवा’ उन महिलाओं के लिए नहीं उपयोग किया जाना चाहिए जिनके पति का निधन हो गया है, क्‍योंकि ऐसी महिलाओं पर इस शब्‍द का विपरीत असर होता है। अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस को देखते हुए अपने कैंपेन को लांच करते हुए डॉ. गौतम ने कहा, ‘उनके साथ सम्‍मानजनक व्‍यवहार होना चाहिए न कि पति के निधन के बाद उनके साथ भेदभावपूर्ण व्‍यवहार हो।’ मीडिया से बात करते हुए डॉ. गौतम ने बताया, ‘विधवा’ शब्‍द दर्दनाक है और पति की मौत के बाद महिलाओं के लिए उपयोग किया गया यह शब्‍द ‘अशुभ’ बना देता है। लोगों की मानसिकता में बदलाव की वकालत करते हुए उन्‍होंने कहा कि इस शब्‍द को हटाने में लंबा वक्‍त लगेगा। अन्‍य महिलाओं की तरह ही इन महिलाओं को भी समान अधिकार से जीने का हक है।

विधवाओं को अशुभ मानते हुए उन्‍हें अपने बच्‍चों की शादियों में भी शामिल होने की अनुमति नहीं दिए जाने की ओर संकेत करते हुए उन्‍होंने कहा कि इस प्रथा को खत्‍म करने का समय आ गया है। पति के निधन के बाद भी महिलाएं मां और बहन हो सकती हैं इसलिए उनके साथ भेदभाव गलत है। इस भेदभाव को खत्‍म करने के लिए बुद्धिजीवियों से कैंपेन में शामिल होने का आग्रह करते हुए डॉ. गौतम ने कहा कि उनका एनजीओ, कनक धारा फाउंडेशन उन महिलाओं के अधिकारों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगा जिनके पति के मौत के बाद उन्‍हें घर से अलग कर दिया गया है। उन्‍होंने बताया कि फिलहाल उनका फाउंडेशन ऐसी 16 महिलाओं की देखभाल कर रहा है जो उनके घर में रह रही हैं।

गौर करने की बात है कि महिला व बाल विकास मंत्रालय ने सोशल मीडिया कैंपेन- #WeAreEqual शुरू किया है। इसका लक्ष्‍य लैंगिक भेदभाव के बारे में जागरुकता फैलाना है। इंटरनेशनल वूमंस डे के अवसर पर इस कैंपेन को लक्षित किया जाएगा और सम्‍मानित नारी शक्‍ति अवार्ड सेरेमनी का आयोजन होगा जिसके तहत राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी बुधवार को दिल्ली में महिला सशक्तिकरण के लिए व्यक्तियों और संस्थाओं को उनके अनुकरणीय योगदान के लिए सम्मानित करेंगे।

साभार, जागरण

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