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अाज है जैन समुदाय में प्रचलित रोहिणी व्रत

 

 

माह के 27वें दिन आता है रोहिणी नक्षत्र

जैन मतावलंबियों के लिए रोहिणी व्रत को व्रत से कहीं बढ़ कर एक त्यौहार माना गया है। धार्मिक तथ्यों के अनुसार जैन समुदाय में मौजूद 27 नक्षत्रों में से एक नक्षत्र रोहिणी है इसीलिए इस नक्षत्र में पड़ने के कारण उनका ये प्रमुख व्रत है। सामान्‍य रूप से प्रत्‍येक माह का सत्‍ताइसवां दिन रोहणी नक्षत्र में पड़ता है। अर्थात ये व्रत हर माह में किया जाता है।

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साल में हर महीने आता है ये व्रत

शुक्रवार को जेठ मास का रोहिणी व्रत है वैसे ये रोहिणी नक्षत्र साल के प्रत्‍येक महीने में आता है। जैन समुदाय में इस व्रत का बेहद महत्‍व है। सत्‍ताइस नक्षत्रों में से रोहिणी भी एक है। जब उदियातिथी अर्थात सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र प्रबल होता है, उस दिन रोहिणी व्रत किया जाता है। यह दिन प्रति 27 दिनों के बाद आता है, इस प्रकार रोहिणी व्रत वर्ष में बारह से तेरह बार किया जाता है। इस वर्ष आने वाले महीनों इस प्रकार रोहिणी व्रत पड़ेगा। 26 मई, शुक्रवार, 22 जून, गुरुवार, 20 जुलाई, गुरुवार, 16 अगस्त, बुधवार, 12 सितम्बर, मंगलवार, 9 अक्टूबर, सोमवार, 6 नवम्बर, सोमवार, 3 दिसम्बर, रविवार, 31 दिसम्बर, रविवार।

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