वर्ष २०१७ में गुप्त नवरात्र
आचार्य राधाकान्त शास्त्री , विंध्याचल | आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से लेकर आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि तक गुप्त नवरात्र के रूप में मनाया जाता है, यह नवरात्र इस वर्ष रविवार 24 जून 2017 से प्रारम्भ होकर , रविवार 2 जुलाई 2017 तक मनाई जाएगी , नवरात्र पारण 3 जुलाई सोमवार को दशमी के दिन किया जाएगा ।
इसके पूर्व 21 जून को मध्यान्ह 12:13 बजे से आर्द्रा नक्षत्र के सूर्य प्रारम्भ होकर 6 जुलाई को को मध्यान्ह तक रहेंगे , इस अवधि काल मे आरम्भ के 4 दिन माता कामाख्या देवी के लिए सृष्टि शक्ति रचना का महत्वपूर्ण पर्व होने से सामान्यतः 22 जून से ही शक्ति और साधना का गुप्त पर्व प्रारम्भ हो रहा है ।
आर्द्रा के मध्य होने वाला यह विशेष नवरात्र सर्वोत्तम साधना एवं सिद्धि अनुसंधान परा शक्ति उत्पत्ति अविष्कार के लिए महत्वपूर्ण है ,
विशेषकर माता कामाख्या एवं माता विंध्यवासिनी के आश्रय में सिद्ध साधकों के लिए गुप्त साधना के कारण इस नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा गया ।
गुप्त नवरात्र 2017 – जानिये गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि एवं कथा :-
देवी दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि वही इस चराचर जगत में शक्ति का संचार करती हैं। उनकी आराधना के लिये ही साल में दो बार बड़े स्तर पर लगातार नौ दिनों तक उनके अनेक रूपों की पूजा की जाती है। 9 दिनों तक मनाये जाने वाले इस पर्व को नवरात्र कहा जाता है। जिसके दौरान मां के विभिन्न रूपों की पूजा आराधना की जाती है। इन नवरात्र को चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन साल में दो बार नवरात्र ऐसे भी आते हैं जिनमें मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। यह साधना हालांकि चैत्र और शारदीय नवरात्र से कठिन होती है लेकिन मान्यता है कि इस साधना के परिणाम बड़े आश्चर्यचकित करने वाले मिलते हैं। इसलिये तंत्र विद्या में विश्वास रखने वाले तांत्रिकों के लिये यह नवरात्र बहुत खास माने जाते हैं। चूंकि इस दौरान मां की आराधना गुप्त रूप से की जाती है इसलिये इन्हें गुप्त नवरात्र भी कहा जाता है।
कब होते हैं गुप्त नवरात्र
चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र के बारे में तो सभी जानते ही हैं जिन्हें वासंती और शारदीय नवरात्र भी कहा जाता है लेकिन गुप्त नवरात्र आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में मनाये जाते हैं। गुप्त नवरात्र की जानकारी अधिकतर उन लोगों को होती है जो तंत्र साधना करते हैं।
गुप्त नवरात्र पौराणिक कथा :-
गुप्त नवरात्र के महत्व को बताने वाली एक कथा भी पौराणिक ग्रंथों में मिलती है कथा के अनुसार एक समय की बात है कि ऋषि श्रंगी एक बार अपने भक्तों को प्रवचन दे रहे थे कि भीड़ में से एक स्त्री हाथ जोड़कर ऋषि से बोली कि गुरुवर मेरे पति दुर्व्यसनों से घिरे हैं जिसके कारण मैं किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्य व्रत उपवास अनुष्ठान आदि नहीं कर पाती। मैं मां दुर्गा की शरण लेना चाहती हूँ , लेकिन मेरे पति के पापाचारों से मां की कृपा नहीं हो पा रही है, मेरा मार्गदर्शन करें। तब ऋषि बोले वासंतिक और शारदीय नवरात्र में तो हर कोई पूजा करता है सभी इससे परिचित हैं। लेकिन इनके अलावा वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्र भी आते हैं इनमें 9 देवियों की बजाय 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है। यदि तुम विधिवत ऐसा कर सको तो मां दुर्गा की कृपा से तुम्हारा जीवन खुशियों से परिपूर्ण होगा। ऋषि के प्रवचनों को सुनकर स्त्री ने गुप्त नवरात्र में ऋषि के बताये अनुसार मां दुर्गा की
कठोर साधना की ,
स्त्री की श्रद्धा व भक्ति से मां प्रसन्न हुई और कुमार्ग पर चलने वाला उसका पति सुमार्ग की ओर अग्रसर हुआ उसका घर खुशियों से संपन्न हुआ।
कुल मिलाकर गुप्त नवरात्र में विशेष एवं गुप्त कार्यों की सिद्धि हेतु माता की आराधना करने का विधान है ,
क्या है गुप्त नवरात्र की पूजा विधि :-
जहां तक पूजा की विधि का सवाल है मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान भी पूजा अन्य नवरात्र की तरह ही करनी चाहिये। नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए प्रतिपदा को घटस्थापना कर प्रतिदिन सुबह शाम मां दुर्गा की पूजा की जाती है। अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं के पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है। वहीं तंत्र साधना वाले साधक इन दिनों में माता के नवरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की साधना सिद्ध पीठ में करते हैं। ये दस महाविद्याएं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी हैं। लेकिन शास्त्रों का सभी साधकों से आदेश है कि तंत्र साधना किसी प्रशिक्षित व सधे हुए साधक के मार्गदर्शन अथवा अपने गुरु के निर्देशन में ही करना चाहिए । अतः सामान्य नवरात्र विधि के पूजन के साथ साथ कुछ अलग एवं विशेष गुप्त साधना के लिए गुप्त नवरात्र प्रशिद्ध है ,
माता कामाख्या एवं माता विंध्यवासिनी आप सपरिवार की कुशलता बनाये रखें,
एवं आप सबकी सभी शक्तियां जागृत हो ,
जय माता विंध्यवासिनी ,


