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“गुरूवर” गुरूचरण में सब फूल है अर्पण : संगीता ठाकुर

 

“गुरूवर”

पूर्णिमा के पूर्ण चाँद है गुरूवर

भटके पथिक के पथ है भू पर

अमावस्या में प्रकाश बन जाते

ऐसे अनमोल है जग में गुरूवर ।।

अंधेरा जब छा जाता है

मानव मार्ग भटक जाता है

दुर्दशा में जब हम फस जाते

तब आलोक बन जाते गुरूवर।।

गुरू पुजन से धन्य होता है

गुरू दर्शन से सुख मिलता है

आज्ञा उनका मान के देखो

जीवन कितना सुखद होता है।।

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शिष्यों के भगवान है गुरूवर

गोविन्द से भी बढ़कर गुरूवर

कौन गोविन्द कौन गुरू धरा पर

परिचय उनका देते गुरूवर।।

मानव के सुन्दर प्राण है गुरूवर

रूद्रो में महारूद्र है गुरूवर

अंधेरा मे प्रकाश दिखाकर

धरती पर जीवन है गुरूवर

गुरूचरण में सब फूल है अर्पण ।।

संगीता ठाकुर

 

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