Wed. Jun 17th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

मधेश की राजनीति पटरी से उतर गई है : देवेश झा

 


मधेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति के बारे में तराई मधेश राष्ट्रीय अभियान के संस्थापक सदस्य व संस्थापक विदेश विभाग–प्रमुख देवेश झा से हुई बातचीत का मुख्य अंश —
 राजनीतिक क्षेत्र में आप कब से जुडे हैं ?
मैं १९ साल की उम्र से ही राजनीति से जुड़ा हुआ हूँ । वि.सं. २०३९ साल में पहली बार सप्तरी जिल्ला पंचायत सदस्य में निर्वाचित हुआ था । दो टर्म तक अर्थात् वि.सं.२०४५ तक जिल्ला पंचायत सदस्य रहा । प्रजातंत्र पुनस्र्थापना के बाद मै राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (चन्द), जिला समिति सप्तरी का उपाध्यक्ष हुआ । राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी बनने के बाद संसदीय समिति के सदस्य और केन्द्रीय समिति सदस्य भी हुआ । मधेश की राजनीति प्रारंभ होने के बाद किसी पार्टी से नहीं जुड़ा । मधेशी जन अधिकार फोरम नेपाल से आबद्ध नहीं था । फिर भी जयप्रकाश प्रसाद गुप्ता के साथ काम अवश्य किया । वर्तमान में जयप्रकाश गुप्ता जी द्वारा बनाए गए तराई–मधेश राष्ट्रीय अभियान के संस्थापक सदस्य व संस्थापक विदेश विभाग–प्रमुख भी हूं ।
 तमरा अभियान है या पार्टी ?
अभी तक तराई–मधेश राष्ट्रीय अभियान को औपचारिक रूप से दल के रूप में पंजीकृत नहीं किया गया है । लेकिन यह अभियान विशुद्ध रूप से राजनैतिक, वैचारिक संगठन है । और इसी वैचारिक संगठन के जरिये कुछ वर्षों से हम काम करते आ रहे हैं ।
 मधेश की मौजूदा राजनैतिक स्थिति को आप किस प्रकार विश्लेषण करते हैं ?
वर्तमान में मधेश की राजनीति भटक गई है । मधेश की राजनीति को किनारा ही नहीं मिल रही है । मधेशवादी दलों ने मधेश के मुद्दों को जीवन्त रखने में असफल हो गये । मधेश के नेताओं ने सत्ता का समर्पण किया और मधेश के मुद्दों को विसर्जन कर दिया । मधेश के नेताओं को हमने आग्रह किया था कि अगर आप आंदोलन को सही ढंग से संचालित नहीं कर सकते हैं या थक गए हैं, तो कृपया आंदोलन की हत्या मत कीजिए । मुद्दे को समाप्त मत कीजिए । आनेवाली पीढ़ी के लिए छोड़ दीजिए अर्थात् नयी पीढ़ी को सांैप दीजिए । लेकिन उन लोगों ने ऐसा नहीं किया । फल यही हुआ कि अभी मधेश की राजनीति पटरी से उतर गई है ।
समाधान की राह क्या हो सकती है ?
मधेश मूलतः भावुक क्षेत्र रहा है । वहां के लोग राजनीति से ज्यादा भावना में बहते हैं । उत्तेजित हो जाते हैं । वहां की जनता को राजनीतिक रूप से प्रशिक्षित करने की आवश्यकता थी, ताकि वे अपने मुद्दे को अच्छी तरह से समझ सके । लेकिन उन्हें प्रशिक्षित नहीं किया गया । जहां तक सवाल है समस्या समाधान होने का, तो इसके लिए हमे एक लंबा सफर तय करना होगा । क्योंकि मुद्दे को इतना विगाड़ दिया है कि अब उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता है । अब नये मुद्दे तलाशने होंगे । वर्तमान में संविधान कार्यान्वयन में जा चुका है । जबकि मधेश केन्द्रित दलों के नेताओं का कहना है कि हम संविधान कार्यान्वयन होने नहीं देंगे । इसी सन्दर्भ में मैं कहना चाहंूगा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री– चयन प्रक्रिया में संविधानतः शामिल होते हैं, संसद में शामिल होते हैं, यहां तक कि भत्ता भी खाते हैं, और कहते हैं कि हम संविधान को कार्यान्वयन होने ही नहीं देंगे । जबकि वे सभी मिलकर संविधान को कार्यान्वयन कर रहे हैं । इससे बढ़कर हास्यास्पद बात और क्या हो सकती है । इसलिए मैं पुनः कहना चाहंूगा कि समाधान एक दिन की बात नही है । इसके लिए हमें लंबा सफर तय करना पडेÞगा और यह सफर सिर्फ भावनात्मक रूप से ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित तरीके से आगे बढ़ना होगा ।
समस्या समाधान होने में आप विश्वस्त हैं ?
देखिए, समाधान तो होगा ही । हो सकता है हमारे समय में न हो लेकिन समाधान तो होगा । क्योंकि यह राजनीतिक मुद्दे नेपाली समाज में स्थापित हो चुके हैं । यहां तक कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थापित हो चुका है । भले ही यहां के लोग आलोचना करे या इसके बिरुद्ध में लिखे या वकालत ही क्यों न करे । अगर समय पर यह समाधान नहीं हो सका, तो कल यही मुद्दा कैंसर का रूप ले सकता है । राष्ट्र की मृत्यु का कारक तत्व भी बन सकता है । इसलिए राष्ट्र की आयु के भीतर ही समाधान होगा । इसमें मैं विश्वस्त हंू ।
अंत में आप क्या सन्देश देना चाहेंगे ?
मधेश की राजनीति को एक नये स्वरूप देने की आवश्यकता है । इसके लिए हमें दो तीन कार्य करने होंगे । सबसे पहले हमें भय और दंभ को परित्याग करना होगा । दूसरा, आम मधेशी जनता जो भावनात्मक रूप से उत्तेजित हैं, उन्हें राजनीतिक रूप से प्रशिक्षित करना होगा । तीसरा, है मधेश का अभाव मिटाना । इसके लिए जरुरी है कि प्रत्येक मधेशी राजनीतिक प्रचारक बन जाए । अंत में मैं यह भी आग्रह करना चाहंूगा कि अगर कुछ लोग राजनीतिक आंदोलन से थक गए हों या डर गए हों अथवा मन में बेचैनी हो गई हों, तो मौजूदा मुद्दे की हत्या न करें, उन्हें आनेवाली पीढ़ी के लिए छोड़ दे, वे अपनी राह खुद ढंूढ लेगी ।

यह भी पढें   नेपाल के विराटनगर स्थित होटल में प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत, डीएसपी के नेतृत्व में जांच में जुटी पुलिस

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed