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चीन की दादागीरी

 

२७ जुलाइ

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के चीन दौरे की पूर्वसंध्या पर चीन ने दो टूक कह दिया कि डोकलाम मुद्दे पर तब तक कोई बात नहीं हो सकती जब तक भारत उस जगह से पीछे नहीं हट जाता। चीन के विदेश मंत्री वांग ई ने मंगलवार को भी सीमा विवाद के मुद्दे को छेड़ कहा था कि भारतीय सेना वापस लौटे।

बुधवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा कि विदेश मंत्री ने इस विवाद का एकमात्र समाधान बता दिया है। दोनों देशों के बीच किसी भी सार्थक बातचीत के लिए बिना किसी शर्त के भारत को पीछे हटना होगा। गौरतलब है कि गुरुवार को शुरू हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियों की बैठक में शिरकत करने एनएसए अजीत डोभाल बीजिंग पहुंच रहे हैं। ब्रिक्स की इस बैठक में परंपरागत रूप से पांच देशों के सुरक्षा सलाहकार सुरक्षा संबंधी मुद्दों और आतंकवाद के खिलाफ वार्ता करेंगे। यह बैठक अब इसलिए ज्यादा अहम हो गयी है क्योंकि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बढ़ गया है। यह अब तक साफ नहीं हो सका है कि डोभाल अपनी इस चीन यात्रा के दौरान चीन के सर्वोच्च राजनयिक यांग जेयची ने सम्मेलन के इतर अलग से मुलाकात कर पाएंगे या नहीं।

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उल्लेखनीय है कि डोकलाम चीन, भारत और भूटान का साझा प्वाइंट है। लेकिन डोकलाम पड़ोसी मुल्क भूटान के हिस्से में आता है, जहां अब चीन ने सड़के बनाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। इस बात का भूटान ने कड़ा विरोध किया है। भारत ने भी भूटान का समर्थन करते हुए इस पर कड़ा ऐतराज जताया है क्योंकि चीन का ऐसा करना भारत के लिए भी बड़ा खतरा है। इस स्थान से भारत के सामरिक दृष्टि से अहम ठिकाने और हाईवे खतरे में पड़ जाएंगे। लिहाजा, पिछले माह जून में भारतीय सेना ने चीनी सैन्य बलों द्वारा किये जा रहे सड़क निर्माण का काम रोक दिया था। तब से भारत और चीन के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

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