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गजेन्द्रनारायण सिंह अञ्चल अस्पताल (राजविराज) में होता है, बिमार लोगों का खरीद–विक्री

 

सप्तरी, १६ भाद्र ।
स्वास्थ्य और शिक्षा, सेवा मुलक क्षेत्र है । लेकिन व्यापारी लोग इसी को उद्योग बना देते हैं । ‘काठमांडू के अधिकांश निजी अस्पताल, बिमार तथा रोगियों को खरिद–विक्री का धन्दा करते हैं’, ऐसा समाचार तो आपने सुना ही होगा । लेकिन काठमांडू से बाहर भी इस तरह की धन्दा चलती आ रही है । समाचार है– सप्तरी, राजविराज स्थित गजेन्द्रनारायण सिंह सगरमाथा अञ्चल अस्पताल का । कात्तिक १५ गते के कान्तिपुर दैनिक ने यह समाचार प्रकाशित किया है ।
समाचार के अनुसार उक्त अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले बिमार व्यक्ति तथा रोगियों को निजी अस्पतालों में विक्री किया जाता है । उक्त अस्पताल आने वाले बिमार व्यक्ति को अस्पताल के अन्दर से अथवा गेट से ही विराटनगर लगायत पूर्वाञ्चल के अन्य स्थिति निजी अस्पताल के तरफ लेकर जाते हैं, अस्पताल परिसर में रहे मारुती भ्यान तथा एम्बुलेन्स । इसके लिए अञ्चल अस्पताल परिसर में लगभग दर्जन से ज्यादा भ्यान, एम्बुलेस रहता है । बताया गया है कि बिमार व्यक्ति को लेकर जाने वाले भ्यान तथा एम्बुलेन्स ड्राइभर को प्रति बिमार व्यक्ति बराबर न्यूनतम ५ सौ से १ हजार ५ सौ तक मिलता है ।

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इसके लिए निजी अस्पताल ने वहां अपनी एजेन्ट को परिचालित किया है । यह लोग दिखावें के लिए बिमार व्यक्तियों की सहयोेगी के रुप में वहां रहते हैं । स्थानीय बासियों का कहना है कि पूर्वाञ्चल के निजी अस्पताल ने यहां ‘मार्केटिङ एक्ज्युकिटिभ’ को परिचालित किया है, ताकि वह सरकारी अस्पताल में आए बिमार व्यक्ति को अपनी निजी अस्पताल पहुँचा सके । इसके लिए अस्पताल के औषधी विक्री प्रवर्धक एवं मेडिकल रिप्रजेन्टेटिभ भी निजी अस्पताल के एजेन्टों के साथ मिले होते हैं । बताया जाता है कि अस्पताल कर्मचारी एवं चिकित्सक भी उनके साथ होते हैं । लेकिन अस्पताल के कर्मचारी एवं चिकित्सक इस बात को अस्वीकार करते हैं ।
एजेन्ट और दलालों का धन्दा होता है कि वे लोग बिमार व्यक्ति तथा उनके परिवारों को कहते हैं– आप इसी अस्पताल में रहेंगे, तो बिमार व्यक्ति थप परेशानी में पड़ सकते हैं । यहां बिमार लोगों को अच्छी तरह देखभाल नहीं किया जाता है । इसीलिए आप लोग अच्छे अस्पताल में ले चलिए ।’ सेवा–सुविधा, चिकित्सकों की लापरवाही, दक्षता आदि को दिखा कर वे लोग निजी अस्पताल में रोगियों को ले जाने के लिए प्रेरित करते हैं ।
इधर गजेन्द्रनारायण सिंह सगरमाथा अञ्चल अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी और चिकित्सको ने भी स्वीकार किया है कि अस्पताल में पर्याप्त जनशक्ति, शल्यक्रिया, आइसियु कक्ष विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण कुछ व्यक्ति निजी अस्पताल की ओर आकर्षित हो जाते है । अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेन्डेन्ट डा. दया शकरलाल कर्ण का कहना है कि अस्पताल स्तरीय है, लेकिन क्षमता और सेवा उसके अनुसार नहीं हो पा रहा है । इस अस्पताल में कुल १२५ बेड है, इमरजेन्सी सेवा के लिए २५ बेड है । डा. कर्ण के अनुसार अस्पताल में हाडजोर्नी, महिला शल्यक्रिया, आइसियु, एमआइसियु लगायत सेवा नहीं है ।

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