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दुर्गा पूजा अष्टमी : महागौरी की करें पूजा, जानें महत्व–विधि

 

नवरात्रि की अष्टमी तिथि को आठ वर्ष की कन्या की पूजा करें । उसके चरण धुलाकर भोजन करवाएं । फिर उपहार देकर आशीर्वाद लें । आपकी गौरी पूजा संपन्न होगी

कौन हैं मां गौरी और क्या है इनका महत्व
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा का विधान है । भगवान शिव की प्राप्ति के लिए इन्होंने कठोर पूजा की थी, जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था । जब भगवान शिव ने इनको दर्शन दिया, तब उनकी कृपा से इनका शरीर अत्यंत गौर हो गया और इनका नाम गौरी हो गया ।

माना जाता है कि माता सीता ने श्री राम की प्राप्ति के लिए इन्हीं की पूजा की थी । मां गौरी श्वेत वर्ण की हैं और श्वेत रंग में इनका ध्यान करना अत्यंत लाभकारी होता है ।

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विवाह सम्बन्धी तमाम बाधाओं के निवारण मैं इनकी पूजा अचूक होती है । ज्योतिष में इनका सम्बन्ध शुक्र नामक ग्रह से माना जाता है । इस बार माता गौरी की पूजा द्दड सितम्बर को की जाएगी

क्या है मां गौरी की पूजा विधि
पीले वस्त्र धारण करके पूजा आरम्भ करें । मां के समक्ष दीपक जलाएं और उनका ध्यान करें । पूजा में मां को श्वेत या पीले फूल अर्पित करें । उसके बाद इनके मन्त्रों का जाप करें । अगर पूजा मध्य रात्रि में की जाय तो इसके परिणाम ज्यादा शुभ होंगे ।

किस प्रकार मां गौरी की पूजा से करें शुक्र को मजबूत

मां की उपासना सफेद वस्त्र धारण करके करें । मां को सफेद फूल और सफेद मिठाई अर्पित करें । साथ में मां को इत्र भी अर्पित करें ।

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पहले मां के मंत्र का जाप करें । फिर शुक्र के मूल मंत्र “ॐ शुं शुक्राय नमः“ का जाप करें । मां को अर्पित किया हुआ इत्र अपने पास रख लें और उसका प्रयोग करते रहें ।

अष्टमी तिथि के दिन कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा है, इसका महत्व और नियम क्या है

नवरात्रि केवल व्रत और उपवास का पर्व नहीं है । यह नारी शक्ति के और कन्याओं के सम्मान का भी पर्व है । इसलिए नवरात्रि में कुंवारी कन्याओं को पूजने और भोजन कराने की परंपरा भी है ।

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हालांकि नवरात्रि में हर दिन कन्याओं के पूजा की परंपरा है, पर अष्टमी और नवमी को अवश्य ही पूजा की जाती है ।

२ वर्ष से लेकर ११ वर्ष तक की कन्या की पूजा का विधान किया गया है ।

अलग–अलग उम्र की कन्या देवी के अलग अलग रूप को बताती है ।

अगर जरूरत के समय धन नहीं रहता तो करें ये उपाय

मां गौरी को दूध की कटोरी में रखकर चांदी का सिक्का अर्पित करें ।

इसके बाद मां गौरी से धन के बने रहने की प्रार्थना करें ।

सिक्के को धोकर सदैव के लिए अपने पास रख लें

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