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उत्तर भारतीय पर हमला कायरतापुर्ण : फूल सिंह

 

माला मिश्र, तो अब सांगली । अच्छा । पीटोगे हमे । भगाओगे हमे । साठ लाख माल आवाम, हम उत्तर भारतीय, धौंस दिखला दिखला रौंद जाओगे । कायर सुन ले, तेरे भी अपने होते है फल वाले, सब्जी वाले, शर्म कर भाई, हम सहते सहते कहीं इतना न पत्थर हो जाये की मुंबई की गालिया बुत बन जाये । चौबीस घंटे सिर्फ चौबीस घंटे काफी है, देश की आर्थिक राजधानी सन्नाटे में खो जाएगी, बिना एक कतरा लहू बहे, शमसान की तरह खामोसी हो जाएगी, देश का सबसे बड़ा बंद, उस दिन होगा, और ज़िन्दगी थम जाएगी, मुंबई की ।
घिन्न आती है मुझे इस राजनीति पर जो अपनों की लाचारी सहकर किया जाये, अपनों पर अत्याचार होता देख, बस अपने पद को बचाते रहे, मुझे स्वीकार नहीं है । सिर्फ एक दिन जब हम सूर्य को अर्घ देते हैं तो पूरा समंदर छा जाता है, और जब बस एक दिन के लिए कुछ काम न करे तो कल्पना करे, मुंबई का क्या होगा ।
हमारा क्या है दो रोटी का निवाला काफी है, तुम्हारा क्या होगा कालिया, बिना सब्जी फल रह लोगे, खुद गाड़ी चलाओगे, या सुपरस्टार साहब लोग, खुद ही लाइट कैमरा एक्शन करते करते मेकअप भी कर लोगे । हैरान हूँ फिल्मी हस्तिया तक चुप है, जहाँ उत्तर भारतीय का पूरा जमघट है । और हाँ हम सड़क पर सिर्फ रेडी नहीं लगते, कई कॉर्पोरेट हाउस के सी इ ओ भी है हम, राजा भी है हम, और नौकर भी हम, बंद कर दे न्यूज़ चैनल, या और कर दे एलान, क्यों मारते हो उनको जो बेबस है ।
हम गांधी के अनुयायी है, अहिंसा के पुजारी है, हमसे न टकराओ, टकराना है तो चलो कश्मीर में सेना के साथ मिलकर लड़ते है अपने देश के दुश्मनो से, खुद से क्या लड़ना है । जिस धरती से अहिंसा के पुजारी ने अपनी शुरुआत की उसी धरती का अंश हम में है, हमारी सहनशीलता का परीक्षा लेना अब बंद करो । वीर शिवाजी का यह धरती हम इसे नमन करते हैं, मुंबई जितना तुम्हारा उतना हमारा भी है, क्या राम तुम्हारा नहीं है, क्या कृष्णा तुम्हारा नहीं है, क्या गुरु गोबिंद तुम्हारा नहीं है, क्या मजहब और खुदा से रिश्ता तुम्हारा नहीं है, अरे हम उत्तर भारतीय ने इंसान को भगवान दिया है, जिसे सब पूजते हैं, भला हमे भगवान नहीं सम्मान तो दो, दो रोटी का हक़ तो दो । वीर की ये धरती, यहाँ पे कायर वाला काम नहीं करो ।
फुटपाथ पे रहने वाले लोग, अपना व्यवसाय करने वाले लोग अवैध हैं तो फिर इतने दिन से उनको कौन आसरा दिए है, कौन है वो दलाल जो वसूली करता है और राजनेताओं की जेब भरता है, पुलिस से लेकर लोकल गुंडा सब मिले है, एक नेटवर्क है भाई, पहले उसको पहचानो, कुछ करना है तो पहले इनको बसाओ, मुंबई बहुत बड़ा है, यूँ मत उजाड़ो, और हाँ मुंबई बहुत घना है, उनके आशियाने में आग लगाओगे तो घर तुम्हारा भी जलेगा, गारंटी है ।
चेतावनी है, ये अंतिम वार होना चाहिए, नहीं तो आंदोलन हम भी जानते हैं, एक मराठी ने ही सिखलाया है, की गाँधी के विचार में अब भी ताकत है, एक मराठी मानुष हमारे पूज्य अन्ना जी का तो ख्याल करो ।
मैं उत्तर भारतीय पर होने वाले तमाम तरह के हमलो से आहत हूँ, इस तरह के अत्याचार अब हम नहीं सहेंगे, देश और राज्य के सत्ता पर काबिज लोग सुन ले, और फैसला ले, नहीं तो हम चलेंगे, और कारवां निकल पड़ेगा।
आपका भाई
फूल सिंह
जय हिन्द जय भारत
जय बाबा विद्यापति

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