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सू की से प्रतिष्ठित सम्मान ‘फ़्रीडम ऑफ़ द सिटी ऑफ ऑक्सफ़ोर्ड अवार्ड’ आधिकारिक रूप से वापस ले लिया गया

 

२९नवम्बर

म्यांमार की नेता आंग सान सू की से ऑक्सफ़ोर्ड शहर का प्रतिष्ठित सम्मान ‘फ़्रीडम ऑफ़ द सिटी ऑफ ऑक्सफ़ोर्ड अवार्ड’ आधिकारिक रूप से वापस ले लिया गया है. द गार्डियन की ख़बर के मुताबिक़ ऑक्सफ़ोर्ड काउंसिल का कहना है कि वह हिंसा को देखकर भी आंखें मूंदने वालों के साथ खड़ी नहीं हो सकती. म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा और उस पर सू की के रुख की कुछ समय से लगातार आलोचना हो रही है. यही वजह है कि काउंसिल ने उनसे यह पुरस्कार वापस लेने का फ़ैसला किया.

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‘फ्रीडम ऑफ़ द सिटी अवार्ड’ ऑक्सफ़ोर्ड में पढ़े किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति या किसी मशहूर हस्ती को दिया जाता है. आंग सान सू की को 1997 में यह पुरस्कार दिया गया था. 1964 से 1967 के बीच उन्होंने यहां के सैंट ह्यू कॉलेज से राजनीति, दर्शनशास्त्र और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की थी. 2012 में सू की को ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी थी. उनसे पुरस्कार वापस लेने का प्रस्ताव रखने वाली काउंसलर मैरी क्लार्क्सन का कहना है, ‘ऑक्सफ़ोर्ड शहर की परंपरा विविध और मानवीय रही है, और हिंसा को अनदेखा करने वालों ने हमारी प्रतिष्ठा को कलंकित किया है. हमें उम्मीद है कि आज हमने रोहिंग्या मुसलमानों के मानवाधिकारों और न्याय की मांग कर रहे लोगों के साथ अपनी आवाज़ उठाई है.’

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शांति का नोबेल पाने वाली सू की को हाल में रोहिंग्या संकट को लेकर अपने रवैये के लिए दुनिया भर से आलोचना का सामना करना पड़ा है. इसी सितंबर में सैंट ह्यू कॉलेज की गवर्निंग बॉडी ने अपने मुख्य प्रवेश मार्ग से उनकी तस्वीर हटाने का फ़ैसला किया था. पश्चिमी म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ सेना के अभियान के चलते अब तक क़रीब छह लाख रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश की तरफ़ पलायन कर चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र उनके क़त्लेआम की तुलना जातीय सफाए से कर चुका है.

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