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विराटनगर स्थित नोबेल मेडिकल कॉलेज की चरम लापरवाही, शिशु का हाथ टूट गया

 

विराटनगर, ८ जनवरी । विराटनगर स्थित नोबेल मेडिकल कॉलेज (अस्पताल) द्वारा की गई चरम लापरवाही सार्वजनिक हो गई है । कालपरवाही के कारण एक नवजात शिशु की हाथ टूट गया है । घटना विवरण अनुसार मोरङ सुन्दरहरैंचा–३ निवासी ३४ वर्षीया तारा आछामी प्रस्तुति के लिए पौष ९ गते नोबेल अस्पताल भर्ना हुई थी । १० गते शिशू का जन्म हुआ था । प्रस्तुती कराते वक्त संलग्न चिकित्सकों की लापरवाही के कारण शिशू का हाथ टूट गया, लेकिन अस्पताल ने घटना सार्वजनिक न करने के लए पीडितों को दबाव दिया था । इसीलिए घटना लेट से सार्वजनिक हो गई है ।

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पीडित तारा के ससुर धनलाल सार्की के अनुसार दूसरे सन्तान के रुप में बहु ने पुत्र को जन्म दी है । उन्होंने कहा– ‘लेकिन अस्पताल के चरम लापरवाही के कारण मेरा पोता जन्म होते ही अपांग हो गया । उल्टे ही अस्पताल हम लोगों को धमकता है कि घटना को सार्वजनिक मत करों ।’ उनके अनुसार अस्पताल ने आश्वासन दिया था कि मां और बेटा दोनों की उपचार किया जाएगा । उन्होंने आगे कहा– ‘दबाव के कारण ही हम लोगों ने तत्काल घटना को सार्वजनिक नहीं की ।’

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पीडित सार्की के अनुसार टूटा हुआ हाथ की उपचार और प्रस्तुती वापत अस्पताल ने ६० हजार रुपया लिया है । उन्होंने कहा– ‘हाथ का उपचार और प्रसुति संबंधी उपचार कराते वक्त हमारे सभी पैसा खत्म हो गई है । अब हमारे पास पैसा भी नहीं है, लेकिन अस्पताल उपचार के लिए राजी नहीं है ।’ मां की स्वास्थ्य अवस्था भी नाजुक हो रहा है । टूटा हुआ हाथ के पीडा के कारण बच्चा भी दिन–रात रोता है ।’ उनके अनुसार पूर्ण उपचार किए बिना है अस्पताल ने शिशु और मां को डिस्चार्ज किया था । हाथ टूटने के बाद अस्पताल ने प्लास्टर किया था । जब पीडित लोग फलोअप में गए, उसके बाद अस्पताल ने उन लोगों को देखना छोड़ दिया । स्मरणीय है, पीडित तारा के पति चन्द्र आछामी ५ महने पले रोजगारी के लिए विदेश गए थे ।

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