Wed. Apr 24th, 2024

असंतुलित खान-पान और अन्य कारणों के चलते कई महिलाओं का शरीर पर्ूण्ा विकसित नहीं हो पाता है उनके लिए गोमुखासन काफी लाभदायक है । इस आसन के नियमित प्रयोग से महिलाओं को पर्ूण्ा सौर्ंदर्य प्राप्त होता है । साथ ही फेंफडो से संबंधित बीमारियाँ तथा अन्य बीमारियों को दूर रखता है गोमुखासन । इस आसन में हमारी स्थिति गाय के मुख के समान हो जाती है, इसलिए इसे गोमुखासन कहते हैं । स्वाध्याय एवं भजन, स्मरण आदि में इस आसन का प्रयोग किया जाता है । यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभकारी है ।

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गोमुखासन की विधि
किसी शुद्ध वातावरण वाले स्थान पर कंबल आदि बिछाकर बैठ जाएँ । अब अपने बाएँ पैर को घुटनों से मोडÞकर दाएँ पैर के नीचे से निकालते हुए एडी को पीछे की तरफ नितम्ब के पास सटाकर रखें । अब दाएँ पैर को भी बाएँ पैर के ऊपर रखकर एडी को पीछे नितम्ब के पास सटाकर रखें । इसके बाद बाएँ हाथों को कोहनी से मोडÞकर कमर के बगल से पीठ के पीछे लें जाएँ तथा दाहिने हाथ को कोहनी से मोडÞकर कंधे के ऊपर सिर के पास पीछे की ओर ले जाएँ । दोनों हाथों की उंगलियों को हुक की तरह आपस में फंसा लें । सिर व रीढÞ को बिल्कुल सीधा रखें और सीने को भी तानकर रखें । इस स्थिति में कम से कम २ मिनट रुकें । फिर हाथ व पैर की स्थिति बदलकर दूसरी तरफ भी इस आसन को इसी तरह करें । इसके बाद २ मिनट तक आराम करें और पुनः आसन को करें । यह आसन दोनों तरफ से ४-४ बार करना चाहिए । सांस सामान्य रखें ।
गोमुखासन के लाभ
इस आसन से फेफडे से सम्बन्धी बीमारियों में विशेष लाभ होता है । इस आसन से छाती चौडÞी व मजबूत होती है । कंधों, घुटनों, जांघ, कुहनियों, कमर व टखनों को मजबूती मिलती है तथा हाथ, कधों व पैर भी शक्तिशाली बनते है । इससे शरीर में ताजगी, स्फर्ूर्ति व शक्ति का विकास होता है । यह आसन दमा -सांस के रोग) तथा क्षय -टी.बी.) के रोगियों को जरुर करना चाहिए । यह पीठ दर्द, बात रोग, कन्धें के कडÞेपन, अपच, हर्निया तथा आंतों की बीमारियों को दूर करता है । यह अण्डकोष से सम्बन्धित रोग को दूर करता है । इससे प्रमेह, मूत्रकृच्छ, गठिया, मधुमेह, धातु विकार, स्वप्नदोष, शुक्र तारल्य आदि रोग खत्म होता है । यह गर्ुर्दे के विषाक्त -विष वाला) द्रव्यों को बाहर निकालकर रुके हुए पेशाब को बाहर करता है । जिसके घुटनों में दर्द रहता है या गुदा सम्बन्धित रोग है उन्हें भी गोमुखासन करना चाहिए ।
स्त्री-पुरुष दोनों को लाभ
यह आसन उन महिलाओं को अवश्य करना चाहिए, जिनके स्तन किसी कारण से दबे, छोटे तथा अविकसित रह गए हों । यह स्त्रियों के सौर्न्दर्यता को बढÞाता है और यह प्रदर रोग में भी लाभकारी हैं । चौडÞी छाती का होना पुरुषों के व्यक्तित्व को प्रभावशाली और आकर्ष बनाता है । गोमुखासन से पुरुषों का सीना चौडÞा और मजबूत बनता है ।



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