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विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं प्रणब दा,चलता फिरता विश्वकोष

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विलक्षण प्रतिभा, अद्वितीय स्मरण शक्ति और उत्कृष्ट कांग्रेसी के रूप में मशहूर संप्रग सरकार के संकटमोचक माने जाने वाले प्रणब मुखर्जी की राष्ट्रपति चुनाव में जीत भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाली घटना साबित हो सकती है। इस जीत के साथ हालांकि उनकी पांच दशक की सक्रिय राजनीति पर विराम लग जाएगा

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विलक्षण प्रतिभा, अद्वितीय स्मरण शक्ति और उत्कृष्ट कांग्रेसी के रूप में मशहूर संप्रग सरकार के संकटमोचक माने जाने वाले प्रणब मुखर्जी की राष्ट्रपति चुनाव में जीत भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाली घटना साबित हो सकती है

संप्रग की ओर से शीर्ष संवैधानिक पद के प्रत्याशी चुने गए प्रणब को पिछले आठ वर्षों से कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के संकटमोचक के रूप देखा जाता था। 77 वर्षीय प्रणब को चलता फिरता विश्वकोष, प्रशासनिक एवं संविधान मामलों का विशेषज्ञ, कांग्रेस के इतिहास का पोषक और संसदीय नियमों पर प्रतिबद्ध रहने वाला नेता माना जाता है।

कांग्रेस में नंबर 2 माने जाने वाले प्रणब संप्रग सरकार के लिए कितने अपरिहार्य थे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विभिन्न नीतिगत एवं प्रशासनिक विषयों पर विचार के लिए सरकार की ओर से गठित 37 मंत्रियों के समूह (जीओएम) में 24 की अध्यक्षता प्रणब कर रहे थे। यही कारण है कि संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी अपने इस संकटमोचक को दायित्यों से मुक्त करने और इसके कारण सरकार के समक्ष पेश आने वाले खालीपन की भरपाई करने में दुविधा में थीं।

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प्रणब के लिए 45 वर्षों का राजनीतिक सफर आसान न था। 1984 में इंदिरा गांधी के निधन के बाद ऐसा बुरा दौर सामने आया जब प्रधानमंत्री बनने की इच्छा के कारण उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी। कांग्रेस में लौटने में उन्हें समय लगा, लेकिन एक बार जब लौटे तो पीछे मुड़कर नहीं देखा।

कॉलेज के प्राध्यापक और पत्रकार के रूप में कैरियर शुरू करने वाले प्रणब सबसे पहले 1969 में राज्यसभा के लिए चुने गए। उच्च सदन में 1969 में सदस्य बनने के बाद प्रणब 1975, 1981, 1993, और 1999 में फिर चुने गए। आपातकाल के दौरान वे राजस्व राज्यमंत्री थे। 1973 से नौ वर्ष की अल्पावधि में प्रोन्नति प्राप्त कर वे इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में वित्तमंत्री बने।

प्रणब की उपयोगिता उस समय भी सामने आई जब पीवी नरसिंहराव ने उन्हें योजना आयोग का उपाध्यक्ष बनाया और इसके बाद विदेशमंत्री भी बनाया। इस बीच उन्हें संसद का सदस्य नहीं होने के कारण पद छोड़ना पड़ा, लेकिन बाद में निर्वाचित होने पर वे फिर से मंत्रिमंडल में लौटे।

प्रणब ने 1960 में बंगाल कांग्रेस से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। उस समय दिवंगत अजय मुखर्जी संयुक्त मोर्चा सरकार के मुख्यमंत्री और ज्योति बसु उपमुख्यमंत्री थे।

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राजनीति विज्ञान और इतिहास में स्नातकोत्तर प्रणब की स्मरण शक्ति इतनी अद्वितीय है कि उन्हें ऐतिहासिक महत्व, राजनीतिक एवं अन्य विषयों से जुड़ी सभी अहम घटनाएं याद रहती हैं, जो कई नेताओं के लिए ईर्ष्या का विषय भी बनीं।

सरकार में लगभग सभी महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वाह करने वाले प्रणब 1980-85 तक राज्यसभा के नेता रहे। अभी वे लोकसभा के नेता हैं। जब मनमोहनसिंह देश के वित्तमंत्री थे तब मनमोहनसिंह 1982 में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर नियुक्त किए गए थे।

प्रणब और मनमोहन के बीच अनोखी एकरूपता देखी गई जब सिंह 1985-87 के बीच योजना आयोग के उपाध्यक्ष थे और बाद में 1991 से 1996 तक प्रणब ने भी इस पद को सुशोभित किया जब सिंह, नरसिंहराव सरकार में वित्तमंत्री बनाए गए। 1978 में प्रणब कांग्रेस के खजांची और बाद में कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष भी रहे। प्रणव ने देश की राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिति पर पांच पुस्तकें लिखीं। उनके संपादकीय निर्देशन में कांग्रेस का इतिहास प्रकाशित किया गया।

विभिन्न संसदीय समितियों के अध्यक्ष रहे प्रणब को 1997 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार मिला। इसके 10 वर्ष बाद प्रणब को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

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प्रणब का जन्म 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के मिराती में हुआ। उनके पिता का नाम कामदा किंकर मुखर्जी और माता का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी है। उनका विवाह 13 जुलाई 1957 को शुभ्रा मुखर्जी से हुआ था। उनके दो बेटे और एक पुत्री है। पढ़ना, बागवानी और संगीत उनका शौक है।

प्रणब दा रणनीतिक कौशल : अमेरिका के साथ असैनिक परमाणु करार संपन्न कराने और उसके साथ संबंधों को सुधारने में प्रणब मुखर्जी ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। मुंबई पर आतंकवादी हमलों के उपरांत विश्व जनमत को पाकिस्तान के खिलाफ सक्रिय करने में भी उन्होंने गजब के रणनीतिक कौशल का परिचय दिया।

वे योजना आयोग के उपाध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक कोष, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक तथा अफ्रीकी विकास बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य भी रहे। आंकड़ों के मामले में गजब की स्मरण शक्ति के स्वामी प्रणब राजनीतिज्ञों की आज ऐसी जमात के प्रतिनिधि कहलाते हैं जिसे भारतीय राजनीति में विरला कहा जाता है। (एजेंसियां/वेबदुनिया)

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