प्रदेश एक में आर्थिक संवृद्धि की सम्भावना मित्र राष्ट्र भारत की सकारात्मक पहल
रणधीर चाैधरी
२९ मार्च
नेपाल स्थित भारतीय राजदूतावास कैम्प आफिस बिराटनगर और नेपाल भारत उद्योग वाणिज्य संघ विराटनगर चैप्टर के संयुक्त आयोजना मे प्रदेश—१ के सीमा से जुड़े व्यवसायिक और पर्यटकीय विकास के लिए आयोजना किया गया सिम्पोजियम अर्थात संगोष्ठी का साक्षीकिनारा बनने का अवसर प्राप्त हुवा । गजब का संगम था नेपाल और भारत के दिग्गजो का । प्रदेश को आर्थिक एवं समग्र मे सम्पन्नता की राह पे कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है इस के लिए मित्र राष्ट्र का पहल काबिले तारिफ है ।
नोपाल और भारत के बीच जब भी कोई चर्चा होती है तो दोनों तरफ से एक ही आवाज सुनने को मिलती है “नेपाल और भारत के बीच रोटी बेटी का सम्बन्ध है”। परंतु बिराटनगर के आयोजित कार्यक्रम मे एक नवीन भाष्य का निर्माण होते दिखा । वह था, अब नेपाल भारत के बीच “रोजी रोेटी” का सम्बन्ध स्थापना करना होगा । जिस से दोनो देश के विकास मे बल पहँुच सकता है । भारतीय दुतावास कैम्प आफिस बिराटनगर के प्रमुख निरज जैसवाल ने सिम्पोजियम का उद्देश्य दर्साते हुवे कहा कि, नेपाल के प्रदेश—१ भारत के तीन राज्यो से भौगोलिक हिसाब से जुड़ना इस प्रदेश के लिए फायदेमन्द हो सकता है । वास्तव मे प्रदेश—१ भारत के बंगाल, बिहार और सिक्किम मे सामीप्यता रखता है । इन सभी के बीच सांस्कृतिक, समाजिक एवं रोटी बेटी का सम्बन्ध तो है ही । अब दुनिया मे बढ रही आर्थिक प्रगति को आत्मसात करते हुवे प्र्रदेश—१ को व्यापारिक एवं पर्यटकीय सम्बन्ध भी बिस्तार करना फलदायी होगा, भारत के लिए भी ।

प्रदेश—१ की कुल जनसंख्या ४५,३४,९४३ है वही अगर इस प्रदेश से जुड़े भारत भारत के शहर एवं कसवो का जनसंख्या जोड़ दिया जाय तो कुल नब्बे लाख होता है और प्रदेश—१, भारत के बिहार, बंगाल और सिक्किम की जनसंख्या को एकसाथ रख दिया जाय तो कुल बीस करोड़ का आकड़ा छू जाता है । इस जनसंखिकी का सीधा सम्बन्ध व्यापार और पर्यटन से हो जाता है । प्रदेश—१ की सरकार या कहे तो नेपाल सरकार पर्यटन पे थोड़ा ध्यानाकृष्ट करे तो प्रदेश—१ मे रहे पर्यटन की अपार सम्भावनाओ से आर्थिक लाभ हासिल कर देश को आर्थिक रूप से सबल बनाने मे सफल हो सकती है । 
परंतु, खेद की बात है । जहाँ कोई विकास की राग छेड़ रहा है वही प्रदेश—१ की पर्यटन मन्त्री जगदिस कुर्सेत राजनीति का बेसुरा स्वर साधते दिखे । कहा जाता है कि किसी के उपर आप को टिप्पणी करना हो तो उनके पृष्ठभुमि के बारे मे छोटा शोेध अवश्य करना चाहिए । परंतु पर्यटण मन्त्री के बारे मे बिना शोध करते हुवे टिप्पणी करने की धृष्टता करना इस आलेख मे लाजमी सा लगता है । अपने मंतब्य मे मन्त्री ने प्रदेश—१ के कुछ सम्भावित पर्यटकीय स्थलो का नाम लेते दिखे परंतु उसे कैसे पर्यटन व्यवसाय मे परिणत किया जाय इस की कमी दिखी उन मे । समृद्धि के बहस चल रही सभा मे उन्होंने मधेश आन्दोलन के दौरान मधेशी दलो द्वारा किया गया नाकाविरोध के बारे मे भाषण कर अपना उर्जा नष्ट करते दिखे । देश संघीय व्यवस्था मे जाने का मकसद था देश को आर्थिक प्रगति की ओर ले जाना । परंतु राज्य पक्ष अगर आरोप प्रत्यारोप के राजनिती के दायरे से नही उठा तो सायद दक्षिण एशिया का सबसे गरीब राष्ट्र अफगानिस्तान नेपाल से आगे निकल जायगा । अभी वक्त है अपने पड़ोसी राष्ट्र और कहे तो विश्व स्तर से नेपाल को सहयोग ले कर देश को संवृद्धि की ओर ले जाना ।
मानना है की भारत की प्रगति मे वहा के रेलवे कनेक्टीविटी का बहुत बडा योगदान है । और नेपाल रेलवे जैसी विकास की लाइफलाईन के लिए तरसा हुआ देश है । बर्षो पहले जनकपुर से जयनगर चलने वाली रेल बन्द होने के बाद फिलहाल देश के प्रदेश—२ में जयनगर से बर्दिबास तक अब रेल दौड़ने को है । वही भारत के सहयोग से ही बिहार के बथनाहा से ले कर बिराटनगर तक रेलबे लाईन का काम युद्घस्तर पे जारी है । यह परियोजना फतेह हो जाने के बाद दोनो प्रदेश मे व्यापार बढने की अपार सम्भावना दिख रही है ।
वही प्रदेश के बिरगंज मे “इन्टिग्रेटेड चेक पोष्ट” आर्थात आइसिपी का शुरुवात हो गया है और प्रदेश—१ मे भी आइसिपी का निर्माण कार्य जारी है । जोगवनी भन्सार के प्रमुख पवन कुमार के अनुसार भारतीय पक्ष मे अभी लगभग ७५ प्रतिशत एक्सपर्ट आसिपी के माध्यम से किया जा रहा है वही नेपाल तर्फ यह प्रगति शुन्य है अभी । यह चिन्ता का बिषय है । किसी भी पक्ष चाहे भारत हो या नेपाल, कमी किस पक्ष से है ? उस को तलाश कर इस कार्य को तीब्रता देना समय की माग है ।
सिम्पोजियम मे नेपाल के कई वक्ताओं का कहना था कि भारतद्वारा संचालित परियोजन कछुवे की गति मे है । और हुलाकी सडक अभी तक न बन पाने के कारण नेपाल के सहभागियो मे भारत के प्रति नाराजगी तो थी ही । वास्तव मे यह सत्य भी है । परंतु परियोजनाओं का कार्यान्वयन मे तीब्रता न दिखने का कारन नेपाली अस्थिर राजनिती भी है । परंतु अभी के बदले हुवे राजनितिक परिवेश मे कम से कम दो साल के लिए तो यह सरकार को स्थिर समझा जा सकता है । पाँच साल भी हो सकता है । ऐसी परिस्थिति मे सभी को एक जुट हो कर देश को आर्थिक सम्पन्नता की ओर बढाना चाहिए । हुलाकी सडक परियोजना को नेपाल सरकार को भी अग्रसुची मे रखना चाहिए । परंतु चुकी यह सड़क सीधा मधेश के आर्थिक प्रगति से जुडे होने के कारण नेपाल सरकार को भी अपनी ओर से इस मे पहल कदमी लेना चाहिए । क्यूँकि मधेश के प्रगति बिना देश का प्रगति असम्भवप्रायः है ।
समग्र मे कहा जाय तो नेपाल—भारत के पदाधिकारियो के बीच आयोजना किया सिम्पोजियम ने प्रदेश—१ को आर्थिक, पर्यटकीय और समग्र मे कहा जाय तो संवृद्धि के मामले मे नम्बर—१ बनाने के लिए किया गया संकल्प का शंखनाद है । प्रदेश—१ के कम्युनिस्ट सरकार को अन्धराष्ट्रवाद से उपर उठ कर प्रदेश और देश को विकाश की शिखर पे ले जाने का संकल्प लेना फलदायी सिद्घ होगा ।


