राजपा और फोरम नेपाल के बीच लफडा, प्रदेश सरकार संकट में
जनकपुर, १८ मई । गत मई ११ के दिन भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी नेपाल भ्रमण में आए थे, प्रदेश नं. २ की राजधानी जनकपुर होते हुए प्रधानमन्त्री मोदी नेपाल प्रवेश किए थे । प्रदेश नं. २ में प्रदेश सरकारी की ओर से मोदी को भव्य स्वागत भी किया गया । लेकिन मोदी को स्वागत करते वक्त जो खर्च की गई है, उसमें भ्रष्टाचार हुआ है, ऐसी आरोपों के साथ संघीय समाजवादी फोरम नेपाल और राष्ट्रीय जनता पार्टी के प्रदेश सांसदों के बीच लफड़ा शुरु होने लगा है । समाचार स्रोत के अनुसार प्रदेश सरकार के सामने ७ करोड़ २० लाख रुपयों की बील पेश होने जा रहा है । नेताओं का कहना है कि उक्त रकम मोदी–भ्रमण के दौरान खर्च की गई है ।

यह भी दावा की जा रही है कि फोरम नेपाल और राजपा गठबन्धन में निर्मित प्रदेश सरकार भी संकट में फंसता जा रहा है । यहां त कि मोदी भ्रमण और खर्च संबंधी सवालों को लेकर प्रदेश सांसदों के बीच हाथपाई की अवस्था सिर्जना हुई है । कुछ नेताओं का मानना है कि मोदी–भ्रमण संबंधी खर्च को लेकर जो बील पेश होने जा रहा है, उस में अधिक भ्रष्टाचार किया गया है । कृषि मन्त्री शैलेन्द्र साह के संयोजकत्व में हाल ही में जनपरिचालन समिति की बैठक आयोजन हुआ था । उक्त बैठक में कृषि राज्यमन्त्री एवं फोरम नेपाल के सांसद् योगेन्द्र राय यादव और राजपा के सांसद डिम्पल झा के बीच बील के संबंध में विवाद हुआ है । बील पेश करनेवाले नेताओं ने दावा है कि मोदी भ्रमण के दौरान ३३५ गाडी प्रयोग कर सर्वसाधारण को जनकपुर लाया गया है, उसमें ८७ लाख खर्च हो गई है ।
इतना ही नहीं फोरम नेपाल और राजपा के बीच प्रदेश सरकार संचालन के सवाल में भी लफड़ा होने लगा है । विशेषतः मुख्यमन्त्री लालबाबु राउत द्वारा व्यक्त अभिव्यक्ति को लेकर विवाद बढ़ने लगा है । मुख्यमन्त्री राउत द्वारा व्यक्त विचारों को फोरम नेपाल प्रतिरक्षा कर रही है, लेकिन अभी तक राजपा ने इसके संबंध में औपचारिक रुप में कुछ भी नहीं कहा है । विवादों के बीच में ही सभामुख सरोज यादव ने मुख्यमन्त्री राउत को संसद में जवाफ देने के लिए कहा है, जिसके चलते फोरम नेपाल भी राजपा के प्रति सशंकित है । राजपा नेताओं को यह भी मानना है कि मोदी–भ्रमण के दौरान व्यवस्थापन कमजोर दिखाई दिया है ।
अब बाम गठबंधन निकट विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश नं. २ मे सत्ता की समीकरण में बदलाव भी आ सकता है । अगर सत्ता परिवर्तन का खेल होगी तो प्रदेश नं. २ में वाम गठबंधन अर्थात् नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी के नेतृत्व में नयां सरकार बनने की सम्भावना अधिक है । स्मरणीय है, नेकपा एमाले और माओवादी केन्द्र के बीच पार्टी एकीकरण होने के बाद प्रदेश नं. २ के लिए सबसे बड़ा दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी बन गई है । इससे पहले तक फोरम नेपाल प्रदेश नं. २ के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक दल रहा था । अब ३४ सिटों के साथ प्रदेश नं. २ में नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी प्रथम शक्ति बनी है । उसके बाद फोरम नेपाल २९ सिटों के साथ दूसरे और राजपा नेपाल २४ सिटों के साथ तीसरे शक्ति के रुप में है । प्रदेश नं. २ में नेपाली कांग्रेस का १९ सिट है और स्वतन्त्र एक सांसद् है । अगर फोरम और राजपा के बीच सत्ता समीकरण में कुछ बदलाव आ जाता है तो प्रदेश नं. २ में ‘किंग–मिकेर’ के रुप में नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी ही रहेगी । अर्थात नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी जिसको चाहती है, उसी के नेतृत्व में नयां सरकार बन सकती है ।

