मिथिला चित्रकार रन्जु यादव का बंगलादेश अनुभव
हिमालिनी, अंक,जून २०१८ | नेपाल के चित्रकला जगत में एक उभरता युवा नाम है – रन्जु यादव । रंजु यादव लोक परम्परा पर आधारित विश्व प्रसिद्ध मिथिला चित्रकला बनाती हैं । मिथिला चित्र बनाने का इनका अपना अलग ही अन्दाज हैं । रन्जु लोक शैली में परम्परागत विषय वस्तुओं पर पेन्टिङ करती हंै । मगर आज के दौर के सभी मिथिला चित्रकार से वो अलग हैं । उनकी खास विशेषता यह है कि उनके चित्रों में समाज के विभिन्न मुद्दों, समस्याओं और विकृतियों का विरोध चित्रित होता है ।
चित्रकार रन्जु हाल ही में अपने कला का जौहर दिखाने बंगलादेश गयी थी । बंगलादेश के संस्कृति मन्त्रालय और बंगलादेश शिल्पकला एकेडेमी के आयोजन में राजधानी ढाका में नेपाल कला मेला–२०१८ सम्पन्न हुआ । ७ मई से १३ मई तक चले इस कला महोत्सव में रन्जु ने मिथिला चित्रकला का प्रतिनिधित्व किया । उस आयोजन में नेपाल के अन्य कलाकार भी शामिल थे । कलाकार के तौर पर रन्जु की यह पहली विदेश यात्रा थी । रन्जु कहती हैं कि अपने कला कौशल को विदेशी भूमि पर दिखाने का यह बहुत ही बड़ा अवसर था । इस सहभागिता से वो गौरवान्वित महसूस करती हैं । बंगलादेश के संस्कृति मन्त्री सहित अन्य विशिष्ठ महानुभावों के सामने उन्होंने प्रत्यक्ष मिथिला चित्र बना कर अपनी कला का परिचय दिया। तत्पश्चात् रन्जु सहित अन्य नेपाली चित्रकारों ने बंगलादेश के समकक्षी चित्रकारों के साथ दो दिवसीय कार्यशाला में भाग लिया था ।
रन्जु कहती हैं कि बंगलादेश कलाकारों के साथ काम करने में उन्हें बहुत अच्छा लगा और उन्हे बहुत कुछ सीखने को भी मिला । नेपाल ललितकला प्रज्ञा प्रतिष्ठान के लोककला विभाग के प्रमुख एवं वरिष्ठ मिथिला चित्रकार एससी सुमन के मुताबिक रन्जु तीव्र गति से उभर रही मिथिला कलाकार हैं और उन में दिख रही अलग क्षमता और अपार सम्भावनाओं के बदौलत बंगलादेश में सम्पन्न नेपाल कला मेला के लिए उन का चयन किया गया । नेपाल कला मेला में वरिष्ठ चित्रकार सुमन भी शरीक हुए थे ।
सामाजिक कुरीति पर बनायी गयी रन्जु की एक पेन्टिङ बहुत ही चर्चित हुई है । उस पेन्टिङ में दहेज प्रथा की विभिषिका को दर्शाया गया है । पेन्टिङ में एक तराजु को दिखाया गया है । तराजु के एक पलड़े में एक दूल्हा बैठा है । दुसरे पलड़े में लडकी पक्ष के द्वारा दहेज के तौर पर दिये जानेवाले लाखों लाख रुपयाँ, फर्निचर के सामान, कार, मोटरसाइकल, गहना, जेबरात और भैंस को रखकर तौला जा रहा है । फिर भी दूल्हा का पलड़ा भारी ही हैं । दुल्हन वरमाला लेकर दूलहा के बगल में तराजु के पास खड़ी है । दूसरे पलड़े के पास दुल्हन के पिताजी रुपयों के बन्डल और अन्य जिन्सी सामान पलड़े में रखकर दोनो पलड़े को बराबर करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि उन की बिटिया रानी दूल्हा को वरमाला पहना सके और उन की लाडली बेटी की शादी हो सके ।
चित्रकार रन्जु ज्यादातर चित्र इसी तरह के सामाजिक विषयवस्तुओं पर बनाती है । इसी लिए रन्जु अन्य मिथिला चित्रकारों से अलग हैं । रन्जु का कहना है कि वो अपने चित्रकला के माध्यम से मिथिला और मधेशी समाज में व्याप्त हर तरह के अन्याय, अत्याचार, कुरीति और कुप्रथा से लड़ना चाहती है । और, इसी तरह नव प्रयोग और नये विषयवस्तुओं के माध्यम से मिथिला पेन्टिङ को वो नई दिशा देना चाहती है ।
मिथिला पेन्टिङ रन्जु बचपन से करती आ रही है । विद्यालय स्तरीय अनेक प्रतियोगिताओं और प्रदर्शनी में रन्जु सहभागी हो चुकी है । रन्जु कहती है कि उस ने अपनी दादी, माँ और काकी से यह परम्परागत पेन्टिङ सीखी हैं । पहले वो विभिन्न पर्व, त्योहार और सांस्कृतिक अवसर में भूमि और घर के दीवार पर चित्र बनाती थी । कपड़ा पर कढ़ाइ और रंग भरती थी । हाथों मे बहुत सुन्दर मेहन्दी सजाती थी । अब वो व्यवासायिक चित्रकार हो गयी हैं और कागज और क्यानभास पर मिथिला पेन्टिङ करती हैं । रन्जु ५÷६ साल से रन्जु काठमाण्डू में व्यवसायिक रूप से चित्रकारी कर रही है । जनकपुर के चर्चित मिथिला चित्रकार अजीत साह रन्जु के गुरु हैं । उन्होने रन्जु को कागज और क्यानभास पर मिथिला चित्र बनाने के लिए सिखाया हैं । बंगलादेश से आने के बाद रन्जु फिर से पेन्टिङ करने में व्यस्त हैं । निकट भविष्य में वो काठमाण्डू में अपनी पहली एकल चित्रकला प्रदर्शनी करना चाहती हैं । एकल चित्रकला प्रदर्शनी के भव्य सफलता और मिथिला चित्रकार के रूप में उन के उज्वल भविष्य के लिए रन्जु जी को बहुत बहुत शुभकामनाएँ !



