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पीड़ा को सहने की तरकीब : डॉ. रूपेश जैन

 

पीड़ा को सहने की तरकीब

हे नीलकंठ तुमे शत शत नमन

कंठ में गरल धरते हो

सदियों से पीड़ा को सहते हो

मैं भी विष का चषक पीने वाला हूँ

इस पीड़ा को सहने की कोई तरकीब बताओ

तुम जैसा स्थिर रहने की कोई तदबीर बताओ

विषयों का सरल अबलोकन करना था

मैं मुढ, क्या जानू मंथन में विष मिलता है

अब आत्म पल-पल गरल में जलता है

सारा अबलोकन अब भूल गया

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इस पीड़ा को सहने की कोई तरकीब बताओ

तुम जैसा स्थिर रहने की कोई तदबीर बताओ

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’

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