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बुद्धिजिवियों के साथ राजपा का विचार–विमर्श

 

प्राप्त सुझाव राजपा के लिए अपना विचार बनाने में सहयोगी सिद्ध हो सकता है : अनिल झा

काठमांडू, २१ जुलाई । राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल (राजपा) नेपाल ने बुद्धिजीवि तथा नागरिक समाज के बीच समसामयिक विषयों में विचार–विमर्श किया है । राजपा संयोजक महन्थ ठाकुर, अध्यक्ष मण्डल के सदस्य तथा पार्टी के अन्य शीर्ष नेतागण के साथ ‘संविधान का कार्यान्वयन और समावेशी लोकतन्त्र’ शीर्षक में शनिबार को आयोजित विचार–विमर्श में बौद्धिक जगत में गिने–चुने विभिन्न व्यक्तियों की उपस्थिति थी । उपस्थिति व्यक्तित्व ने संघीयता का कार्यान्वयन, समावेशी लोकतन्त्र, राजपा की भावी राजनीति, मधेश आन्दोलन संबंधी मुद्दा और संविधान संशोधन के संबंध में अपने–अपने विचार प्रकट किया ।

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राजपा अध्यक्ष मण्डल के सदस्य अनिल झा के अनुसार राजपा को भावी दिनों में दिशानिर्देश करने के लिए यह विचार–विमर्श सहयोगई सिद्ध हो सकता है । उनके अनुसार बुद्धिजीवि सर्कल से प्राप्त सुझाव के बाद राजपा भी अपनी धारणा बनाएगी । हिमालिनी से बातचीत करते हुए नेता झा ने कहा– ‘आज संविधान कार्यान्वयन की बात हो रही है, संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र के प्रति कुछ असन्तुष्टि भी दिखाई देने लगी है, राजनीतिक व्यवस्था तथा सत्ता सञ्चालन के प्रति जनता में जो असन्तुष्टि दिखाई दे रही है, उसमें सरकार सम्वेदनशील नहीं दिखाई दे रही है । ऐसी अवस्था में राजपा को क्या करना चाहिए ? अर्थात् राजपा की भूमिका क्या हो सकती है, इसके लिए बुद्धिजीवि, नागरिक समाज तथा विश्लेषकों का सुझाव के लिए यह विचार–विमर्श आयोजित किया गया है ।’ उनका कहना है कि बुद्धिजिवियों से प्राप्त सुझाव राजपा के लिए विचार निर्माण में सहयोगसिद्ध हो सकता है ।

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नेता झा ने के अनुसार कार्यक्रम में सहभागी वक्ताओं की ओर से सुझाव आया है कि राजपा एक संघर्षशील, लोकतान्त्रिक पार्टी है, जो संविधान में रहे त्रुटियों को करेक्सन करके आगे बढ़ना चाहती है । नेता झा ने आगे कहा– ‘इस मुद्दा को लोकतान्त्रिक तवर से और भी सशक्त रुप से आगे ले जाने के लिए सुझाव आ रहा है ।’ उनका यह भी मानना है कि समावेशी लोकतन्त्र और संविधान कार्यान्वयन के लिए वर्तमान सरकार कितनी प्रभावकारी हो रही है और इसमें राजपा क्या कर सकती है, इसके लिए भी विचार गोष्ठी आयोजन किया गया । विचार गोष्ठी में परराष्ट्रविद रमेशनाथ पाण्डे, मानवअधिकारवादी तथा राजनीतिज्ञ दमननाथ ढुंगाना, राजनीतिक विश्लेषक सीके लाल, सामाजिक अभियान्ता सुन्दरमणि दीक्षित, कानुनविद् तथा विश्लेषक डा. सुरेन्द्र झा आदि लोगों की सहभागिता रही थी ।

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