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अन्तराष्ट्रीय पहचान ही मधेश समस्या का असली समाधान है : अब्दुल खान

 

८ अगस्त

अब्दुल खान

मधेश अाैर मधेशियाें के हक हित मे कार्यरत मधेश वादी दलाे के शीर्षस्थ नेतृत्व अपने मूल मुद्दे से विचलित हाेकर भ्रम मे बुरी तरह फंस चुके हैं,खास ताैर अपने ही मुद्दाे का गलत हाेने का दावा करने लगे हैं अाैर अपने ही निचले स्तर के नेताअाे काे भ्रष्ट अाैर बेकार हाेने की दलीलें देने मे नहीं झिझकते हैं।खास ताैर पे देखा जाय ताे मधेश के प्रमुख नेता मधेश मुद्दे पर महा फेल हाे चुके हैं। इस अवस्था मे मधेश के विभिन्न दल या राजनीतिक गैर राजनीतिक स्तर पर काम कर रहे युवा शक्ति काे एक जुट हाेकर मधेश काे कुशल नेतृत्व देने की भूमिका निर्वाह करनी चाहिये,अपने निजी अाैर नितान्त व्यक्तिगत प्रलाेभन काे त्याग कर मधेश की समस्या,पहचान,अस्तित्व काे अन्तर्राष्ट्रीय फाेरम पर लेजाकर असली समाधान निकालना चाहिये उसी से ही मधेश की समस्या का समाधान हाे सकता है।मधेश के पहचान,सम्मान अाैर अधिकार के लिये शहीद हुवे तमाम वीर शहीदाे का नमन कर उन के सपने काे साकार कर ने मे एकता दिखानी चाहिये। मधेश मुद्दे काे राष्ट्रीय ,अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर  उठा कर नेपाल सरकार काे चाराे अाेर से घेरे मे लेकर जनमतसंग्रह कराने पर मजबुर करनी चाहिये।मधेश अपने अस्तित्व मे अाने के वाद मे ही नए युग की शुरुवात हाे सकती है तत पश्चात् मधेश समृद्धि अाैर अार्थिक क्रान्ति की अाेर जा सकता है,बिना स्थाई समाधान के समाधान ढूढना रेत मे पानी डालने समान हाेगा। अब मधेश के सामने अन्तिम अाैर अाखरी फन ही अस्तित्व मे अाने का है अन्य काेई विकल्प बांकी नहीं है।मधेश नेपाल मे ही पहचान पाने के लिये काेई कसर नही छाेडा है वि. स. २००७ साल मे राणा के खिलाफ लडा,वि. स. २०३६,२०४६ पंचायत व्यवस्था के खिलाफ,वि. स.२०६२/६३ मे राज शाही के खिलाफ,वि.स.२०६३/६४ मे एक मधेश प्रदेश के लिये,फिर वि. स. २०७२ मे जारी हुवे नयें विभेद कारी संविधा के लिये अान्दाेलन,बलिदानी अाैर विद्राेह किया इस के अलावा नागरिकता,राेजगारी,सुकुम्बासी ,पुर्नवास,खाद बीज,सिंचायी अाैर अाग बाड के लिये प्रत्येक दिन लड ही रहा है पर समस्या अपनी जगह ही हैं।शासक वर्ग कि नस्लीय साेच खास कर मधेश की समस्या राष्ट्रीयता की है,मूलत: नेपाली राष्ट्रीयता अाैर मधेशी राष्ट्रीयता इस का समाधान दाेनाे राष्ट्रीयताअाें काे अपने अपने अस्तित्व काे स्वीकारना हाेगा यह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मधेश की पहचान से सम्भव है। अाज शासक हमे टुकडाे,टुक्डाे मे बांट कर कमजाेर करने मे लगा है अाैर हम सब उन्ही के गाेल चक्कर मे फंसे है,अपनी अानबान शन काे भूला कर राजसी भाेग विलाश मे लिप्त हाेगये कि अपनी पहचान काे ही भूल चुके है,अब ज्यादा विलम्ब करना बहुत ही घातक साबित हाेगा अानेवाली सन्तति के लिये,मेरे युवा मित्राे जागाे तैयार हाेजाअाे मधेशी जनता अाप के नेतृत्व के लिये झाेली फैलाये खडी बस एक हुंकार भरना हाेगा।अाप लाेग सत्य,न्याय अाैर अंहिसा का सहारा लेकर अागे बढना हाेगा उस धरती माँ के लिये जिस ने जन्म से लेकर मृत्युु तक हर पल काम अाती है।जीवन मरण एक निरन्तर प्रक्रिया है।

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